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Chandra Grahan: ग्रहण के बाद दुष्प्रभावों से बचने के लिए लोग कर रहे हैं ये 6 काम

लोग ग्रहण के बाद भी इसके दुष्प्रभावों से बचने के लिए कुछ काम करते हैं. यहां जानिए चंद्रग्रहण के बाद क्या करते हैं लोग और क्या कहती है ग्रहण से जुड़ी पौराणिक कथा.

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Chandra Grahan: ग्रहण के बाद दुष्प्रभावों से बचने के लिए लोग कर रहे हैं ये 6 काम

चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) के बाद जरूर करें ये काम

खास बातें

  1. 27 जुलाई को दिखा साल 2018 का दूसरा चंद्रग्रहण
  2. 3 घंटे 48 मिनट तक चला यह ग्रहण
  3. 21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण
नई दिल्ली: 27 जुलाई को साल 2018 का दूसरा चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) दिखा. यह ग्रहण रात 11.54 से शुरू होकर अगले दिन 28 जुलाई सुबह 3.49 तक रहा. यह पूर्ण चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2018) 21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण था, जो कि 3 घंटे 55 मिनट तक चला. मान्यता अनुसार ग्रहण के दौरान कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता. ना ही पूजा की जाती है और ना ही खाना खाया या बनाया जाता है. इसके साथ ही प्रेग्नेंट महिलाओं को ग्रहण के दौरान बहुत ज्यादा ही सावधानियां बरतने को कहा जाता है. लेकिन लोग ग्रहण के बाद भी इसके दुष्प्रभावों से बचने के लिए कुछ काम करते हैं. यहां जानिए चंद्रग्रहण के बाद क्या करते हैं लोग और क्या कहती है ग्रहण से जुड़ी पौराणिक कथा.

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27 जुलाई को लगा सदी का सबसे लंबा पूर्ण चंद्रग्रहण

1. लोगों की मान्यता है कि ग्रहण के तुरंत बाद किसी भी काम को करने से पहले नहाना चाहिए. 
2. सिर्फ खुद को ही नहीं बल्कि घर में मंदिर में मौजूद सभी भगवानों की मूर्तियों को भी नहलाना या फिर गंगाजल छिड़कना चाहिए. 
3. मूर्तियों और खुद को नहलाने के बाद पूरे घर में धूप-बत्ती कर शुद्धीकरण किया जाना चाहिए.
4. घर में या बाहर मौजूद तुलसी के पौधे को भी गंगाजल डालकर स्वच्छ करना चाहिए. 
5. कुछ लोग तो अपने घरों को भी पानी से धो डालते हैं. 
6. मान्यता है कि ग्रहण के बाद मन की शुद्धी के लिए दान-पुण्य भी करना चाहिए.

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क्या होता है चंद्रग्रहण?
जब सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती हुई पृथ्वी एक सीध में अपने उपग्रह चंद्रमा तथा सूर्य के बीच आ जाती है, तो चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की किरणें रुक जाती हैं, और पृथ्वी की प्रच्छाया उस पर पड़ने लगती है, जिससे उसका दिखना बंद हो जाता है. इसी खगोलीय घटना को चंद्रग्रहण कहा जाता है.

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क्या कहती है पौराणिक कथा?
एक पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और दानवों के बीच अमृत के लिए घमासान चला. इस मंथन में अमृत देवताओं को मिला लेकिन असुरों ने उसे छीन लिया. अमृत को वापस लाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी नाम की सुंदर कन्या का रूप धारण किया और असुरों से अमृत ले लिया. जब वह उस अमृत को लेकर देवताओं के पास पहुंचे और उन्हें पिलाने लगे तो राहु नामक असुर भी देवताओं के बीच जाकर अमृत पीने बैठ गया. जैसे ही वो अमृत पीकर हटा, भगवान सूर्य और चंद्रमा को भनक हो गई कि वह असुर है. तुरंत उससे अमृत छीन लिया गया और विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से उसकी गर्दन धड़ से अलग कर दी. 

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क्योंकि वो अमृत पी चुका था इसीलिए वह मरा नहीं. उसका सिर और धड़ राहु और केतु नाम के ग्रह पर गिरकर स्थापित हो गए. ऐसी मान्यता है कि इसी घटना के कारण सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण लगता है, इसी वजह से उनकी चमक कुछ देर के लिए चली जाती है. 

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