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चारा घोटाला : लालू और जगन्नाथ मिश्रा को और करना होगा इंतजार, दुमका कोषागार मामले में फैसला फिर टला

कोर्ट ने इस मामले पर फैसले को 19 मार्च तक टाल दिया है.

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चारा घोटाला : लालू और जगन्नाथ मिश्रा को और करना होगा इंतजार, दुमका कोषागार मामले में फैसला फिर टला

लालू यादव (फाइल फोट)

खास बातें

  1. यह मामला दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 के बीच का है.
  2. दुमका कोषागार से 13.13 करोड़ रुपये फर्जी तरीके से निकालेे गए
  3. बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद और जगन्नाथ मिश्रा भी आरोपी हैं
रांची: चारा घोटाले के चौथे मामले में लालू प्रसाद यादव और बिहार के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्रा पर सीबीआई की विशेष अदालत का फैसला एक बार फिर टल गया है. अब 19 मार्च को इस मामले पर फैसला आ सकता है. सीबीआई के स्पेशल जज  शिवपाल सिंह समेत सभी जज ज्युडिशियल अकादमी धुर्वा में दो दिवसीय ट्रेनिंग में भाग लेने के लिए गए हैं. इसी वजह से शनिवार को आने वाला फैसला टल गया.

बता दें कि चारा घोटाले के दुमका कोषागार से तीन करोड़ तेरह लाख रुपये की अवैध निकासी से जुड़े मामले में रांची की सीबीआई जज शिवपाल सिंह की विशेष अदालत ने शुक्रवार को फैसला एक दिन के लिए टाल दिया था. सीबीआई जज ने पहले इस फैसले की तारीख 15 मार्च तय की थी, लेकिन लालू की तरफ से दायर की गई याचिका के कारण फैसला टल गया. लालू फिलहाल रांची की बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं.

लालू ने की है याचिका दायर
दुमका केस में फैसला आने से ठीक पहले दायर की गई अपनी याचिका में लालू ने कहा था कि दुमका कोषागार से अवैध निकासी के मामले में उस वक्त के तत्कालीन एकाउंटेंट जनरल पीके मुखोपाध्याय समेत तीन लोगों को आरोपी बनाया जाए. अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 319 के तहत लालू ने इन तीनों को भी नोटिस जारी कर इस मामले में सह अभियुक्त बनाने का अनुरोध किया है. इस याचिका पर फैसला सुनाने के बाद ही दुमका कोषागार से अवैध निकासी मामले में लालू पर फैसला सुनाया जाएगा.

अदालत ने बिहार के तत्कालीन महालेखा परीक्षक समेत महालेखाकार कार्यालय के तीन अधिकारियों के खिलाफ इसी मामले में मुकदमा चलाए जाने की लालू प्रसाद की याचिका स्वीकार करते हुए तीनों को समन जारी करने का निर्देश दिया. केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत के न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने शुक्रवार को कहा था कि दुमका कोषागार से गबन मामले में शनिवार को फैसला सुनाया जाएगा.
 
गौरतलब है कि आरजेडी सुप्रीमो को चारा घोटाले के तीन मामलों में पहले ही दोषी करार दिया जा चुका है. उन्हें कुल मिलाकर अब तक 13.5 साल की सजा सुनाई गई है. लालू पर आरोप है कि उन्होंने 1995 -96 के बीच में बिहार के मुख्यमंत्री रहते हुए इस कोषागार से 3.13 करोड़ की अवैध निकासी की. इस मामले में लालू यादव के साथ पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा और 29 अन्य लोग आरोपी हैं. दुमका कोषागार से अवैध निकासी मामले में कोर्ट में सुनवाई 5 मार्च को पूरी हो गई थी.
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सीबीआई अदालत ने पहले लालू की उस नयी याचिका पर फैसला सुनाया जिसमें उनके वकील आनंद ने चारा घोटाले के इस मामले में बिहार के तत्कालीन महालेखा परीक्षक, उपमहालेखा परीक्षक तथा महालेखाकार कार्यालय के निदेशक पर संलिप्तता का मुकदमा चलाने की मांग की थी. अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 319 के तहत लालू ने इन तीनों को भी नोटिस जारी कर इस मामले में सह अभियुक्त बनाने का अनुरोध किया था. 

टिप्पणिया अदालत ने संबद्ध तीनों अधिकारियों को तीन सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने के लिए समन जारी किये. लालू प्रसाद ने अपने वकील के माध्यम से पूछा था कि अगर इतना बड़ा घोटाला बिहार में हुआ तो उस दौरान 1991 से 1995 के बीच बिहार के महालेखाकार कार्यालय के अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गयी? यह याचिका बुधवार को ही दायर की गयी थी.

चारा घोटाला: दुमका कोषागार मामले में लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्रा पर फैसला टला

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इससे पहले इसी वर्ष 24 जनवरी को लालू प्रसाद एवं जगन्नाथ मिश्र को सीबीआई की विशेष अदालत ने चाईबासा कोषागार से 35 करोड़, 62 लाख रुपये का गबन करने के चारा घोटाले के एक अन्य मामले में दोषी करार देते हुए पांच-पांच वर्ष सश्रम कारावास एवं क्रमशः दस लाख एवं पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी थी. सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाले के चाईबासा मामले में कुल 50 आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनायी थी.

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