उत्तर प्रदेश में मायावती और प्रियंका गांधी वाड्रा की लड़ाई ही छाई है...

मायावती, बहुजन समाज पार्टी की मुखिया, जो अपने गुस्से और गरजने-बरसने के लिए कुख्यात हैं, बड़े शहरों से गांवों में लौटकर आए प्रवासियों की आवाजाही और उनकी परेशानियों पर बहुत असामान्य तरीके से चुप्पी साधे रही हैं.

उत्तर प्रदेश में मायावती और प्रियंका गांधी वाड्रा की लड़ाई ही छाई है...

मायावती, बहुजन समाज पार्टी की मुखिया, जो अपने गुस्से और गरजने-बरसने के लिए कुख्यात हैं, बड़े शहरों से गांवों में लौटकर आए प्रवासियों की आवाजाही और उनकी परेशानियों पर बहुत असामान्य तरीके से चुप्पी साधे रही हैं.

इसके बजाय उत्तर प्रदेश की 64-वर्षीय पूर्व मुख्यमंत्री ने सोमवार को चीन के साथ लद्दाख में हुई झड़प पर बात की. उन्होंने केंद्र सरकार के लिए समर्थन का साफ ऐलान किया - और कांग्रेस पर जमकर बरसते हुए उस पर विकास और समाज के कमज़ोर तबके के उत्थान के लिए नाममात्र का काम करने आरोप लगाया, जिसकी वजह से उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के कामगारों के पास नौकरियों की तलाश में बड़े शहरों में जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा.

हालांकि उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी BJP की सहयोगी नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री की पार्टी और कांग्रेस के बीच जारी राजनीति से राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंच सकता है, जिसका फायदा चीन उठा सकता है.

उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा कुछ दिन पहले लगाए गए आरोप - 'उत्तर प्रदेश में विपक्ष के कुछ नेता BJP के प्रवक्ता की तरह काम कर रहे हैं' - का भी जवाब दिया. प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस के प्रथम परिवार से हैं, जिन्हें देश के सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य में पार्टी की ताकत बढ़ाने का काम सौंपा गया है.

मायावती का जवाब तीखा रहा. उन्होंने कहा कि वह केंद्र का समर्थन करती हैं (जबकि कई अन्य विपक्षी नेताओं ने इसके विपरीत सेना के प्रति समर्थन जताया था). उन्होंने 'कांग्रेस की नाकामियों' पर भी सीधा हमला बोला. यह सब कर वह राज्य में अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी योगी आदित्यनाथ के पाले में ही नज़र आ रही हैं.

BJP को खुश और अन्य नेताओं को स्तब्ध कर देने वाले मायावती के समर्थन के बाद प्रियंका गांधी वाड्रा ने बहनजी के नाम से लोकप्रिय मायावती पर वार किया. कोरोनावायरस के कहर के बीच राजनैतिक जंग के मैदान के रूप में पसंद की जा रही माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि मायावती उसी पीक पर हैं, जिस पर BJP है, और 'इस समय किसी राजनैतिक दल के साथ खड़े होने का कोई मतलब नही है... हर देशवासी को देश और उसकी संप्रभुता के साथ खड़े होना चाहिए...'

इस पर गुस्साई मायावती ने अपनी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधींद्र भदौरिया को मंगलवार को प्रियंका गांधी वाड्रा को लताड़ने का काम सौंपा, जिन्होंने मायावती पर हमला करने के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा को 'अपरिपक्व' और 'बचकाना' बताया.

उत्तर प्रदेश में चुनाव होने में अब भी दो साल बाकी हैं, लेकिन प्रियंका गांधी वाड्रा और मायावती के बीच प्रतिद्वंद्विता बढ़ती ही जा रही है. इन दो महिला नेताओं की लड़ाई से BJP को फायदा हो रहा है. खासतौर से इसलिए, क्योंकि उत्तर प्रदेश के चतुष्कोणीय मुकाबले में एक अन्य कोण पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी के मुखिया) भी प्रवासियों की तकलीफों को लेकर खामोश हैं. अखिलेश भी अपने ही परिवार में बन गई खाइयों को पाटने में लगे हैं, और अपने चाचा शिवपाल यादव के साथ सुलह की कोशिशों में जुटे हैं.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपनी सारी ताकत कांग्रेस और प्रियंका गांधी वाड्रा पर हमला करने में झोंक दी है. सूबे की नौकरशाही के बीच 'महाराज' कहलाने वाले योगी आदित्यनाथ इन दोनों नेताओं - मायावती और अखिलेश यादव - के बारे में एक शब्द भी नहीं बोलते.

