हिमाचल चुनाव : विक्रमादित्य के लिए वीरभद्र की राजनीतिक विरासत बचाने की राह नहीं आसान

कांग्रेस के पारंपरिक शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे सीएम वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य का बीजेपी के प्रमोद शर्मा से कड़ा मुकाबला

हिमाचल चुनाव : विक्रमादित्य के लिए वीरभद्र की राजनीतिक विरासत बचाने की राह नहीं आसान

हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं.

खास बातें

  • वीरभद्र सिंह के राजनीतिक उत्तराधिकारी हैं उनके बेटे विक्रमादित्य
  • साल 2011 में पहली बार हिमाचल युवा कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था
  • साल 2012 के विधानसभा चुनाव में पिता के लिए चुनाव अभियान चलाया था

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के दिग्गज नेता और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह के सामने पिता की राजनीतिक विरासत संभालने की चुनौती है. वीरभद्र ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है. विक्रमादित्य पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं.

विक्रमादित्य शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं और उनका बीजेपी के प्रमोद शर्मा से कड़ा मुकाबला है. प्रमोद शर्मा के राजनीतिक मार्गदर्शक वीरभद्र सिंह स्वयं रहे हैं. अब शर्मा से जीतना वीरभद्र के बेटे के लिए बहुत आसान नहीं है. शिमला ग्रामीण क्षेत्र में 68,326 मतदाता हैं. साल 2012 के चुनाव में यहां 40423 वोट डाले गए थे जिसमें से वीरभद्र को 28892 और उनके प्रतिद्वंदी ईश्वर रोहाल को 8892 वोट मिले थे. वीरभद्र ने चुनाव बड़े अंतर के साथ जीता था. उन्होंने अपनी यह सीट सुरक्षित मानकर अपने बेटे को सौंप दी है लेकिन अब मुकाबला पिछले चुनाव जैसा आसान दिखाई नहीं दे रहा है. अपना राजनीतिक करियर शुरू करने के लिए विक्रमादित्य को  इस सीट पर जीतना जरूरी है. वे इसके लिए पूरा जोर लगा रहे हैं लेकिन प्रतिद्वंदी बीजेपी प्रत्याशी भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे.   

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सन 1989 में जन्मे विक्रमादित्य सिंह ने शिमला के बिशप कॉटन स्कूल और फिर 2007 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज से बीए ऑनर्स किया. इसके अलावा उन्होंने सेंट स्टीफेंस कॉलेज से लॉ की भी शिक्षा ली है. विक्रमादित्य ने हिमाचल प्रदेश की ओर से शूटिंग स्पर्धा में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व किया है. साल 2007 में ट्रैप शूटिंग में वे कांस्य पदक जीते थे. वे हिमाचल प्रदेश स्पोर्ट्स, कल्चर एंड इनवायरांमेंट एसोसिएशन नामक एनजीओ भी चलाते हैं. इसके तहत वे खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करते रहते हैं.  

उन्होंने साल 2011 में 22 वर्ष की उम्र में पहली बार हिमाचल युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था और जीते भी थे. हालांकि विक्रमादित्य पर आचार संहिता का उल्लंघन करने का मामला बनने पर यह चुनाव रद्द कर दिया गया था. इसके बाद वर्ष 2013 में उन्होंने फिर चुनाव लड़ा और जीते. साल 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्हें पिता के लिए चुनाव अभियान चलाने का जिम्मा सौंपा गया. माना जाता है कि मौजूदा चुनाव में विक्रमादित्य को शिमला ग्रामीण क्षेत्र से खड़ा करना पूर्व नियोजित था. कांग्रेस की इस सुरक्षित पारंपरिक सीट पर उनके पदार्पण के लिए करीब दो साल से काम भी चल रहा था. विक्रमादित्य खुद इस क्षेत्र में सक्रिय नजर आते रहे हैं.

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शिमला ग्रामीण वीरभद्र सिंह की खानदानी सीट कही जाती है. 83 वर्षीय वीरभद्र को इस इलाके में राजा साहब कहा जाता है. 28 साल के विक्रमादित्य सिंह अपने नाम के साथ अपने वंश की रियासत का नाम 'बुशहर' भी जोड़ते हैं. वे बुशेहरी टोपी भी पहनते हैं. उनके इलाके में इस राजवंश के प्रति सम्मान है. सवाल यह है कि यह सम्मान हमेशा की तरह वोटों में तब्दील होकर सामने आएगा या लोकतांत्रिक व्यवस्था अब राजशाही को नकार देगी? इसका जवाब भविष्य देगा जब चुनाव परिणाम सामने आएंगे.