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आखिर क्यों कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने पूछा, किसका हित देखा जाना चाहिए, सरकार का या फिर जनता का

चिदंबरम ने सरकार की ओर दिए एक बयान को आधार बनाकर हमला किया है और पूछा है कि किसका हित देखा जाना चाहिए, सरकार का या फिर लोगों का.

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आखिर क्यों कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने पूछा, किसका हित देखा जाना चाहिए, सरकार का या फिर जनता का

पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम.

खास बातें

  1. पिछले कुछ समय में पेट्रोल के दाम में काफी वृद्धि हुई है
  2. पेट्रोल के साथ डीटल के दाम भी बढ़ें है
  3. सरकार ने अपने नियंत्रण से दामों को मुक्त कर दिया था.
नई दिल्ली:

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने नरेंद्र मोदी सरकार पर पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर जोरदार हमला बोला है. चिदंबरम ने सरकार की ओर दिए एक बयान को आधार बनाकर हमला किया है और पूछा है कि किसका हित देखा  जाना चाहिए, सरकार का या फिर लोगों का.

सरकार की ओर से तेल के बढ़ते दामों को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने से जहां लोगों में नाराजगी है वहीं विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है. ऐसे में सरकार की ओर से हाल ही में बयान आया, कि पेट्रोल डीजल पर लग रहे कर में एक रुपये की कटौती 13000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा. वहीं, पेट्रोल-डीजल पर एक रुपये का कर सीधे लोगों पर 13000 करोड़ रुपये का बोझ साबित हो रहा है.
 


इसके अलावा एक अन्य ट्वीट में चिदंबरम ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर दमनकारी टैक्स ने इसे सरकार बनाम जनता के मुद्दे में बदल दिया है.
 
बता दें कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों के पांच साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने पर पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने पिछले शुक्रवार को भी सरकार पर निशाना साधा था. उन्होंने सरकार से सवाल किया था कि पेट्रोल व डीजल की कीमतें मई 2014 से ज्यादा क्यों हैं, जबकि उस समय अंतरराष्ट्रीय कीमतें आज की तुलना में ज्यादा थीं. उन्होंने तब भी अपने ट्वीट में कहा कि सरकार बेखबर है और इस मुद्दे पर कुप्रबंधन की शिकार है.

उन्होंने कहा था, "कच्चे तेल की प्रति बैरल 74 अमेरिकी डॉलर की कीमत, चार साल पहले के प्रति बैरल 105 अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अभी भी कम है. तो मई 2014 की तुलना में आज पेट्रोल व डीजल की कीमतें ज्यादा क्यों है? बीते चार सालों से भाजपा सरकार तेल की कीमतों से अप्रत्याशित लाभ उठा रही है. तेल के अप्रत्याशित लाभ को छोड़कर भाजपा सरकार को इस बारे में कुछ अता-पता नहीं है."


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उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा शेखी बघारती है कि वह 22 राज्यों में सत्ता में है. तो फिर भाजपा सरकार पेट्रोलियम व पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के तहत लाने से इनकार क्यों कर रही है? इसका कारण भाजपा सरकार की ग्राहकों पर करों का बोझ लादने की नीति है.

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जानकारी दे दें कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमत में 75 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी के चलते पिछले मंगलवार को नई दिल्ली में लगातार छठे दिन घरेलू खुदरा पेट्रोल की कीमत में तेजी रही. नतीजतन, सोमवार को पेट्रोल की कीमत जहां 74.50 रुपये प्रति लीटर थी, मंगलवार को 13 पैसे बढ़कर 74.63 रुपये प्रति लीटर रही. इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, नई दिल्ली में मंगलवार की पेट्रोल की कीमत पिछले पांच साल में सबसे अधिक रही. पिछली बार 2013 के 14 सितंबर को पेट्रोल की कीमत 76.06 रुपये प्रति लीटर रही थी, तब कच्चे तेल की कीमत 108.3 डॉलर प्रति बैरल थी.


मंगलवार को नई दिल्ली के अलावा कोलकाता, मुंबई और चेन्नई के अन्य प्रमुख मेट्रो शहरों में भी पेट्रोल की कीमतें क्रमश: 77.32 रुपये, 82.48 रुपये और 77.43 रुपये प्रति लीटर की नई ऊंचाईयों पर रही. पेट्रोल की इतनी ज्यादा कीमत पिछले कई सालों में नहीं देखी गई थी. इन शहरों में पेट्रोल की पिछली बार उच्चतम कीमत 78.03 रुपये (कोलकाता, अगस्त 2014), 83.62 रुपये (मुंबई, सितंबर 2013) और 77.48 रुपये (चेन्नई, सितंबर 2013) थी.



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