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भारत के इस क्रिकेटर ने ठुकरा दिया था जुल्फिकार अली भुट्टो का पाकिस्‍तानी नागरिक बनने का प्रस्‍ताव...

शॉर्टर फॉर्मेट का क्रिकेट प्रारंभ होने के पहले भारत का एक बल्‍लेबाज अपनी धमाकेदार बल्‍लेबाजी के कारण क्रिकेटप्रेमियों में बेहद लोकप्रिय था. इस बात की जानकारी ज्‍यादा लोगों को नहीं होगी कि विदेशी सरजमीं पर भारत के लिए पहला टेस्ट शतक लगाने वाले सलामी बल्लेबाज सैयद मुश्ताक अली ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने पाकिस्‍तान की नागरिकता का प्रस्‍ताव दिया था. मुश्‍ताक अली (अब स्‍वर्गीय) ने इस प्रस्‍ताव को ठुकरा दिया था.

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भारत के इस क्रिकेटर ने ठुकरा दिया था जुल्फिकार अली भुट्टो का पाकिस्‍तानी नागरिक बनने का प्रस्‍ताव...

प्रतीकात्‍मक फोटो

खास बातें

  1. तूफानी बल्‍लेबाजी के कारण बेहद लोकप्रिय थे मुश्‍ताक अली
  2. मुश्‍ताक के बेटे गुलरेज अली ने दी यह जानकारी
  3. प्रस्‍ताव पर मुश्‍ताक बोले थे, 'भारत मेरा घर, पूरी जिंदगी यहीं रहूंगा'
इंदौर: शॉर्टर फॉर्मेट का क्रिकेट प्रारंभ होने के पहले भारत का एक बल्‍लेबाज अपनी धमाकेदार बल्‍लेबाजी के कारण क्रिकेटप्रेमियों में बेहद लोकप्रिय था. कैप्‍टन मुश्‍ताक अली की तूफानी बल्‍लेबाजी को देखने के लिए दर्शक स्‍टेडियम में पहुंचते थे. एक बार मुश्‍ताक को टीम से बाहर कर दिया गया तो दर्शकों ने इसका जमकर विरोध किया था. वैसे, इस बात की जानकारी ज्‍यादा लोगों को नहीं होगी कि विदेशी सरजमीं पर भारत के लिए पहला टेस्ट शतक लगाने वाले सलामी बल्लेबाज सैयद मुश्ताक अली ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने पाकिस्‍तान की नागरिकता का प्रस्‍ताव दिया था. मुश्‍ताक अली (अब स्‍वर्गीय) ने इस प्रस्‍ताव को ठुकरा दिया था. मुश्ताक के बेटे गुलरेज अली ने उस वाकये को याद करते हुये बताया कि बंटवारे के बाद 1948 में भुट्टो ने उनके पिता को पाकिस्तान की नागरिकता लेने के लिये कहा था. मुश्ताक को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की ओर से उनके देश की नागरिकता लेने का प्रस्ताव दोदो बार मिला था. गुलरेज ने पीटीआई से कहा,‘ मेरे पिता ने मुझे एक बार बताया था कि उन्हें जुल्फिकार अली भुट्टो ने आमंत्रित किया था,अगर मेरी याददाश्त सही है तो यह वाकया 1947-48 का है जब उन्हें पाकिस्तान जाकर वहां रहने का प्रस्ताव मिला था लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया था.’ गुलरेज ने कहा, ‘मुझे लगता है कि ऐसा प्रस्ताव दूसरी बार 70 के दशक में मिला था जब वह तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मुलाकात के लिए शिमला आए थे. उन्होंने दोनों बार इस प्रस्ताव को शिष्टतापूर्वक यह कहते हुये ठुकरा दिया कि ‘भारत मेरा घर है, इसने मुझे सब कुछ दिया है और मैं अपनी पूरी जिंदगी यहीं रहूंगा.’उन्होंने कहा कि भुट्टो के सम्मान में मुश्ताक ने गुलरेज के बेटे अब्बास अली का उपनाम ‘जुल्फी’ रखा. गुलरेज और अपने दादा की तरह अब्बास अली ने भी घरेलू क्रिकेट में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है. उन्होंने भारत 'ए' की ओर से 1998 में पाकिस्तान का दौरा भी किया है. अब्बास ने दो साल पहले प्रथम श्रेणी क्रिकेट को अलविदा कहा है. वह राज्य की सीनियर टीम के क्षेत्ररक्षण कोच है और खिलाड़ियों को सैयद मुश्ताक अली टी20 टूर्नामेंट की तैयारी कर रहे है.
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मुश्ताक (90 वर्ष) का जन्म 1914 में हुआ और उन्होंने 1934 से 1952 तक 11 टेस्ट मैच खेले है. उन्होंने 1936 में ओल्ड ट्रैफर्ड 112 रन की पारी के दौरान विजय मर्चेंट के साथ पहले विकेट के 203 रन जोड़े. वर्ष 2005 में उनका निधन हो गया था.  (इनपुट: PTI)

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