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नवरात्र 2018: जहां तवायफ के कोठे की मिट्टी से तैयार होती हैं दुर्गा मां की मूर्तियां

नवरात्र से पहले दुर्गा की मूर्तियों को मूर्त रूप देने के लिए इन दिनों बंगाल से आए मूर्तिकार दिन-रात काम में जुटे हुए हैं.

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नवरात्र 2018: जहां तवायफ के कोठे की मिट्टी से तैयार होती हैं दुर्गा मां की मूर्तियां

शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है

खास बातें

  1. नवरात्र से पहले मां दुर्गा की प्रतिमा बनाने का काम चल रहा है
  2. तवायफ के कोठे की मिट्टी का इस्‍तेमाल कर प्रतिमा बनाई जाती है
  3. यह परंपरा सदियों से चली आ रही है
नई दिल्‍ली:

Navaratri 2018: फिल्‍म देवदास में देव बने शाहरुख खान की बचपन की प्रेमिका पारो यानी ऐश्वर्या राय बच्‍चन उस वक्‍त दर्शकों को हैरान कर देती हैं जब वो चंद्रमुखी उर्फ माधुरी दीक्षित से मिट्टी मांगने आती हैं. पारो देवदास की हमदर्द चंद्रमुखी को बताती है कि वो उसके आंगन की मिट्टी का इस्‍तेमाल मां दुर्गा की प्रतिमा बनाने के लिए करना चाहती है. यह तो हुई फिल्‍म की बात लेकिन हकीकत में तवायफ के कोठे की मिट्टी से देवी मां की मूर्त‍ि बनाई जाती है. जी हां, शारदीय नवरात्र और दुर्गोत्सव को लेकर मूर्तिकार देवी प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं. कोलकाता के जांजगीर-चंपा इलाके में मूर्तिकार पिछले 25 साल से इस काम में लगे हुए हैं. वे परम्परानुसार तवायफ के कोठे की मिट्टी मिलाकर यह प्रतिमा तैयार करते हैं. दुर्गा मूर्ति स्थापना के लिए समितियों की ओर से मूर्तियों की बुकिंग भी शुरू हो गई है. इस बीच हालांकि महंगाई की मार भी इन पर पड़ रही है. 

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इस वर्ष शारदीय नवरात्र 10 अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं. लोगों में काफी उत्साह है. दुर्गा की मूर्तियों को मूर्त रूप देने के लिए इन दिनों बंगाल से आए मूर्तिकार दिन-रात काम में जुटे हुए हैं. बंगाल के कृष्णा नगर कोलकाता से आए मूर्तिकार शंकर पाल ने बताया कि उनकी तीन पीढ़ियां इस काम को करती आ रही हैं. वे खुद 13 साल की उम्र से मूर्ति बनाने का काम कर रहे हैं. पिछले 25 सालों से वे जिले में मूर्ति बनाने का काम करते आ रहे हैं. साल में 7-8 महीने गणेश, विश्वकर्मा और दूर्गा की मूर्तियां बनाने के बाद बंगाल लौट जाते हैं.

उन्होंने बताया कि मूर्ति निर्माण में हसदेव नदी के किनारे की मिट्टी का उपयोग किया जा रहा है. मूर्ति में विशेष आभा के साथ चमक बढ़ाने के लिए बंगाल से विशेष प्रकार की दूध मिट्टी का उपयोग किया जाता है. इसके अलावा परम्परानुरूप तवायफ के कोठे की मिट्टी भी वे साथ लेकर आते हैं. इस मिट्टी को प्रतिमा बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली मिट्टी में मिलाया जाता है. मां की प्रतिमा के लिए लोगों की ओर से बड़ी संख्या में ऑर्डर दिए जा रहे हैं. 25 मूर्तियां तैयार की गई हैं. समय पर लोगों को मूर्तियां देने के लिए काम जोरों पर है. उनके साथ नरेश पाल, मदन पाल भी सहयोग कर रहे हैं.

महंगाई की मार हर क्षेत्र में दिखने लगी है. महंगाई के कारण मूर्ति के भाव में भी 20 फीसदी का इजाफा हुआ है. इससे बाजारों में मूर्तियां 3000 से 4500  रुपये तक में बिक रही हैं. मूर्तिकार शंकर पाल ने बताया कि पहले के मुकाबले दूध मिट्टी 20 रुपये, मोती कलर तीन हजार रुपये और समान्य कलर दो हजार 500 रुपये प्रति किलो मिल रहा है. साथ ही मिट्टी, बांस, पैरा के भाव के साथ किराये में वृद्धि हुई है. ऐसे में मूर्तियों के भाव में बढ़ोतरी होना स्वभाविक है.

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क्षेत्र के देवी मंदिरों में मनोकामना ज्योति कलश स्थापना को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं. खोखरा स्थित मां मनका दाई मंदिर में मनोकामना ज्योति कलश की स्थापना हर साल की जाती है. जिले के अलावा पड़ोसी जिला कोरबा, रायगढ़ और बिलासपुर से भक्त बड़ी संख्या में मनोकामना कलश की स्थापना कराते हैं. इसके मद्देनजर मंदिर की साफ-सफाई, रंग-रोगन और पंडाल लगाने का काम शुरू हो गया है.



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