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दबे पांव आ रहा है स्वाइन फ्लू, राजस्थान में सबसे ज्यादा मरीज, इन बातों का रखें ध्यान

Swine flu: आईडीएसपी के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल 14,992 लोग स्वाइन फ्लू के वायरस के शिकार हुए और इनमें से 1,103 की मौत हो गई.

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दबे पांव आ रहा है स्वाइन फ्लू, राजस्थान में सबसे ज्यादा मरीज, इन बातों का रखें ध्यान

Swine flu in Rajasthan: राजस्थान में मरीजों की तादाद 1233 है और मरने वालों का आंकड़ा 49 तक पहुंच चुका है.

खास बातें

  1. दिल्ली में 20 जनवरी तक इसके कुल 229 मामले दर्ज किए गए.
  2. आईडीएसपी के अनुसार पिछले साल 14,992 लोग स्वाइन फ्लू के शिकार हुए
  3. इस साल भी यह बीमारी दबे पांव चली आ रही है
Jaipur:

पिछले कुछ बरसों से स्वाइन फ्लू की दस्तक स्वास्थ्य सेवाओं को चौकन्ना कर देती है. पिछले दो बरस में तीन हजार से ज्यादा लोगों की जान लेने वाली यह खतरनाक बीमारी इस साल भी दबे पांव चली आ रही है और जनवरी के पहले तीन हफ्ते में देशभर में इसके 2777 मामले सामने आए हैं और कुल 85 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें अकेले राजस्थान (Swine Flu In Rajasthan) में मरीजों की तादाद 1233 है और मरने वालों का आंकड़ा 49 तक पहुंच चुका है. 

स्वाइन फ्लू ( Swine Flu 2019 ) का प्रकोप राजधानी दिल्ली सहित देश के तमाम हिस्सों में बढ़ रहा है. दिल्ली में 20 जनवरी तक इसके कुल 229 मामले दर्ज किए गए. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के समेकित रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में इसके मरीजों और मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है, जबकि उसके बाद पंजाब का स्थान है, जहां 90 लोग इसकी चपेट में आए और नौ की मौत हो गई. रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना में भी बीमारी की आमद दर्ज की गई है. 

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स्वाइन फ्लू से बचने के लिए क्या-क्या बरतें सावधानी- 


 

  1. सूअरों के श्वसन तंत्र से निकले वायरस के कारण होने वाली यह बीमारी बेहद संक्रामक है. हालांकि सामान्य अवस्था में यह बीमारी सूअरों से मनुष्यों में नहीं फैलती, लेकिन सूअर पालने वाले और उनके साथ काम करने वाले मनुष्यों में इसके संक्रमण की आशंका रहती है. 
  2. इसके अलावा मांसाहार करने वाले लोग अगर संक्रामक मांस को अच्छी तरह पकाए बिना उसका सेवन कर लें तो उनमें बीमारी होने का जोखिम बढ़ जाता है और दूसरों में भी इसके संक्रमण का खतरा रहता है. 
  3. श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के रेस्परेटरी मेडिसिन में सीनियर कंसल्टेंट डाक्टर ज्ञानदीप मंगल का कहना है कि इस घातक बीमारी पर नियंत्रण करना बहुत जरूरी है, अन्यथा यह एक राष्ट्रीय बोझ बन सकती है. वह बीमारी के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करने के साथ ही इसकी चपेट में आने वालों के उचित उपचार और उसके आसपास के लोगों को इसके संक्रमण में आने से बचने के लिए पर्याप्त उपाय करने की हिदायत देते हैं. 
  4. छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, डायबिटीज और दिल की बीमारी से मरीजों के इस बीमारी की चपेट में आने की आशंका अधिक होती है क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली सामान्य लोगों की तुलना में कमजोर होती है.
  5. वह सलाह देते हैं कि बीमारी की पहचान कर तत्काल इसका उपचार शुरू करना चाहिए अन्यथा मरीज की मृत्यु भी हो सकती है. नारायणा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल गुरुग्राम के सीनियर आहार विशेषज्ञ परमीत कौर के अनुसार उचित आहार शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और स्वाइन फ्लू होने की स्थिति में भी सफाई और उपचार के साथ ही आहार पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए. 
  6. एच1एन1 वायरस की चपेट में आने वाले मरीजों के उपचार के लिए तमाम जरूरी एहतियात बरते जाते हैं.
  7. बीमारी से संक्रमित लोगों के उपचार के लिए लगभग हर अस्पताल में एक अलग स्वाइन फ्लू वार्ड की व्यवस्था की जाती है ताकि अस्पताल के अन्य मरीजों और स्टाफ को इस बीमारी के संक्रमण से बचाया जा सके. 
  8. धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशिलिटी अस्पताल के डाक्टर गौरव जैन बताते है कि स्वाइन फ्लू के लक्षण महसूस होने पर तत्काल टेस्ट कराना चाहिए और यदि टेस्ट रिपोर्ट पॉजीटिव आए तो देर किए बिना इलाज किया जाता है. 
  9. ऐसे में एंटीवायरल दवा देने से मरीज़ को तत्काल राहत मिलती है तथा कुछ समय के लिए बीमारी की तीव्रता कम हो जाती है. 

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आईडीएसपी के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल 14,992 लोग स्वाइन फ्लू के वायरस के शिकार हुए और इनमें से 1,103 की मौत हो गई. उससे पिछले बरस इसका प्रकोप ज्यादा रहा और कुल 38,811 मरीजों में 2,270 को बचाया नहीं जा सका. इस साल भी यह बीमारी दबे पांव चली आ रही है और स्वास्थ्य एजेंसियां इसपर नियंत्रण के तमाम उपाय कर रही हैं.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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