Diabetes Control Tips: उम्रदराज लोग कैसे करें ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल? एक्सपर्ट से जानें कमाल के टिप्स!

What Should Elderly Diabetics Eat?: डायबिटीज एक पुरानी स्थिति है जिसमें ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) के हेल्दी मैनेजमेंट की जरूरत होती है. बुजुर्गों में ब्लड शुगर लेवल को मैनेज (Manage Blood Sugar) करना कठिन हो सकता है. इस स्थिति से प्रभावी ढंग से कैसे निपटा जाए विशेषज्ञ से जानने के लिए यहां पढ़ें.

Diabetes Control Tips: उम्रदराज लोग कैसे करें ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल? एक्सपर्ट से जानें कमाल के टिप्स!

Diabetes: अनियंत्रित रक्त शर्करा का स्तर कई जटिलताओं को जन्म दे सकता है

खास बातें

  • अनकंट्रोल छोड़ने पर डायबिटीज शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित करता है
  • नियमित व्यायाम डायबिटीज को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
  • बुजुर्गों में ब्लड शुगर लेवल को हेल्दी बनाए रखना महत्वपूर्ण है.

How To Control Diabetes In Elderly: डायबिटीज मैनेजमेंट एक जीवन भर की प्रक्रिया है. इसमें इस पुरानी स्थिति से जुड़े दुष्प्रभावों को रोकने के लिए हेल्दी डाइट, जीवन शैली और दवा का संयोजन शामिल है. बुजुर्गों में, लंबे समय से चली आ रही डायबिटीज को प्रभावी ढंग से मैनेज करने (Manage Diabetes Effectively) के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है. साथ ही, इस उम्र में शारीरिक गतिविधियों की मात्रा कम हो जाती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) को कंट्रोल करना कठिन हो जाता है. मौजूदा स्वास्थ्य स्थितियों के अनुसार बुजुर्ग भी प्रतिबंधित आहार खाते हैं. रोगी की वर्तमान स्थिति और पूर्व स्वास्थ्य स्थितियों को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों को इंसुलिन (Insulin) और अन्य दवाओं के उपयोग के बारे में बहुत सावधान रहने की जरूरत है. यहां एक्सपर्ट से जानें कि आपको बुजुर्गों में डायबिटीज मैनेजमेंट कैसे करें? (How To Manage Diabetes) और हेल्दी ब्लड शुगर लेवल को बनाए रखने के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करने चाहिए...

बुजुर्गों में डायबिटीज मैनेजमेंट के बारे में जानें सबकुछ | Learn Everything About Diabetes Management In The Elderly

डायबिटीज के रोगियों के लिए उपचार के लक्ष्यों को अलग करने की जरूरत है. किसी ऐसे व्यक्ति के लिए जिसे दिल का दौरा पड़ा है, या बाईपास सर्जरी हुई है या उसे किडनी की समस्या हो गई है, ऐसे लोगों के लिए उपचार प्रक्रिया बदल जाती है. ACCORD नामक एक अध्ययन है जो बताता है कि जो लोग लंबे समय से मधुमेह से पीड़ित हैं, उन्हें एक हृदय रोग, किडनी की समस्या या डायबिटीज की जटिलता का आक्रामक तरीके से इलाज नहीं करना चाहिए.

डॉ. मनोज चड्ढा जो पीडी हिंदुजा अस्पताल और एमआरसी में एक सलाहकार एंडोक्रिनोलॉजिस्ट हैं, बताते हैं, "पिछले दो-तीन वर्षों में दवाओं के वर्ग के बारे में बहुत सारी दिलचस्प जानकारी मिली है, जो न केवल डायबिटीज को अच्छी तरह से नियंत्रित करती है बल्कि यह वास्तव में हृदय, और गुर्दे को और अधिक क्षति से बचाता है."

