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भगवान शिव शरीर पर क्यों लगाते हैं भस्म?

सभी भगवान हर जगह सभी सोने-चांदी से जड़े आभूषणों में दिखाई देते हैं. लेकिन कभी आपने सोचा है कि आखिर भगवान शिव क्यों बिना आभूषणों के रहते हैं?

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भगवान शिव शरीर पर क्यों लगाते हैं भस्म?

भगवान शिव क्यों लगाते हैं भस्म...

खास बातें

  1. शिव के गले में माला के नाम पर सांप
  2. शरीर पर मलमल के कपड़ों के बजाय बाघ की खाल
  3. शरीर पर चंदन के लेप के बजाय भस्म
नई दिल्ली:

लक्ष्मी-गणेश, राधा-कृष्ण, राम-सीता, विष्णु, ब्रह्मा आदि अनेकों भगवान भारी-भारी गहनों और वस्त्रों से लदे होते हैं. इन भगवानों की मूर्तियां मंदिरों में देखें या फिर इनके चित्रों पर गौर करें. हर जगह यह सभी सोने-चांदी से जड़े आभूषणों में दिखाई देते हैं. लेकिन कभी आपने सोचा है कि आखिर भगवान शिव क्यों बिना आभूषणों के रहते हैं. उनके गले में माला के नाम पर सांप, सिर पर मुकुट की जगह जटाएं, शरीर पर मलमल के कपड़ों के बजाय बाघ की खाल और शरीर पर चंदन के लेप के बजाय भस्म क्यों है? 

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भगवान शिव क्यों अपने शरीर पर भस्म लगाते हैं, आज आपको इस सवाल का जवाब यहां मिलेगा कि आखिर क्यों देवों के देव महादेव अपने शरीर पर भस्म लगाते हैं? आपको बता दें कि ये कोई आम लकड़ी की भस्म नहीं है बल्कि यह चिता की राख होती है. इस भस्म के पीछे एक नहीं कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. यहां जानिए कि कौन से हैं वो रहस्य जिसके चलते भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म लगाते हैं. 


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क्यों शरीर पर भस्म लगाते हैं शिव?
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव को मृत्यु का स्वामी माना गया है. इसीलिए शव से शिव नाम बना. उनके अनुसार शरीर नश्वर है और इसे एक दिन इस भस्म की तरह शरीर राख हो जाना है. जीवन के इसी पड़ाव का भगवान शिव सम्मान करते हैं और इस सम्मान को वो खुदपर भस्म लगाकर जताते हैं. 

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वहीं, दूसरी तरफ एक और कथा प्रचलित है जब भगवान शिव और माता सति को यज्ञ के लिए निमंत्रण ना मिलने पर सति ने क्रोध में आकर खुद को अग्नि के हवाले कर दिया था. उस वक्त भगवान शिव माता सति का शव लेकर धरती से लेकर आकाश तक हर जगह घूमे. विष्णु जी भगवान शिव की ये दशा देख ना पाए और माता सति के शव को छूकर उन्होंने उसे भस्म में बदल दिया. अपने हाथों में सति की जगह भस्म देखकर शिव जी और परेशान हो गए और बाद में भस्म को देखकर माता सति को याद कर वो राख उन्होंने अपने शरीर पर लगा ली.  

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वहीं, इन दोनों के अलावा एक कथा और भी प्रचलित है कि भगवान शिव कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं. यह पर्वत बहुत ठंडा है. कैलाश पर खुद को उस ठंड से बचाए रखने के लिए भगवान शिव भस्म लगाते हैं.   

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