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पीएम पद- विपक्ष में एक अनार, दो बीमार

तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ मंत्री ने बंगाली प्रधानमंत्री की बात कर ममता बनर्जी को पीएम पद का दावेदार बता दिया है

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पीएम पद- विपक्ष में एक अनार, दो बीमार
विपक्षी पार्टियों के नेताओं में प्रधानमंत्री पद के लिए होड़ और दौड़ शुरू हो गई है. कम से कम बयानबाजी के दौर से तो ऐसा ही लगता है. कहते हैं एक अनार सौ बीमार, लेकिन प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर फिलहाल तो एक अनार दो बीमार की बात ही लगती है. अभी तक इस पद के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने खुलकर दावेदारी पेश की थी. लेकिन अब तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ मंत्री ने बंगाली प्रधानमंत्री की बात कर ममता बनर्जी को दावेदार बता दिया है. 

दरअसल पुरुलिया में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने रैली की थी. यह रैली पुरुलिया में बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या के बाद की गई. इसके तीन दिन बाद ही, यानी रविवार को तृणमूल कांग्रेस ने भी पुरुलिया में ही रैली की. यह रैली उसी जगह हुई जहां अमित शाह की रैली हुई थी. शाह ने अपनी रैली में बंगाल की 42 में से 22 सीटें जीतने की बात की. तो रविवार की तृणमूल कांग्रेस की रैली में 42 की 42 सीटें जीतने का दावा किया गया. लेकिन इससे भी एक कदम आगे जाकर पहली बार तृणमूल कांग्रेस की ओर से बंगाली प्रधानमंत्री बनाने की बात कही गई. इससे पहले ममता बनर्जी के समर्थकों के एक छोटे गुट फ्रेंड्स ऑफ तृणमूल ने बंगाली प्रधानमंत्री की बात की थी. लेकिन तृणमूल की ओर से पहली बार किसी वरिष्ठ नेता और मंत्री ने यह बात कही.

सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस 42 में से 42 सीटें जीतेगी और बंगाली व्यक्ति प्रधानमंत्री बनेगा. हालांकि सुवेंदु अपनी नेता ममता बनर्जी का नाम नहीं ले रहे लेकिन ज़ाहिर है तृणमूल कांग्रेस के नेता ममता के अलावा किसी दूसरे बंगाली को प्रधानमंत्री बनाने की बात तो नहीं करेंगे. तृणमूल के ये इरादे 2019 के लिए न सिर्फ विपक्ष के महागठबंधन के इरादों पर सवाल खड़े करते हैं बल्कि बीजेपी की उस मुहिम को भी हवा देते हैं कि मोदी के सामने कौन? यह सवाल इसलिए भी क्योंकि पश्चिम बंगाल की कांग्रेस इकाई पूरी तरह से तृणमूल कांग्रेस के साथ तालमेल के खिलाफ है. बताया जाता है कि राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी तो इतने खिलाफ हैं कि वे इसे राज्य में आत्महत्या करने के समान मानते हैं. पर राज्य कांग्रेस तृणमूल से तालमेल को लेकर बंटी हुई है. 

जिस दिन अमित शाह की पुरुलिया में रैली हो रही थी उसी दिन मालदा दक्षिण से कांग्रेस के सांसद अबु हसम खान चौधरी तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्था चटर्जी से उनके घर पर मिले. उन्होंने कहा कि वे केंद्र में बीजेपी से मुकाबला करने के लिए बने महागठबंधन की तर्ज पर राज्य में भी बीजेपी को हराने के लिए तृणमूल से महागठबंधन पर बात करने आए थे. लेकिन सवाल यही खड़ा होता है कि आखिर इस महागठबंधन का नेता कौन होगा. क्योंकि ममता बनर्जी तो फेडरल फ्रंट के नाम पर अलग मुहिम में जुटी हैं. रही बात राहुल गांधी की तो कर्नाटक चुनाव में वे खुद ही कह चुके हैं कि अगर सीटें आईं तो 2019 में वे प्रधानमंत्री बन सकते हैं.

वैसे मोदी विरोधी कहते हैं कि नेतृत्व और प्रधानमंत्री का सवाल फिलहाल बेमानी है. उनका पहला लक्ष्य मोदी को हटाना है. वे कहते हैं कि इससे पहले भी जब भी केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ गठबंधन बना, प्रधानमंत्री का चयन चुनाव के बाद किया गया. लेकिन बीजेपी समर्थकों की दलील है कि अब देश में राजनीति राष्ट्रपतीय प्रणाली की तरह होती जा रही है जहां लोकसभा चुनाव में पीएम और विधानसभा चुनाव में सीएम का चेहरा देखकर लोग वोट देते हैं. ऐसे में मोदी बनाम कौन का सवाल 2019 के लोकसभा चुनाव में केंद्र बिंदु बन सकता है. बंगाली प्रधानमंत्री की बात कहकर तृणमूल कांग्रेस ने शायद विपक्ष के सामने इसी सवाल को ज़्यादा बड़ा कर दिया है. 

वैसे हमारा मकसद फिलहाल विपक्ष के प्रधानमंत्री के दावेदारों की फेहरिस्त को लंबा करना नहीं है क्योंकि दावेदारों की कोई कमी नहीं है. यह भी सच है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जाएंगे, यह फेहरिस्त अपने-आप ही लंबी होती जाएगी. वो चाहे यूपी में मायावती हों, या महाराष्ट्र में शरद पवार या फिर कर्नाटक में एचडी देवेगौड़ा या आंद्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू. अगर खिचड़ी सरकार बनने की बात हो तो दावेदारों की लंबी सूची है. लेकिन फिलहाल तो तृणमूल कांग्रेस की ओर से बंगाली प्रधानमंत्री की बात से मामला दिलचस्प हो गया है.

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(अखिलेश शर्मा एनडीटीवी इंडिया के राजनीतिक संपादक हैं)

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इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति एनडीटीवी उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार एनडीटीवी के नहीं हैं, तथा एनडीटीवी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.



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