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सरकारी नौकरियों में ज्वाइनिंग में देरी क्यों?

ज्वाइनिंग के इंतज़ार में जब डेढ़ साल बीत गए तब सुमित डिप्रेशन का शिकार होने लगा और अंत में 19 सितंबर को अपने ही कमरे में फांसी पर लटक गया. मर गया. 

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सरकारी नौकरियों में ज्वाइनिंग में देरी क्यों?

मुझे पता है कि आज भी नेताओं ने बड़े-बड़े बयान दिए हैं. बहस के गरमा गरम मुद्दे दिए हैं. लेकिन मैं आज आपको सुमित के बारे में बताना चाहता हूं. इसलिए बता रहा हूं ताकि आप यह समझ सकें कि इस मुद्दे को क्यों देश की प्राथमिकता सूची में पहले नंबर पर लाना ज़रूरी है. सुमित उस भारत के नौजवानों का प्रतिनिधित्व करता है जिसकी संख्या करोड़ों में है. जिन्हें सियासत और सिस्टम सिर्फ उल्लू बनाती है. जिनके लिए पॉलिटिक्स में आए दिन भावुक मुद्दों को गढ़ा जाता है, ताकि ऐसे नौजवानों को बहकाया जा सके. क्योंकि सबको पता है कि जिस दिन सुमित जैसे नौजवानों को इन भावुक मुद्दों का खेल समझ आ गया उस दिन सियासी नेताओं का खेल खत्म हो जाएगा. मगर चिंता मत कीजिए. इस लड़ाई में हमेशा सियासी नेता ही जीतेंगे. उन्हें आप बदल सकते हैं, हरा नहीं सकते हैं. इसलिए सुमित जैसे नौजवानों को हार जाना पड़ता है.

सुमित की इस तस्वीर में ज़िंदगी के सपनों के लिए कितनी जगह है. उसकी बाहों में सारा संसार समा जाए. 35-40 लाख परीक्षार्थियों के बीच जो चोटी के 500 में आते हैं उनका ही चयन इनकम टैक्स इंस्पेक्टर के लिए होता है. सुमित उनमे से एक था. गिरिडीह के सरस्वती विद्या मंदिर से पढ़ा यह छात्र 2014 में दिल्ली आया था. कोचिंग की और इनकम टैक्स इंस्पेक्टर के लिए चुना गया था. इनकम टैक्स इंस्पेक्टर के लिए चुना भी गया मगर ज्वाइनिंग नहीं हुई. ज्वाइनिंग के इंतज़ार में जब डेढ़ साल बीत गए तब सुमित डिप्रेशन का शिकार होने लगा और अंत में 19 सितंबर को अपने ही कमरे में फांसी पर लटक गया. मर गया. 


गिरिडीह से अमरनाथ सिन्हा ने ये रिपोर्ट भेजी है. मुझे बहुत से नौजवानों के हर दिन मैसेज आते हैं. अलग-अलग राज्यों से. अलग अलग परीक्षाओं के. इतने मैसेज आते हैं कि मुझे चैनल पर और बकायदा पोस्ट लिखना पड़ा कि मेरे पास कोई सचिवालय नहीं है. न ही इतने रिपोर्टर. मैं नहीं कर सकता हूं. लेकिन उस ना के बाद भी नौजवान नहीं रूकते हैं, क्योंकि उनकी सुनने वाला कोई नहीं है. कोई भी सरकारी परीक्षा दो साल से कम में पूरी नहीं होती है. हो जाती है तो ज्वाइनिंग होने में साल लग जाते हैं. आपने देखा होगा कि पिछले साल सितंबर से हम प्राइम टाइम में यूनिवर्सिटी सीरीज़ और नौकरी सीरीज़ के तहत लगातार दिखाते जा रहे हैं  कि हमारा सिस्टम कैसे हमारे नौजवानों को धोखा दे रहा है.