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ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए लाइफस्टाइल में करें ये बदलाव

ज्यादातर मामलों में, शारीरिक गतिविधि की मात्रा काफी कम हो जाती है. रोगी की स्थिति के आधार पर वे 30-40 मिनट के लिए चलना, फ्रीहैंड व्यायाम, एरोबिक्स, तैराकी जैसी सरल गतिविधियां कर सकते हैं, मरीज जो कुछ भी करने में सक्षम हैं उन्हें करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.

रोगियों को 6.5-7.5 घंटे की निर्बाध नींद के लिए प्रोत्साहित करने की भी सलाह दी जाती है क्योंकि यह डायबिटीज मैनेजमेंट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

भोजन के समय के संबंध में टाइम मैनेजमेंट भी एक भूमिका निभाता है. किसी को यह देखना चाहिए कि भोजन का समय काफी हद तक नियंत्रित होना चाहिए. ऐसा देखा गया है कि होम कल्चर के काम की वजह से टाइमिंग ख़राब हो गई है.

ब्लड शुगर को कितनी बार जांचना चाहिए? | How Often Should Blood Sugar Be Tested?

डॉ. चड्ढा बताते हैं, "आवृत्ति इस बात पर निर्भर करती है कि ब्लड शुगर लेवल कैसे कंट्रोल होता है. अगर रोगी का शुगर लेवल एक सप्ताह में (3-4) ब्लड टेस्ट करने पर काफी हद तक नियंत्रण होता है, लेकिन अगर ब्लड शुगर लेवल 250-400 से ऊपर है तो मैं सुझाव दूंगा कि व्यक्ति को दिन में लगभग 2-3 बार ग्लूकोज की निगरानी करनी चाहिए. हालांकि, इसे अलग-अलग किया जाना चाहिए. जैसा कि नियंत्रण में सुधार होता है तो टेस्ट करने की आवृत्ति भी कम हो जाती है, लेकिन जब तक हमें कुछ अच्छे रिजल्ट नहीं मिल जाते हैं तब तक ब्लड शुगर लेवल को मापना जरूरी है. आपको नियमित रूप से टेस्ट करने की जरूरत होती है. चाहे वह हर दिन, वैकल्पिक या सप्ताह में दो बार हो. यह रोगी को विश्वास दिलाता है कि चीजें कैसे सुधार रही हैं."

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एक मरीज के लिए डॉक्टर के साथ नियमित रूप से अपडेट रहना कितना महत्वपूर्ण है?

डॉ. चड्ढा बताते हैं कि लगातार ब्लड टेस्ट करने का विचार यह महसूस करना है कि आखिर हो क्या रहा है. यह पहचानने की कोशिश करें कि आप कहां गलत हैं? आप जो सही काम कर रहे हैं, वह क्या है? शरीर को क्या पसंद है? और फिर किसी को उस पर कार्रवाई करने की जरूरत है. अगर कोई व्यक्ति जानता है कि क्या करना है, तो यह शानदार है, अन्यथा एक डॉक्टर से परामर्श लेनी की जरूरत होगी.

विशेषज्ञों के रूप में, हम अपने रोगियों को सशक्त बनाने की कोशिश करते हैं ताकि उन्हें हर हफ्ते डॉक्टर से मिलने की जरूरत न पड़े, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे उस जानकारी का उपयोग कैसे करते हैं. हमेशा विशेषज्ञों की सलाह लें, अगर आप नियंत्रण में हैं और आप न्यूनतम दवा पर हैं, तो आप छह महीने में एक बार डॉक्टर को भी दिखा सकते हैं. हालांकि, यह डॉक्टर और मरीज के बीच फिर से वैयक्तिकृत किया जाता है कि फॉलोअप कितनी बार किया जाना चाहिए, "वह बताते हैं.


(डॉ. मनोज चड्ढा पी. डी. हिंदुजा अस्पताल और एमआरसी में सलाहकार एंडोक्रिनोलॉजिस्ट हैं)

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अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.