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दोनों हाथों से लिखती हैं 3 साल की ये बच्ची, बनाया रिकॉर्ड, CM कमलनाथ ने की जमकर तारीफ

बहुमुखी प्रतिभा की धनी षंजन थम्मा का पहला रिकार्ड 2 साल 11 माह में बना जब वह दोनों हाथों से लिखने लगी थी. 

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दोनों हाथों से लिखती हैं 3 साल की ये बच्ची, बनाया रिकॉर्ड, CM कमलनाथ ने की जमकर तारीफ

एमपी के सीएम कमलनाथ के साथ षंजन थम्मा

खास बातें

  1. षंजन थम्मा दोनों हाथों से लिखती हैं.
  2. उन्होंने पहला रिकार्ड 2 साल 11 माह में बनाया.
  3. जब वह 10 महीने की थी तभी से दोनों हाथों से लिखने लगी थी.
नई दिल्‍ली:

मध्य प्रदेश में एक तीन साल की बच्ची दोनों हाथों से लिखने का रिकॉर्ड बना चुकी हैं. बहुमुखी प्रतिभा की धनी षंजन थम्मा ने दस माह की उम्र में ही दोनों हाथ से लिखने की कला सीख ली. षंजन को दुनिया के 247 देशों में से 235 देशों और उनकी राजधानी के नाम मुह जबानी याद हैं. उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ से मुलाकात की. मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी प्रतिभाओं का प्रदेश हित में प्रेरणा के रूप में उपयोग किया जाएगा. कमल नाथ ने षंजन से सवाल किया कि उसे कौन-कौन से मेडल प्राप्त हुए हैं. मुख्यमंत्री ने उसकी एक-एक उपलब्धि को देखा. मुख्यमंत्री कार्यालय मध्य प्रदेश ने ट्वीट कर लिखा, ''मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ से "यंगेस्ट एक्टिवट्रेक्स्ट्रस राइटर" रिकार्ड बनाने वाली षंजन थम्मा ने मुलाकात की. मुख्यमंत्री ने कहा कि धन्य है हमारा प्रदेश की इतनी अद्वितीय प्रतिभा हमारे यहां हैं.''

मुख्यमंत्री कार्यालय मध्य प्रदेश ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि मुख्यमंत्री को षंजन की माता मानसी ने बताया कि जब वह 10 महीने की थी तभी से दोनों हाथ से लिखने के साथ ही 1 से 10 तक की गिनती इसे याद थी. साइंस, राजनीति और दुनिया के भूगोल की षंजन को गहरी समझ और जानकारी है. षंजन का पहला रिकार्ड 2 साल 11 माह में बना जब वह दोनों हाथों से लिखने लगी थी. 


दूसरा रिकार्ड इतनी ही कम उम्र में राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय गान के साथ ही सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तान उसे पूरा याद होने के कारण बना. षंजन को वर्ल्ड ऑफ रिकार्ड इंडिया और एशिया बुक ऑफ रिकार्ड मिल चुका है. उनकी अपनी खुद की 250 किताबों की लाइब्रेरी है.

बता दें कि षंजन तीन साल की है और वह नर्सरी में हैं लेकिन उसे नवीं कक्षा का पूरा ज्ञान हैं. षंजन की मां सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और पिता श्रीधर थम्मा एयर फोर्स में हैं. षंजन की प्रतिभा को सहेजने और संवारने के लिए मां ने अपनी नौकरी छोड़ दी. अब वह बीएड कर रही हैं ताकि वे स्वंय उसकी अधिकृत शिक्षिका बन सके.
 

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