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Dhumavati Jayanti: भगवान शिव को निगलने पर पार्वती बनीं धूमावती, इस रूप की होती है पूजा

Dhumavati Jayanti: मां धूमावती जयंती आज यानी सोमवार के दिन मनाई जा रही है. इस दिन पूजा और दान पुण्य करने से सभी कामनाओं की पूर्ती होती है

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Dhumavati Jayanti: भगवान शिव को निगलने पर पार्वती बनीं धूमावती, इस रूप की होती है पूजा

जयेष्‍ठ माह की शुक्‍ल पक्ष की अष्‍टमी को होती है मां धूमावती की पूजा

खास बातें

  1. जयेष्‍ठ माह की शुक्‍ल पक्ष की अष्‍टमी को होती है मां धूमावती की पूजा
  2. सुहागिनें दूर से ही करती हैं मां धूमावती के दर्शन
  3. भूख के कारण मां धूमावती निगल गई थीं भगवान शिव को
नई दिल्ली:

सोमवार यानी 10 जून को मां पार्वती के अति उग्र रूप मां धूमावती की जयंती मनाई जा रही है. जयेष्‍ठ माह की शुक्‍ल पक्ष की अष्‍टमी को धूमावती अमावस्या (Dhumavati Amavasya) हर वर्ष मनाई जाती है. इस दिन को धूमावती महाविद्या के रूप में भी जाना जाता है. इस दिन मां धूमावती की पूजा और दान पुण्य करने से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है. कहा जाता है कि ये दिन तांत्रिक सिद्धियों के लिए अनुकूल होता है. इस दिन मां धूमावती के विधवा रूप की पूजा होती है. मां धूमावती कौए के वाहन पर विराजमान हैं और अति उग्र हैं. भगवान शिव की पत्नी मां पार्वती ने पापियों का नाश करने के लिए धूमावती का अवतार लिया था.

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जानिए मां धूमावती की कथा
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि भगवान शिव की पत्नी मां पार्वती (Maa Parvati) ने बहुत भूख लगने पर शिव जी से कुछ खाने को मांगा. शिवशंभू महादेव ने उन्हें थोड़ा ठहरने को कहा, लेकिन जब कुछ देर तक मां पार्वती को कुछ खाने के लिए नहीं मिला तो तेज भूख लगने की वजह से उन्होंने महादेव को ही निगल लिया. भगवान शिव के गले में विष के कारण मां पार्वती के शरीर से धुंआ निकलने लगा. विष के प्रभाव से माता पार्वती का रूप भयंकर होने लगा. जिस पर भगवान शिव ने मां पार्वती को कहा कि तुम्हारे इस रूप को मां धूमावती के नाम से जाना जाएगा. अपने पति को निगलने की वजह से मां पार्वती के इस रूप को पूजा जाता है. कहा जाता है कि इस दिन मां धूमावती के दर्शन से संतान और पति की रक्षा होती है. हालांकि ये भी परंपरा  है कि इस दिन सुहागिनें दूर से ही मां धूमावती क दर्शन करती हैं.

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ऐसे करें मां धूमावती की पूजा 
मां धूमावती की गुप्त नवरात्रों में विशेषकर पूजा की जाती है. ये दस महाविद्याओं में अंतिम विद्या है. बताया जाता है कि इस दिन मनुष्य को सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर, घर में बने मंदिर को गंगाजल से पवित्र करके जल, पुष्प, सिन्दूर, कुमकुम, अक्षत, फल, धूप, दीप तथा नैवैद्य आदि द्वारा मां की पूजा अर्चना करनी चाहिए. इस दिन मां धूमावती की कथा सुनने से विशेष फल की प्राप्ति होती है.

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