एक के बाद तीस से ज्यादा सीरीज़ करने के बाद हमने नौकरी सीरीज़ की गिनती छोड़ दी. मगर इस सीरीज़ के दौरान एक बात समझ आ गई कि देश के कई राज्यों में सरकारी नौकरी के नाम पर युवाओं को उल्लू बनाने की एक फैक्ट्री है जिसका नाम है राज्य लोक सेवा चयन आयोग और लोक सेवा कर्मचारी चयन आयोग. इन आयोगों के ज़रिए जिस तरह से युवाओं को नौकरियों के फॉर्म निकाल कर ठगा जाता है, वो भयावह है. फॉर्म के भी काफी पैसे लिए जाते हैं. बिना नकल के शायद ही कोई परीक्षा होती है. कई परीक्षाओं को लेकर कोर्ट में केस हो जाता है जहां धीमी गति से महीनों सुनवाई चलती रहती है और नौजवान नौकरी की आस में बर्बाद होते रहते हैं. घोटालेबाज़ और भ्रष्ट नेताओं के लिए अलग कोर्ट बनाने की बात हो जाती है मगर इन परीक्षाओं में फंसे लाखों नौजवानों को मुक्ति देने के लिए अलग से कहीं कोर्ट नहीं है. साल साल मुकदमे चलते हैं.

नौकरी सीरीज़ के दौरान हम कुछ ही राज्यों की कुछ परीक्षाओं का दिखा सके, लेकिन नौजवानों के साथ ठगी और धोखाधड़ी का यह प्रोजेक्ट इस लेवल पर चल रहा है कि हम सबका दिखा ही नहीं सकते हैं. नेताओं को हिन्दू-मुस्लिम टॉपिक का शुक्रिया अदा करना चाहिए कि जिसमें हमारा नौजवान बहक गया. वर्ना जिस दिन वो यह खेल समझ जाएगा नेताओं को जवाब देना मुश्किल हो जाए. महीनों सीरीज़ दिखाने के बाद भी इन चयन आयोगों की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं है. कई जगहों पर सीरीज़ के दबाव में नौकरियां देनी पड़ी हैं और नौजवान जानता है कि अगर प्राइम टाइम में महीनों कवरेज नहीं होता तो किसी की ज्वाइनिंग नहीं होती. 

स्टाफ सेलेक्शन कमिशन तो केंद सरकार के तहत है. कम से कम इस आयोग को तो यूपीएससी की तरह काम करना चाहिए था जिसकी विश्वसनीयता होती. तारीख से लेकर नतीजे तक और नतीजे के बाद ज्वाइनिंग तक. सुमित ने 2016 की एसएससी कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल की परीक्षा दी थी. इस परीक्षा का केलैंडर देखिए. मार्च 2016 में एसएससी सीजीएल का फॉर्म निकला था. पहली परीक्षा अगस्त 2016 में हुई. मेन्स की परीक्षा हुई 30 नवंबर/1 दिसंबर 2016 को. टायर-3 की परीक्षा हुई 19 मार्च 2017 को. टायर-4 की परीक्षा हुई अप्रैल-मई 2017 में. अंतिम रिज़ल्ट निकला 5 अगस्त 2017 को.

मार्च 2016 से अगस्त 2017 आ गया. डेढ़ साल बीत गए. रिज़ल्ट निकले के बाद ज्वाइनिंग होने के लिए अभी भी बहुत से नौजवान इंतज़ार कर रहे हैं. अगस्त 2017 से 20 सितंबर 2018 आ गया. 13 महीने इसमें बीत गए. दो साल से अधिक समय इसमें गुज़रा. आप कल्पना नहीं कर सकते हैं कि इन नौजवानों को कितनी हताशा निराशा होती है. मतलब इन आयोगों के काम नहीं करने की भी हद होती है. इन आयोगों में भी काम करने के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं. वो अलग समस्या है. गिरिडीह का सुमित अकेला नहीं है. उसके बहुत से साथी अब भी ज्वाइनिंग का इंतज़ार कर रहे हैं.

