Sanju की मां का रोल निभा रहीं मनीषा कोइराला ने खोले राज, 'रणबीर से छोटा किरदार लेकिन...'

अभिनेता संजय दत्त की बायोपिक 'संजू' में उनकी मां और दिग्गज अभिनेत्री नरगिस दत्त का किरदार निभा रहीं अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने राज खोले.

Sanju की मां का रोल निभा रहीं मनीषा कोइराला ने खोले राज, 'रणबीर से छोटा किरदार लेकिन...'

नरगिस के रोल में एक्ट्रेस मनीषा कोइराला

खास बातें

  • मनीषा कोइराला ने खोले राज
  • फिल्म में रोल क्यों है छोटा?
  • रिलीज होने से पहले बताया
नई दिल्ली:

अभिनेता संजय दत्त की बायोपिक 'संजू' में उनकी मां और दिग्गज अभिनेत्री नरगिस दत्त का किरदार निभा रहीं अभिनेत्री मनीषा कोइराला का कहना है कि वे अब रोमांटिक प्यार का इंतजार नहीं कर रहीं. उन्होंने कहा, "शायद स्त्री-पुरुष वाला प्यार मेरी किस्मत में नहीं है. अच्छा है. दोबारा किसी गलत रिश्ते में पड़ने से बेहतर मैं इस कटु सत्य को स्वीकार कर लूंगी. मैं कभी किसी पुरुष को मुझे दुखी करने की इजाजत नहीं दूंगीं." कैंसर से लड़ने के बाद नई जिंदगी पाने वाली अभिनेत्री ने कहा, "चाहे मेरी निजी जिंदगी हो या मेरा करियर, मैं अब ऐसे समय में किसी गलत स्थिति का सामना नहीं कर सकती जब भगवान ने मुझे दूसरा मौका दिया है."

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मनीषा का कहना है कि उनका ज्यादातर समय फिल्मों में उनके किरदारों की तैयारी करने में बीतता है. 'संजू' में अपनी संक्षिप्त भूमिका पर मनीषा ने सफाई दी, "'संजू' में शायद सभी महिला कलाकारों का किरदार रणबीर से छोटा है. रणबीर कपूर ने संजय दत्त का किरदार निभाया है जिनके ऊपर फिल्म बनी है." मनीषा संजय दत्त के साथ 'प्रस्थानम' नाम की एक और फिल्म कर रही हैं. उन्होंने कहा कि सहायक होने के बावजूद फिल्म में मेरा किरदार मजबूत है.

पहले से ज्यादा समझदार और असाधारण रूप से खूबसूरत मनीषा ने कहा, "मेरी दुनिया अलग हो गई थी, लेकिन फिर अनुभव ने मुझे और समझदार और सहनशील बनाया. जब आपका जीवन खतरे में होता है, आपको जिंदगी की असली कीमत तभी समझ में आती है."

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'संजू' में कैंसर रोगी का किरदार निभा रहीं मनीषा ने कहा, "यह आसान नहीं था. उस दर्द, परेशानी और पीड़ा को दोबारा जीना आसान नहीं था. नरगिस जी का किरदार निभाने के लिए बहुत ज्यादा आत्मिक शक्ति की जरूरत होती है, लेकिन अंत में सब काम आया क्योंकि नरगिस जी एक प्रतिष्ठित हस्ती थीं. मैंने उन्हें जीने की कोशिश की है. मात्र उनके जैसा दिखना और उनके जैसे बाल संवारना ही पर्याप्त नहीं है." उन्होंने कहा, "मुझे उनका स्वभाव, उनकी रूह को समझना था. मेरी कोशिश कितनी सफल हुई है, इसका पता जल्द लग जाएगा."

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मनीषा संस्करण लिख रही हैं. मैं एक पेशेवर लेखक के साथ अपना संस्करण लिख रही हूं. यह किताब कैंसर में बचे या उन लोगों को प्रेरित करेगी जो यह सोचते हैं कि उन्हें नई जिंदगी मिली है.

(इनपुट आईएएनएस से)