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1984 सिख विरोधी दंगे: सज्जन कुमार को SC से राहत नहीं, फिलहाल जेल में ही रहना होगा

कोर्ट ने जेल में बंद सज्जन कुमार की मेडिकल जांच के लिए एम्स के निदेशक को डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड बनाने को कहा है. साथ ही कहा है कि चार हफ्ते में बोर्ड रिपोर्ट दाखिल करे.

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1984 सिख विरोधी दंगे: सज्जन कुमार को SC से राहत नहीं, फिलहाल जेल में ही रहना होगा

पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार.

खास बातें

  1. सज्जन कुमार ने लगाई थी जमानत याचिका
  2. कोर्ट ने एम्स से कहा बनाएं मेडिकल बोर्ड
  3. वकील बोले- कम हो रहा है सज्जन कुमार का वजन
नई दिल्ली:

1984 सिख विरोधी दंगों के मामले में पूर्व कांग्रेसी नेता सज्जन कुमार को कोई राहत नहीं मिली है. अभी कुमार को जेल में रहना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सज्जन कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई की. कोर्ट ने जेल में बंद सज्जन कुमार की मेडिकल जांच के लिए एम्स के निदेशक को डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड बनाने को कहा है. साथ ही कहा है कि चार हफ्ते में बोर्ड रिपोर्ट दाखिल करे.

सुनवाई के दौरान सज्जन कुमार की ओर से कहा गया जेल में उनका वजन 8-9 किलो घट गया है. लेकिन जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि वजन घटने का मतलब ये नहीं है कि कोई बीमारी हो.

सज्जन कुमार ने अपने स्वास्थ्य का हवाला देकर जमानत मांगी थी. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका पर सुनवाई जून 2020 के लिए सूचीबद्ध की थी. जिसमें सज्जन कुमार ने जल्द सुनवाई की अर्जी लगाई थी. 1984 के सिख विरोधी दंगों के दिल्ली कैंट मामले में सज्जन कुमार उम्रकैद की सजा काट रहे हैं.

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बता दें, प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली एक पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफाड़े के उस कथन का संज्ञान लिया जिसमें उन्होंने कहा था कि कुमार की जमानत याचिका पर तत्काल सुनवाई की जानी चाहिए. कुमार के वकील ने जमानत की अर्जी सुनवाई के लिए शीघ्र सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था तो पीठ ने कहा ‘हम इस पर गौर करेंगे'

सज्जन कुमार ने सिख विरोधी दंगों से संबंधित मामले में उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाने के उच्च न्यायालय के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दे रखी है. कांग्रेस के पूर्व नेता ने न्यायालय से अनुरोध किया है कि उनकी अपील लंबित रहने के दौरान उन्हें जमानत दी जाये. उच्च न्यायालय से दोषी ठहराए जाने के बाद कुमार (73) ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था.

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कुमार को 1984 में एक-दो नवंबर को दक्षिण पश्चिम दिल्ली के राज नगर एक में सिख समुदाय के पांच लोगों की हत्या और राजनगर दो में एक गुरुद्वारे को जलाए जाने के मामले में दोषी ठहराया गया था.

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