2016 की स्टाफ सलेक्शन परीक्षा में पास हुए एक्साइज़ इंस्पेक्टर ज्वाइनिंग का इंतज़ार कर रहे हैं. 13 महीने से. दुनिया का एक देश बता दीजिए जहां नौकरी में चुने जाने के बाद ज्वाइनिंग के लिए 13 महीने इंतज़ार करने पड़ते हैं. 850 नौजवान एक्साइज़ इंस्पेक्टर के लिए चुने गए थे. कुछ ज़ोन में ज्वाइनिंग हो गई है मगर अभी कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, गोवा और भोपाल ज़ोन में अभी तक ज्वाइनिंग नहीं हुई है. प्रक्रिया चल रही है. मुंबई ज़ोन में तो तीन-तीन विभागों की ज्वाइनिंग नहीं हुई है. अगस्त के महीने में फिजिकल और मेडिकल की परीक्षा देकर ज्वाइनिंग का इंतज़ार कर रहे हैं. 23 साल की उम्र मे फॉर्म भरा था. अब 26 का हो गया हूं. एक नौजवान ने कहा. ये है भारत में सरकारी परीक्षाओं का हाल. इनकम टैक्स सहायक के लिए पास करने वाले नौजवानों की भी ज्वाइनिंग नहीं हुई है. कुछ की हुई है कुछ की बाकी है. होता यह है कि एक ही परीक्षा पास करने के बाद कुछ लोग कई महीनों से सैलरी ले रहे हैं, कुछ लोग परीक्षा पास कर बिना सैलरी के बेरोज़गार बैठे हैं. कायदे से सरकार को रिज़ल्ट निकलने के दिन से सैलरी देनी चाहिए.

SSC CHSL 2016 में पोस्टल विभाग में 6500 पद थे. महाराष्ट्र सर्किल में सभी पदों पर ज्वाइनिंग नहीं हुई है. 5 सितंबर को सर्किल का आवंटन हो गया था, मगर अभी तक ज्वाइनिंग हुई थी. SSC Multi-Tasking Staff 2016 के ज़रिए 941 उम्मीदवार income tax विभाग के लिए चुने गए. 28 अप्रैल 2018 को रिज़ल्ट आया. 20 सितंबर 2018 आ गया. बहुतों की अभी तक ज्वाइनिंग नहीं हुई. परीक्षा पास करने के बाद ये अपने-अपने विभागों के चक्कर लगाते रहते हैं. फोन करते हैं. यही जवाब मिलता है कि एक महीना लगेगा. दो महीना लगेगा. जैसे दो से आठ महीना गुज़र जाना कोई बात ही नहीं है. 

इस बैनर पर लिखा है कि ढाई करोड़ की जान. 1400 फायर वालों के भरोसे. क्या दिल्ली जलने पर बोर्ड जागेगा. यह बैनर ज्वाइनिंग के इंतज़ार में संघर्ष करने वाले नौजवानों का है. दिल्ली राज्य अधीनस्थ चयन बोर्ड का. इस बैनर पर लिखा है भारत का सबसे कामचोर बोर्ड. इन छात्रों का कहना है कि बिना धरना के न तो आगे की परीक्षा हुई, न रिज़ल्ट निकला. अभी तक इस परीक्षा  के सिलसिले में ये 7 से 8 धरना दे चुके हैं. कोर्ट मुकदमा भी लड़ चुके हैं. यह कहानी दिल दहला देने वाली है. 24 साल की उम्र में जिसने यह परीक्षा दी थी वो अब 28-29 साल का होने जा रहा है, जबकि यह परीक्षा 25 साल की उम्र में पास कर ज्वाइनिंग कर सकता था.

अब हम आपको एक चार्ट के जरिए समझाते हैं कि कैसे ये सरकारी चयन बोर्ड नौजवानों के साथ धोखा कर रहे हैं. दिल्ली अधीनस्थ सेवा बोर्ड ने 803 पदों की वेकैंसी निकाली थी, जिसे बढ़ाकर 841 कर दिया मगर रिज़ल्ट निकला तो सिर्फ 554 का ही निकला. करीब 300 पद ग़ायब हो गए. जनवरी 2014 में फायर आपरेटर के लिए फॉर्म निकला. 31 अगस्त 2014 को परीक्षा हुई. अगस्त 2014 से जून 2016 यू हीं बीत गया. कुछ नहीं हुआ. उसके बाद 17 जून से 29 जून के बीच छत्रसाल स्टेडियम में फिज़िकल टेस्ट हुआ. 1 सितंबर 2017 से 22 सितंबर 2017 तक ड्राइविंग की परीक्षा हुई. 16 नवंबर 2017 को रिज़ल्ट आया.

