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हनुमान जयंती विशेष: जानिए बजरंग बली हनुमानजी से जुड़ी कुछ सुनी-अनसुनी और रोचक बातें

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हनुमान जयंती विशेष: जानिए बजरंग बली हनुमानजी से जुड़ी कुछ सुनी-अनसुनी और रोचक बातें
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हिन्दू धर्म में रामभक्त हनुमान की पूजा-आराधना के लिए मंगलवार का दिन उन्हें समर्पित किया गया है. उत्तर भारत में जहां वे बजरंबली और हनुमान के नाम से अधिक पूजे जाते जाते हैं, वहीं दक्षिण भारत में वे आंजनेय के नाम से अधिक प्रसिद्ध हैं. आंजनेय का अर्थ होता है, अंजनी के पुत्र, क्योंकि हनुमानजी की माता का नाम अंजनी था, जो कि देवलोक की एक अप्सरा थी और एक श्राप के तहत उन्हें पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ा. आइए जानते हैं बजरंग बली हनुमान से जुड़ी कुछ सुनी-अनसुनी और रोचक बातें:

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एक कथा के अनुसार एक बार हनुमानजी ने भगवान श्रीराम की याद में अपने पूरे शरीर पर सिंदूर भी लगा लिया था. यह इसलिए क्योंकि जब उन्होंने माता सीता को सिंदूर लगाते हुए देखा तो उन्होंने सिंदूर लगाने का कारण पूछा. इस पर सीताजी ने बताया कि यह उनका श्रीराम के प्रति प्रेम और सम्मान का प्रतीक है. बस यह जानने की देरी ही थी कि हनुमानजी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लेप लिया, यह दर्शाने के लिए कि वे भी श्रीराम से कितना प्रेम करते हैं. तभी से हनुमानजी का सिंदूरी-लाल रूप प्रचलित है और भक्तजन उनके शरीर पर सिन्दूर लेपन कर उनकी आराधना करते हैं.

 
हनुमानजी को बाल-ब्रह्मचारी कहा जाता है, जो कि वे हैं भी, क्योंकि उनकी शादी कभी नहीं हुई. लेकिन आश्चर्यजनक यह कि उनका एक पुत्र भी है, जिसका नाम मकरध्वज है. मकरध्वज का जन्म एक मछली के गर्भ से हुआ था, जिसने हनुमानजी का पसीना निगल लिया था. पसीना, जिसे संस्कृत में स्वेद कहते हैं, से जन्म लेने कारण मकरध्वज को स्वेदज भी कहते हैं.
 
क्या आप जानते हैं माता अंजनी और वानरराज केशरी के पुत्र हनुमानजी अकेले नहीं बल्कि उनके पांच भाई भी थे. जी हां, हनुमान जी के पांच सगे भाई थे और वे सभी विवाहित थे. इसका उल्लेख ब्रह्मांडपुराण में मिलता है. इस पुराण के अनुसार पांचों भाइयों में हनुमानजी सबसे बड़े थे. यानी हनुमानजी को शामिल करने पर वानर राज केसरी के 6 पुत्र थे. हनुमानजी के बाद क्रमशः मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान और धृतिमान थे.  
कहते हैं, एक बार भगवान श्रीराम के गुरु विश्वामित्र किसी कारणवश हनुमानजी से गुस्सा हो गए और उन्होंने प्रभु राम को हनुमानजी को मृत्युदंड देने को कहा था. भगवान राम ने ऐसा किया भी क्योंकि वे गुरु आज्ञा की अवहेलना नहीं कर सकते थे. लेकिन सजा के दौरान हनुमानजी राम नाम जपते रहे और उनके ऊपर प्रहार किए गए सारे शस्त्र विफल हो गए.
 
कहते हैं, एकबार भगवान श्रीराम महल में अनुपस्थिति के कारण सीताजी ने हनुमानजी सहित सभी लोगों के भोजन की व्यवस्था की देख-रेख करनी पड़ी. हनुमानजी को भी भोजन पर बुलाया गया. चूंकि हनुमानजी ने श्रीराम के आदेश के बिना ही भोजन शुरू किया था, इसलिए जी का पेट भर ही नहीं रहा था. महल में जितना राशन-अनाज था, सब खत्म हो गया पर हनुमान जी खाते ही जा रहे थे. तब देवी सीता ने हारकर महल में लगी तुलसी के पते में राम का नाम लिखकर उस पते को हनुमान को परोसा तो हनुमानजी खुश हो गये और उनका पेट भर गया.  
एक बार देवी सीता ने हनुमान जी को एक मूल्यवान माला दी पर हनुमानजी ने उसे हाथ में लेते ही तोड़ दी. जब देवी सीता ने इसका कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि न तो इसमें राम नाम की ध्वनि सुनने को नहीं मिली और न ही प्रभु श्रीराम की छवि है, तो मैंने इसे तोड़ दिया. क्योंकि, मेरे लिए मेरे रामनाम की गूंज और उनकी छवि से बड़ी कोई और चीज नहीं हैं. इस सीताजी ने पूछा कि क्या तुम्हारे रोम-रोम में श्री राम बसते है? तो उन्होंने कहा हां माते. सीता को विश्वास होता न देख हनुमान ने अपना एक रोम उखाड़ के उन्हें दिया. सीताजी जैसे ही उसे कान को लगाया तो रोम से रामनाम की ध्वनि आने लगी. इतना ही नहीं, जब तक सीताजी रोम के इस रहस्य से उबर पाती तभी हनुमानजी ने अपना सीना चीर कर उन्हें दिखा दिया, जिसमें प्रभु श्रीराम और देवी सीता विराजमान थे.

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