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स्मार्ट फोन में आधार-गूगल की गफलत या प्राइवेसी पर हमला

भारत में 35 करोड़ स्मार्ट फोन हैं, जिनमें 90 फीसदी मोबाइल में गूगल का एंड्रायड ऑपरेटिंग सिस्टम इस्तेमाल किया जाता है.

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स्मार्ट फोन में आधार-गूगल की गफलत या प्राइवेसी पर हमला
स्मार्ट फोन मोबाइलों में आधार का टोल-फ्री नम्बर ऑटोमेटिक सेव होने से सोशल मीडिया में हड़कंप मच गया है. आधार की नियामक संस्था यूआईडीएआई और गूगल की सफाई के बावजूद विवाद में नये मोड़ क्यों आ रहे हैं? मोबाइल में आधार का टोल फ्री नम्बर कैसे आया- गूगल के सर्च इंजन में लता मंगेशकर और प्रधानमंत्री मोदी के बारे में पहले भी गफलत हो चुकी है और अब एंड्रायड डेटा बेस पर यह विवाद सामने आया है. भारत में 35 करोड़ स्मार्ट फोन हैं, जिनमें 90 फीसदी मोबाइल में गूगल का एंड्रायड ऑपरेटिंग सिस्टम इस्तेमाल किया जाता है. गूगल द्वारा दी गई सफाई के अनुसार सन् 2014 में उनकी कम्पनी ने एंड्रायड सिस्टम में आधार का टोल फ्री नम्बर 1800-300-1947 को सेव किया था. गूगल की सफाई को यदि स्वीकारा जाये तो आधार का नम्बर पिछले चार सालों से लोगों के मोबाइल में है, और यह यकायक प्रकट नहीं हुआ है.

एप्पल ने अभी तक नहीं दी सफाई 
गूगल के एंड्रायड की तरह कई लोग एप्पल के स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करते हैं जिसमें आईओएस ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग होता है. विशेषज्ञों के अनुसार अनस्ट्रक्चर्ड सप्लीमेंट्री सर्विस डेटा (यूएसएसडी) के माध्यम से भारतीय टेलीकॉम कम्पनियां आधार नम्बर को मोबाइल में सेव कर सकती हैं, लेकिन एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया, रिलाइंस जियो जैसी कम्पनियों और मोबाइल उत्पादकों ने इस बात से इन्कार किया है. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार एप्पल के फोन में भी आधार का टोल-फ्री नम्बर ऑटोमैटिक सेव दिख रहा है. यदि यह सच है तो फिर विश्व की दोनों बड़ी कम्पनियों गूगल और एप्पल से ऐसी गफलत कैसे हुई? सवाल यह भी है कि गूगल की तरह एप्पल ने इस मामले में अभी तक सफाई क्यों नहीं दी?  

क्या है इलियट एल्डरसन का सच
फ्रांस के साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट होने का दावा करने वाले इलियट एल्डरसन आधार के बड़े आलोचक माने जाते हैं. पिछले सप्ताह ट्राई के चेयरमैन द्वारा आधार नम्बर का खुलासा करने पर आरएस शर्मा को व्यक्तिगत विवरण को उजागर करने में एल्डरसन की बड़ी भूमिका थी. ट्राई के चेयरमैन बनने के पहले 2009 से 2013 के दौरान शर्माजी यूआईडीएआई के डीजी थे और उसी दौर में गूगल ने यह नम्बर एंड्रायड में सेव किया होगा. एल्डरसन ने ट्वीट करके कहा कि कई लोग जिनके अलग-अलग सेवा प्रदाता हैं, चाहे उनके पास आधार कार्ड हो या ना हो, उन्होंने आधार-ऐप  इंस्टाल किया हो या नहीं, उसके बावजूद उनकी कांटेक्ट लिस्ट में आधार का हैल्प लाइन आना सुरक्षा में गम्भीर सेंध है. यूआईडीएआई द्वारा जारी स्पष्टीकरण के अनुसार निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा आधार को बदनाम करने की साजिश के तहत ऐसी खबरों को बढ़ावा दिया जाता है. सवाल यह है कि सरकार एल्डरसन समेत उन तत्वों का खुलासा क्यों नहीं करती, जो विश्व के सबसे बड़े डाटा बेस आधार को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं? 

आधार टोल फ्री नम्बर से प्राइवेसी को कैसे है खतरा  
मीडिया में सरगर्मी के बाद लोगों को अपने मोबाइल के डाटा बेस और कांटेक्ट लिस्ट की सुरक्षा पर संदेह होने लगा और कई लोगों ने इसे प्राइवेसी पर गम्भीर हमला बताया. सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की बेंच ने प्राइवेसी को संविधान के तहत मौलिक अधिकार माना है और इस पर कानून बनाने के लिए जस्टिस श्रीकृष्णा कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह जाहिर है कि लोगों की प्राइवेसी को सरकार के अलावा निजी कम्पनियों से भी बड़ा खतरा है. स्मार्ट फोन को इस्तेमाल करने वाले लोगों की प्राइवेसी गूगल और एप्पल जैसी कम्पनियों के रहमोकरम पर निर्भर है. इन कम्पनियों से प्राइवेसी को सुरक्षित करने के लिए यूरोप की तर्ज पर भारत में भी सख्त डेटा प्रोटेक्शन कानून की आवश्यकता है, जिसके लिए श्रीकृष्णा कमेटी ने अपनी विस्तृत सिफारिश की है. 

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कैसे होगा आधार टोल फ्री नम्बर डिलीट 
देश में लगभग 121 करोड़ से ज्यादा लोगों के आधार नम्बर बन गये हैं. आधार की अनिवार्यता के मसले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना बाकी है, इसके बावजूद 86 करोड़ मोबाइल आधार से जुड़ गये हैं. गूगल के अनुसार एंड्रायड के नये संस्करण में आधार का टोल फ्री नम्बर नहीं सेव किया जायेगा. लेकिन जिन लोगों के मोबाइल में टोल फ्री नम्बर पहले से सेव है, उसे व्यक्तिगत स्तर पर ही यूजर्स को डिलीट करना होगा. 

आधार का टोल फ्री नम्बर और दूसरे इमरजेंसी नम्बर का सच 
यूआईडीएआई द्वारा दिये गये स्पष्टीकरण के अनुसार पिछले दो सालों से 1947 नम्बर ही आधिकारिक उनका टोल-फ्री नम्बर है. सवाल यह है कि यूआईडीएआई द्वारा जारी पुराने आधार कार्डों में 11 अंकों का टोल-फ्री नम्बर 1800-300-1947 दिया गया है, फिर उसे बेवजह क्यों बदला गया? गूगल के स्पष्टीकरण को यदि माना जाये तो उन्होंने दूसरे इमरजेंसी नम्बर 112 को भी एंड्रायड सिस्टम में सेव किया है. इस नम्बर से पुलिस, फायर बिग्रेड, एम्बुलेंस और आपदा प्रबन्धन के नम्बर जुड़े हुए हैं. सवाल यह है कि गूगल के एंड्रायड को 112 नम्बर ऑटो सेव करने के लिए भारत सरकार की तरफ से किस एजेंसी ने अधिकृत किया था. समाचारों के अनुसार भारत सरकार ने इस मामले की जांच के लिए कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT) को आदेश दिया है. इन पहलुओं के सभी बिन्दुओं पर विस्तृत जांच और पारदर्शी रिपोर्ट से ही जनता का आधार पर भरोसा कायम रखा जा सकता है, जो देशहित में भी जरूरी है.
 


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