एक मामला कोर्ट में जाने का भी है. कोई कोर्ट चला गया और रिज़ल्ट के बाद की गतिविधि रूक गई. इसी सितंबर में आदेश आया है कि जो रिजल्ट निकला है सही है. अब जाकर दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड ने 350 नौजवानों के डोज़ियर दिल्ली फायर सर्विस को भेजे हैं. बाकी 197 छात्रों के अभी तक नहीं भेजे हैं, जिन्होंने हाल ही में धरना दिया था. 2014 से 2018 आ गया. परीक्षा देने से लेकर रिज़ल्ट निकलने तक. ज्वाइनिंग नहीं हुई. इसलिए आपको लग सकता है कि यह स्टोरी बोरिंग है मगर इनकी ज़िंदगी में झांक कर देखिए इनका दम कैसे घुट रहा है. 14 सितंबर के प्राइम टाइम में हमने इसी स्टाफ सलेक्शन कमीशन की एक परीक्षा में पास हुए नौजवानों की व्यथा दिखाई थी. फरवरी 2018 में रिज़ल्ट आ गया है मगर सात महीने हो गए ज्वाइनिंग नहीं हुई. 500 से अधिक नौजवान मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज में ज्वाइनिंग का इंतज़ार कर रहे हैं. वैसे कई प्रेस कांफ्रेंस में मंत्री कहते सुनाई देते हैं कि देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं हो सकता है. उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि ये खाली पद भी देश की सुरक्षा से समझौता ही हैं.

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14 सितंबर के प्राइम टाइम में चलने के बाद भी 20 सितंबर तक इनके मामले में कुछ नहीं हुआ है. इसी तरह तड़पा-तड़पा कर नौजवानों को इंतज़ार कराया जा रहा है. देश की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने ट्वीट भी किया था कि इस मामले को देखेंगे. 6 दिन गुज़र गए. इस मामले में अभी तक कुछ नहीं हुआ है. इनकी ज्वाइनिंग कब होगी. राज्यों के भर्ती आयोगों में एक से एक घोटाले होते रहते हैं. मगर मध्य प्रदेश का व्यापम घोटाला सबसे क्रूर था. 2013 में यह मामला सामने आया और उसी साल पहली गिरफ्तारी हुई थी. दो साल बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सीबीआई के पास पहुंचा. लेकिन 5 साल बीत जाने के बाद भी यह मुकदमा अंजाम पर नहीं पहुंचा है. व्यापम घोटाला मेडिकल परीक्षा में पैसे लेकर छात्रों को पास कराने का था. चार्जशीट में कई अधिकारियों के नाम हैं. मुख्यमंत्री के भी नाम हैं. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 27 हज़ार पन्नों का रिकार्ड पेश किया है. 22 सितंबर को अभिषेक मनु सिंघवी, पी चिदंबरम और कपिल सिब्बल इस मामले में पैरवी के लिए भोपाल जाने वाले हैं.

दिग्विजय सिंह, प्रशांत पांडे की याचिका एक बार सुप्रीम कोर्ट से निरस्त हो चुकी है. व्यापम का जो हाल है वही कई परीक्षाओं और आयोगों का है. केस ही चलता रह जाता है. आज का एपिसोड गिरिडीह के सुमित को समर्पित है. काश वो थोड़ा और इंतज़ार कर लेता. सुमित जैसे लाखों नौजवान इस खबर से दुखी हैं. वो ट्विटर पर प्रधानमंत्री से लेकर भांति-भांति के मंत्री तक को ट्वीट कर रहे हैं. होना जाना कुछ नहीं है. एक परीक्षा में कुछ हो जाता है, 10 परीक्षाएं अटक जाती हैं. हर सरकार के श्रम मंत्री को हर महीने एक रिपोर्ट देनी चाहिए. कितनी वेकैंसी निकली, कितनी परीक्षा का रिज़ल्ट निकलने वाला है. ज्वाइनिंग कब होगी. इसका स्टेटस रिपोर्ट हर महीने आना चाहिए ताकि नौजवानों के साथ धोखाधड़ी बंद हो. ताकि फिर किसी सुमित को खुदकुशी न करनी पड़ी. यूपी के शिक्षामित्रों पर प्राइम टाइम किया था. शिक्षा मित्रों ने बताया था कि कई सौ खुदकुशी, तनाव, अवसाद और ह्रदयाघात से मर गए मगर कुछ नहीं हुआ.



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