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Budget 2018 : चुनाव, सुस्त अर्थव्यवस्था, खेती का बिगड़ा हाल और बेरोजगारी, कई उम्मीदें और चुनौतियां हैं मोदी सरकार के सामने, 10 बड़ी बातें

साल 2018-19 में देश की विकास दर यानी जीडीपी 7-7.5 फीसदी तक होने का अनुमान लगाया गया है. लेकिन कच्चे तेल की बढ़ची कीमत सरकार के लिए परेशानी की वजह बन सकती है. वहीं इस बार के बजट के बारे में चर्चा करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इस बार के बजट में कृषि क्षेत्र के लिए पहली प्राथमिकता में होगा.

Budget 2018 : चुनाव, सुस्त अर्थव्यवस्था, खेती का बिगड़ा हाल और बेरोजगारी, कई उम्मीदें और चुनौतियां हैं मोदी सरकार के सामने, 10 बड़ी बातें

Budget 2018 : आज वित्त मंत्री अरुण जेटली बजट पेश करेंगे (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: वित्त मंत्री अरुण जेटली आज 11 बजे आम बजट पेश करेंगे. यह मोदी सरकार का आखिरी पूर्णकालिक बजट होगा क्योंकि 2019 में लोकसभा चुनाव होने हैं. इस लिहाज से यह बजट काफी उम्मीदों भरा है. वहीं देश में नई कर प्रणाली सेवा एवं वस्तु कर यानी जीएसटी लागू होने के बाद भी यह पहला बजट होगा इसका असर भी इस बार साफ दिखाई देगा. आपको बता दें कि बजट सत्र का पहला भाग 29 जनवरी से शुरू होकर 9 फरवरी तक चलेगा इसके बाद दूसरा भाग 5 मार्च से शुरू होकर 6 अप्रैल तक चलेगा. इससे पहले सोमवार को सदन में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था अब ठीक हो रही है और साल 2018-19 में देश की विकास दर यानी जीडीपी 7-7.5 फीसदी तक होने का अनुमान लगाया गया है. लेकिन कच्चे तेल की बढ़ची कीमत सरकार के लिए परेशानी की वजह बन सकती है. वहीं इस बार के बजट के बारे में चर्चा करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इस बार के बजट में कृषि क्षेत्र के लिए पहली प्राथमिकता में होगा.

10 बड़ी बातें

  1. विकास दर पांच  साल के न्यूनतम स्तर पर हैं. कृषि क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की हालत खस्ता है. गुजरात के चुनाव के नतीजे भी बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार के कामकाज से लोग खुश नहीं है. माना जा रहा है कि मोदी सरकार इस बार के बजट में किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए कई ऐलान कर सकती है.  किसानों की उपज की कीमत दिलाने के लिए सरकार मंडी योजना के तहत कोई योजना ला सकती है. जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों का सहयोग शामिल हो सकता है.

  2. सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस बजट में किसानों की बदहाली और ग्रामीण इलाकों के बुनियादी ढ़ांचा में सुधार के अलावा रोज़गार के नए अवसर पैदा करने पर जोर रहेगा. सरकार 2018-19 में देश के सारे गांवों को सड़कों से जोड़ने का लक्ष्य पूरा करना चाहती है. फिलहाल ताजा आंकड़ों के मुताबिक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करीब 82 फीसदी गांवों को सड़कों से जोड़ा जा चुका है और 2019 तक देश के सारे गांवों को सड़कों से जोड़ने की तैयारी पूरी कर ली गई है. इसके लिए बजट में अलग से फंड दिए जा सकते हैं. 

  3. मनरेगा के तहत 2 लाख 36 हज़ार किमी पक्की सड़कें बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जो 2017-18 के 2 लाख 12 हज़ार किलोमीटर से 10% ज़्यादा है. यानी बजट में मनरेगा के लिए अलग से फंड आवंटित किया जा सकता है. उद्योग जगत चाहता है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ग्रामीण भारत में निजी निवेश के नए रास्ते खोलने के लिए प्रोत्साहन राशि का एलान करें जिससे ग्रामीण इलाकों में डिमांड बढ़े. 

  4. मध्य वर्ग के लोग भी सरकार से टैक्स में राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं. टैक्स के क्षेत्र में राहत के आसार भी हैं  क्योंकि सरकार प्रत्यक्ष कर सुधार की ओर कदम बढ़ाने की योजना बना रही है इसमें भी जीएसटी की तरह ही नए स्लैब बनाए जा सकते हैं. इससे माना जा रहा है कि इसमें मध्य वर्ग को कुछ छूट मिल सकती है.

  5.  वहीं अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती को दूर करने के लिए छोटी और मझोली कंपनियों में निवेश को बढ़ाने के लिए बड़ा ऐलान कर सकते हैं. 

  6.  विनिवेश से भारी-भरकम लक्ष्य जुटाने का भी लक्ष्य रखा जा सकता है.  जीएसटी लागू होने के बाद प्रत्यक्ष कर में बढ़ोत्तर नहीं हुई है. माना जा रहा है कि सरकार अगले साल के लिए राजकोषीय घाटे को तीन प्रतिशत पर रख सकती है.  लेकिन 2019 में लोकसभा चुनाव को देखते हुए खर्च भी बढ़ सकता है. ऐसे में सरकार विनिवेश के जरिये एक लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि जुटाने का लक्ष्य रख सकती है.

  7. बजट में नयी ग्रामीण योजनाएं आ सकती हैं तो मनरेगा, ग्रामीण आवास, सिंचाई परियोजनाओं व फसल बीमा जैसे मौजूदा कार्यक्रमों के लिए आवंटन में बढ़ोतरी भी देखने को मिल सकती है.

  8. हालांकि इस बजट को लेकर बड़ी अपेक्षाएं नहीं पालने की नसीहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही दे चुके हैं जबकि उन्होंने संकेत दिया था कि बजट में लोकलुभावन कदमों पर जोर नहीं होगा। उन्होंने कहा था, यह एक भ्रम है कि आम आदमी छूट चाहता है.

  9. ऐसी चर्चा है कि शेयरों में निवेश से होने वाले पूंजीगत लाभ पर कर छूट समाप्त हो सकती है.  यह भी देखना होगा कि क्या जेटली कारपोरेट कर में कमी लाने के अपने वादे को पूरा करते हैं या नहीं। जानकारों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाने के लिए प्रोत्साहनों की घोषणा हो सकती है तो उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप यानी नयी कंपनियों के लिए कुछ कदम उठाए जा सकते हैं.

  10. यह बजट ऐसे समय में पेश किया जा रहा है जबकि आने वाले महीनों में आठ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं,. इनमें से तीन प्रमुख राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकारें हैं. अगले साल आम चुनाव भी होने हैं. देखने वाली बात ये होगी वित्त अरुण जेटली के पिटारे से क्या निकलता है.