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IND vs SL Test: 200 ओवर बर्बाद होने से नहीं..इन 3 कारणों से फिसली जीत!

वास्तव में श्रीलंका के खिलाफ ईडन गार्डन में पहले टेस्ट में जीत भारत की ही होती. लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो कहीं न कहीं इसमें दोष टीम इंडिया का ही रहा.

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IND vs SL Test: 200 ओवर बर्बाद होने से नहीं..इन 3 कारणों से फिसली जीत!

विराट कोहली (भारतीय कप्तान, फाइल फोटो)

खास बातें

  1. गेंदबाजों की धीमे ओवर रेट की पड़ा नुकसान
  2. आधा घंटा पहले पारी घोषित कर सकते थे विराट
  3. काश! आईसीसी आखिरी दो दिन टाइमिंग में बदलाव कर देती
नई दिल्ली: यह सही है कि श्रीलंका के खिलाफ ईडन गार्डन में खत्म हुए पहले टेस्ट में खराब मौसम के कारण करीब 200 ओवर का खेल बर्बाद हो गया. लेकिन इसके बावजूद भारत पहले टेस्ट में जीत के साथ बढ़त हासिल कर सकता था. भारत जीत से सिर्फ तीन विकेट दूर रह गया और ये विकेट हासिल किए जा सकते थे. लेकिन दो गलतियां भारत से हुईं, तो दूसरी बात पर आईसीसी का ध्यान नहीं गया. इन तमाम बातों के चलते करोड़ों भारतीय क्रिकेटप्रेमियों के लिहाज से पहले टेस्ट के आखिरी दिन पैदा हुआ रोमांच अपनी मंजिल पर नहीं पहुंच सका. यह इन क्रिकेटप्रेमियों और आईसीसी के लिए सिर्फ विमर्श और चर्चा छोड़ गया. वास्तव में अगर कुछ बातें होतीं, तो ईडन में जीत विराट कोहली एंड कंपनी की होती. चलिए हम आपको बताते हैं कि करीब दो सौ ओवर खराब मौसम के कारण बर्बाद होने के बावजूद भारत कैसे ईडन में जीत का झंडा गाड़ सकता था और टीम इंडिया से कहां गलती हुईं.

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खराब ओवर रेट
आईसीसी के नियमों के अनुसार टेस्ट क्रिकेट में प्रतिघंटा ओवर दर 14.28 ओवर है, लेकिन भारतीय गेंदबाजों का ओवर रेट बहुत बहुत ही खराब रहा. भुवनेश्वर ने चौथे दिन इसके पीछे थकावट को एक कारण बताया था. लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि गेंदबाज पहले ही टेस्ट में थकावट का शिकार हो रहे हैं. इस थकावट ने ओवरेट पर अच्छी चोट पहुंचायी. अगर ओवर रेट की दर सही होती, तो भारतीय गेंदबाजों को और दस से 15 ओवरों का फायदा मिलता  और इन ओवरों में तीन विकेट चटकाए  जा सकते थे. अब क्रिकेटपंडितों के बीच चर्चा  इस बात की है कि कहीं अगले दोनों टेस्ट मैचों में भी थकावट ओवर रेट पर तो नुकसान नहीं पहुंचाएगी.

आधा घंटा पहले घोषित होती पारी!
अगर भारत चायकाल से आधा घंटा पहले अपनी दूसरी पारी पारी घोषित कर देता या दो सौ की बढ़त पर यह पारी घोषित कर दी जाती, तो टीम इंडिया के गेंदबाजों  को करीब दस ओवर अलग से और मिल जाते, जिससे वे आसानी से तीन विकेट चटका लेते. लेकिन ऐसा करने के लिए विराट को अपना शतक कुर्बान करना पड़ता और इसके लिए खुद टीम इंडिया के कप्तान को बहुत बड़ा दिल दिखाना पड़ता. साथ ही, अपनी रणनीति में भी बदलाव करना पड़ता, जिसमें पारी घोषित करते समय जीत नहीं दिखाई पड़ रही थी. 

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आईसीसी टाइमिंग में कर सकती थी बदलाव!
मैच शुरू होने की टाइमिंग साढ़े नौ बजे थी. पहले ही दिन से साफ हो गया था कि इस टेस्ट पर बारिश और खराब मौसम ही मार रहेगी. वहीं शाम को तय समय से पहले ही अंधेरा हो जाता है. ऐसे में जब कोलकाता में सूरज जल्द ही निकल जाता है, तो मैच के आखिरी दो दिन साढ़े नौ बजे की जगह मैच 9:00 बजे भी शुरू किया जा सकता था. कुल मिलाकर अगर इनमें से दो बातें भी भारत के पक्ष में चली जातीं, तो भारत श्रीलंका के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में बढ़त ले लेता. यह सही है कि आईसीसी का अपना नजरिया और मजबूरियां हैं. लेकिन मैच में करीब दो सौ ओवर का खेल बर्बाद होने के बाद पर्याप्त आराम मिलने के बावजूद भारतीय गेंदबाजों की थकावट की शिकायत और धीमी ओवर गति दर एक चिंता की बात है. भारत को तीन विकेट लेने के लिए दस से पंद्रह ओवर की चाहिएं थे, जो टीम के 'धीमेपन' के कारण हाथ से निकल गए.

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आखिर में यह भी पूरी तरह साफ हो गया कि भारत को बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि श्रीलंकाई बल्लेबाज दूसरी पारी में ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएंगे. मतलब भारत विराट के शतक पूरा करने और पारी घोषित करने के बाद ड्रॉ के इरादे से ही मैदान पर उतरा थी, जीत के इरादे से नहीं.


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