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बिना रनवे के उड़ान भरने वाले विमान लाने की तैयाारी में स्पाइसजेट, पानी-खेत और बजरी पर भी उतरने में होंगे सक्षम

लक्ष्य वे एक अरब भारतीय हैं, जिन्होंने कभी हवाई यात्रा नहीं की है, क्योंकि या तो वे खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं, या उनके शहर में कोई एयरपोर्ट नहीं है.

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बिना रनवे के उड़ान भरने वाले विमान लाने की तैयाारी में स्पाइसजेट, पानी-खेत और बजरी पर भी उतरने में होंगे सक्षम

भारत को अगले 20 साल में कम से कम 2,100 नए विमानों की ज़रूरत पड़ेगी.

खास बातें

  1. स्पाइसजेट का लक्ष्य 1 अरब भारतीय
  2. जापान की कंपनी से हो रही है बातचीत
  3. बिना रनवे के उड़ान भरने वाले विमान लेने की तैयारी
मुंबई: भारतीय बजट एयरलाइन स्पाइसजेट  अब दुनिया के तीसरे सबसे बड़े उड्डयन बाज़ार, यानी भारत को और भी ज़्यादा खोलने के लिए ज़ोरदार तैयारी में जुट गई है, और अब उसका लक्ष्य वे एक अरब भारतीय हैं, जिन्होंने कभी हवाई यात्रा नहीं की है, क्योंकि या तो वे खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं, या उनके शहर में कोई एयरपोर्ट नहीं है. ब्लूमबर्ग में प्रकाशित ख़बर  के अनुसार, स्पाइसजेट इस वक्त जापान की सेटुची होल्डिंग्स इंक (Setouchi Holdings Inc) के साथ 100 ऐसे कोडियाक विमान खरीदने के लिए वार्ता कर रही है, जो कहीं भी - पानी पर भी, बजरी पर भी, और खुले खेत में भी - उतर सकते हैं. लगभग 40 करोड़ अमेरिकी डॉलर के इस सौदे से स्पाइसजेट के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सारे देश को हवाई मार्ग से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी योजना का लाभ उठाने में मदद मिलेगी.
 
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स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह ने कहा, "भारत में एयरपोर्ट काफी कम हैं... भारत में बहुत-सा विकास छोटे बाज़ारों में हो रहा है, लेकिन इन छोटे बाज़ारों के बीच कनेक्टिविटी कम है, या है ही नहीं... सो, हम ऐसा उपाय तलाश रहे हैं, ताकि उन जगहों पर भी उड़ानें ले जा सकें, जहां एयरपोर्ट ही नहीं हैं..." स्पाइसजेट से बातचीत जारी रहने के दौरान ही हिरोशिमा से संचालित सेटुची के ओवरसीज़ बिज़नेस डिवीज़न में एक्ज़ीक्यूटिव मैनेजिंग डायरेक्टर गो ओकाज़ाकी ने बताया कि कंपनी नवंबर में वॉटर लैंडिंग का एक डेमोन्स्ट्रेशन देने की योजना बना रही है. हालांकि उन्होंने इस बारे में कुछ नहीं बताया कि सौदा कब तक तय हो पाएगा.

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भारतीय एयरलाइन कंपनियों ने पिछले साल 10 करोड़ घरेलू यात्रियों को उड़ान करवाई, जिससे वह चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे उड्डयन बाज़ार बन गया है. बोइंग कंपनी के अनुमानों के अनुसार, इस क्षेत्र में हो रही बढ़ोतरी के साथ तारतम्य बिठाने के लिए भारत को अगले 20 साल में कम से कम 2,100 नए विमानों की ज़रूरत पड़ेगी, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 290 अरब अमेरिकी डॉलर होगी.


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