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इन देवताओं ने किया था नारी का अपमान, भुगतने पड़े गंभीर परिणाम

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इन देवताओं ने किया था नारी का अपमान, भुगतने पड़े गंभीर परिणाम

फ़ोटो साभार: isha.sadhguru.org

डिस्क्लेमर : पौराणिक कहानियों पर आधारित यह आलेख महिलाओं के प्रति सम्मान करने की सीख देता है. इस आलेख का उद्देश्य सिर्फ पौराणिक कथाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना है, न कि किसी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाना. अतः इस आलेख को केवल पौराणिक कथाओं के ज्ञानवर्धन के अलावा किसी और दृष्टिकोण से न पढ़ें.
 
हिंदू धर्म में पुराणों की संख्या 18 बताई गई है, जो अधिकांशतः देवी-देवताओं के नाम पर है. ये पौराणिक ग्रंथ अनेक रहस्यों और रोचक कथाओं से भरे हुए हैं. इनमें कई कथाएं ऐसी हैं, जो स्त्रियों के सम्मान पर जोर देती हैं, लेकिन कुछ कथाएं ऐसी भी हैं, जो महिला पर हुए अत्याचारों को भी बताती हैं. इन पौराणिक कथाओं की एक सबसे अच्छी बात यह है कि जिस किसी ने नारी पर अत्याचार किया, उन्हें श्राप भी मिला. बाद में उन्होंने पश्चाताप भी किया. कहते हैं, पश्चाताप की अग्नि में सब निर्मल हो जाता है.

 
पुराणों में वर्णित एक ऐसी ही कथा है 'चंद्रमा' यानी चंद्रदेव की. कहते हैं, वे देवताओं के गुरु बृहस्पति की पत्नी तारा पर मोहित हो गए थे. चन्द्रमा ने छल किया और तारा संग भोग-विलास में लिप्त रहे थे. जब इस पूरे घटनाक्रम का ज्ञान देवगुरु बृहस्पति को हुआ, तो उन्होंने चंद्रदेव को श्राप दे दिया.
 
पुराणों में ही वर्णित एक दूसरी कथा है श्रीहरि और वृंदा की. हालांकि श्रीहरि की उद्देश्य इसमें नारी अपमान की नहीं थी. लेकिन परिस्थितियां ऐसी विकट बनीं थी कि उन्हें यह कृत्य करना पड़ा. पुराणों के अनुसार, जालंधर नामक दानव ने देवताओं में त्राहिमाम मचा दी थी. उसकी पत्नी का नाम था वृंदा. वृंदा महान पतिपरायण महिला थी. पुराणों के अनुसार, वृंदा के सतीत्व के कारण जालंधर को पराजित करना असंभव था. तब जगतपालक श्रीहरि ने जालंधर की मृत्यु के लिए एक रणनीति बनाई गई और वृंदा का सतीत्व भंग कर दिया. तब जाकर भगवान शिव जालंधर दानव का वध करने में सफल हो पाए थे. लेकिन वृंदा ने श्रीहरि को श्राप दिया कि वे काले पत्थर में परिणत हो जाएं. कहते हैं, शालिकग्राम के रूप में जिसकी पूजा की जाती है, वह श्रीहरि का शापित रूप ही है.  
ऐसी ही एक कथा त्रेतायुग की है. कहते हैं, स्वर्गाधिपति इंद्रदेव गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या पर मोहित हो गए थे. उन्होंने छल से अहिल्या का सतीत्व भंग कर दिया. जब यह बात पुण्य प्रतापी गौतम ऋषि को पता चली तो उन्होंने इंद्रदेव को तो श्राप दिया ही, साथ ही अहिल्या को पत्थर बन जाने का श्राप दिया. लेकिन अहिल्या को दोषी न जानकार उन्होंने अहिल्या से कहा जब भगवान श्रीराम यहां आएंगे तभी उसका उद्धार होगा.
 
ऊपर वर्णित पौराणिक कथाएं बताती हैं, कि कहीं-न-कहीं नारियों के साथ छल हुआ था. लेकिन चाहे यह छल किसी ने भी किया हो, उसे सदैव गंभीर परिणाम भुगतने पड़े. चाहे वह देवता ही क्यों न हों. इसलिए सदैव नारी और नारीशक्ति का सम्मान करना चाहिए.

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