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IND vs AUS 3rd Test:..और मयंक अग्रवाल सिर्फ तीसरे 'ऐसे' भारतीय ओपनर बनने से चूक गए

AUS vs IND, 3rd Test:एमसीजी में दूसरी पारी में जब एक छोर पर तेजी से विकेट गिर रहे थे, तो मयंक ने एक छोर थामे रखा. तीसरे दिन मयंक 28 रन पर नाबाद थे

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IND vs AUS 3rd Test:..और मयंक अग्रवाल सिर्फ तीसरे 'ऐसे' भारतीय ओपनर बनने से चूक गए

India tour of Australia, 2018-19: मयंक अग्रवाल

खास बातें

  1. मयंक को हमेशा इसका मलाल रहेगा!
  2. दूसरी पारी में 42 रन बनाए मयंक ने
  3. टेस्ट बैटिंग भी, वनडे बल्लेबाजी भी !
मेलबर्न:

मेलबर्न (Melbourne Cricket Ground, Melbourne) में ऑस्ट्रेलिया (India tour of Australia, 2018-19) के खिलाफ तीसरे टेस्ट (AUS vs IND, 3rd Test) के चौथे दिन भारत ने अपनी दूसरी पारी 8 विकेट पर 106 रन पर घोषित कर दी, लेकिन इन 106 रनों में मयंक अग्रवाल ने दिखाया कि वह किस स्तर के बल्लेबाज हैं. कहीं से भी नहीं लगा कि यह मयंक अग्रवाल का पहला टेस्ट मैच है. वास्तव में जिस अंदाज में उन्होंने चौथे दिन के सुबह के सेशन के तीसरे ही ओवर में नॉथन को जो दो छक्के जड़े, उसने साबित किया  मयंक अग्रवाल जरूरत के मौके पर तेज रन बनाना भी बखूबी जानते हैं. 

एमसीजी में दूसरी पारी में जब एक छोर पर तेजी से विकेट गिर रहे थे, तो मयंक ने एक छोर थामे रखा. तीसरे दिन मयंक 28 रन पर नाबाद थे. और जब शनिवार को चौथे दिन का खेल शुरू हुआ, तो मौसम के तेवरों को देखते हुए मयंक ने भी अपना अंदाज बदल दिया. मैनेजमेंट ने तेजी से रन बनाने का निर्देश दिया था, तो मयंक ने दो छक्के जड़कर निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया. 


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बहरहाल, पैट कमिंस ने मयंक की पारी का अंत कर दिया. और इससे  मयंक वह रिकॉर्ड बनाने से चूक गए, जो किसी भारतीय ओपनर के हिस्से में करीब 47 साल बाद आता. पहली बार यह कारनामा दिलावर हुसैन ने साल 1934 में किया था, तो दूसरी पार सुनील गावसस्कर ने 1971 में विंडीज के खिलाफ उसी की धरती पर बनाया था. और निश्चित ही मयंक इस बात से बहुत ही दुखी होंगे कि वह सिर्फ 8 रन मात्र से भारतीय क्रिकेट के तीसरे स्पेशल ओपनर बनने से चूक गए. 

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मयंक अग्रवाल अगर दूसरी पारी में अर्धशतक जड़ देते हैं, तो वह अपने करियर के पहले ही टेस्ट की दोनों पारियों में अर्धशतक  जड़ने का कारनामा करने वाले भारतीय क्रिकेट इतिहास के सिर्फ तीसरे ही ओपनर होते हैं. जैसा ऊपर बताया है कि सिर्फ दिलावर हुसैन और सुनील गावस्कर ने ही यह कारनामा किया है. 
 



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