हालिया हफ्तों में योगी आदित्यनाथ और प्रियंका गांधी वाड्रा के बीच की तल्खी बेहद साफ दिखी है. जब प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रवासियों को उत्तर प्रदेश लौटा लाने के लिए बसों का इमतज़ाम किया, योगी और उनकी टीम ने उन्हें इस्तेमाल नहीं करने के हालात पेश कर दिए. उसके बाद, राज्य में कांग्रेस के अध्यक्ष अजय सिंह लल्लू को कई हफ्ते के लिए गिरफ्तार कर लिया गया.

उस वक्त भी, मायावती ने अपना रुख कांग्रेस को नीचा दिखाने की दिशा में ही बरकरार रखा.

मायावती ने वर्ष 1995 में BJP के सहयोग से सरकार बनाई थी, और ब्राह्मण और दलित वोटों को साथ-साथ जोड़ लिया था. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को पुनर्जीवित करने के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा की नज़र भी इसी समीकरण पर है. प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोच-समझकर खुद को प्रदेश तक ही सीमित कर लिया है, ताकि अपने भाई और पार्टी के 'राष्ट्रीय नेता' राहुल गांधी के रास्ते में आती दिखने का खतरा नहीं रहे.

अपने वोट बैंक को लेकर मायावती बेहद क्षेत्रीय रही हैं और इसी साल जनवरी से उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा को निशाना बनाना शुरू किया है. जनवरी में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में हुए हादसे पर प्रियंका गांधी वाड्रा 'मगरमच्छ के आंसू' बहाती हैं, जबकि कांग्रेस द्वारा शासित राजस्थान के कोटा अस्पताल में 100 नवजातों की मौत पर वह आंखें फेर लेती हैं. फरवरी में मायावती ने पूरी ताकत से प्रियंका गांधी वाड्रा पर हमला बोला और संत-कवि रविदास के वाराणसी स्थित मंदिर में जाने को 'ड्रामा' करार दिया.

एक और तीखे वार के तहत मायावती ने उस सर्वदलीय बैठक में शिरकत से भी इकार कर दिया था, जो COVID-19 संकट पर चर्चा के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा की मां तथा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बुलाई थी. BSP के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि मायावती व्यक्तिगत तौर पर प्रियंका गांधी वाड्रा को पसंद नहीं करतीं, क्योंकि वह उन्हें 'तेज़तर्रार' पाती हैं, जबकि उनकी मां सोनिया गांधी के पास सबको साथ लेकर चलने वाले नेतृत्व का गुण है.

मायावती को इस वक्त BJP का साथ ही रास आएगा, ताकि गठबंधन के लिए दरवाज़े खुले रहें. केंद्रीय जांच एजेंसियों के बार-बार मिलने वाले 'इशारे' भी अधिकतर नेताओं को काबू में रखने में मदद करते हैं. मायावती का नाम भी भ्रष्टाचार के बड़े मामले में शामिल है.

प्रियंका गांधी वाड्रा को लगता है कि वह सभी बड़े क्षेत्रीय खिलाड़ियों के खिलाफ आक्रामक तेवर अपनाकर राज्य में कांग्रेस का पुनरुद्धार कर सकती हैं, जो यहां ज़मीनी तौर पर पूरी तरह गायब हो चुकी है. पिछले सप्ताह उन्होंने घोषणा की कि वह इंदिरा गांधी की पोती हैं, किसी अत्याचार से नहीं डरतीं, और उन्हें योगी सरकार के कथित ज़ुल्मों पर चुप्पी साधने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा.

आज की राजनैतिक लड़ाई में दादी का ज़िक्र करना सही है या नहीं, इस पर तो चर्चा होती ही रहेगी, लेकिन उत्तर प्रदेश जैसे पितृसत्तात्मक समाज में दो महिला नेताओं को इस तरह आमने-सामने लड़ना बेहद अहम है.

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स्वाति चतुर्वेदी लेखिका तथा पत्रकार हैं, जो 'इंडियन एक्सप्रेस', 'द स्टेट्समैन' तथा 'द हिन्दुस्तान टाइम्स' के साथ काम कर चुकी हैं...

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