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पॉलिटिक्स के लिए क्यों IAS-IPS को लुभा रही बीजेपी, ओपी चौधरी से पहले ये भी थाम चुके हैं दामन

तो चलिए एक नजर डालते हैं उन लोगों पर जो बीजेपी से पहले प्रशासनिक अधिकारी रहे और अब बीजेपी में अलग-अलग ओहदों पर काबिज हैं. 

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पॉलिटिक्स के लिए क्यों IAS-IPS को लुभा रही बीजेपी, ओपी चौधरी से पहले ये भी थाम चुके हैं दामन

पूर्व आईएएस अधिकारी ओम प्रकाश चौधरी बीजेपी में हुए शामिल

खास बातें

  1. ओपी चौधरी हुए बीजेपी में शामिल.
  2. नौकरशाहों के लिए बीजेपी पहली पसंद बनती जा रही है.
  3. ओपी चौधरी विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं.
नई दिल्ली: अभी 2019 लोकसभा चुनाव होने में तकरीबन 8-9 महीने बचे हैं, बावजूद इसके सभी राजनैतिक दलों में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. भारतीय जनता पार्टी हो या मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, सभी आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कमर कस चुकी है और रणनीतियों को लेकर उनमें मत्था-पच्ची जारी है. मोदी सरकार और भारतीय जनता पार्टी 2019 लोकसभा चुनाव और चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से दमखम दिखाने की तैयारी में जुट गई है. भाजपा एक बार फिर से पीएम मोदी के चेहरे के सहारे चुनावी वैतरणी पार करना चाहती. वहीं, कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर बीजेपी की नैया को मझधार में फंसा देना चाहती है. मगर अभी भी कुछ आईएस अथवा आईपीएस की पहली पसंद भारतीय जनता पार्टी ही है. हाल ही में छत्तीसगढ़ में रायपुर के कलेक्टर ओपी चौधरी ने अपना इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थामा है. वहीं, उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक (होमगार्डस) सूर्य कुमार शुक्ला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर अपनी शीघ्र होने वाली सेवानिवृत्ति के बाद भाजपा के लिये आगामी लोकसभा चुनाव में प्रचार-प्रसार करने की ख्वाहिश जाहिर की है. इनसे यह स्पष्ट हो गया है कि आम आदमी भले ही यह कायास लगाने में सफल नहीं हो कि बीजेपी के साथ जाना फायदे का सौदा है या नहीं, मगर प्रशासनिक अधिकारियों को फायदा का विश्वास जरूर है. 

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दरअसल, सिर्फ हाल की ही ये दो घटनाएं इस बात की तस्दीक नहीं करती कि आईएएस अथवा आईपीएस अधिकारियों की पहली पसंद भारतयी जनता पार्टी है. बल्कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भी पूर्व आईएएस-आईपीएस अधिकारियों की एक लंबी फेहरिस्त है, जो बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़े हैं और आज भारतीय जनता पार्टी या मोदी सरकार में अहम ओहदे पर हैं. फिलहाल, रायपुर के पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी ने बीजेपी का दामन औपचारिक रूप से थाम लिया है और उम्मीद है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में खरसिया से चुनाव लड़ सकते हैं. यह सीट रायगढ़ जिले में कांग्रेस का गढ़ है और चौधरी का पैतृक नगर भी. तो चलिए एक नजर डालते हैं उन लोगों पर जो बीजेपी से पहले प्रशासनिक अधिकारी रहे और अब बीजेपी में अलग-अलग ओहदों पर काबिज हैं. 

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रायपुर के पूर्व कलेक्टर ओपी चौधरी: रायपुर जिला कलेक्टर ओ पी चौधरी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और वह औरचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गये हैं. ओपी चौधरी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 2005 बैच के अधिकारी हैं. उन्होंने अपना इस्तीफा कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को सौंपा. इसके बाद उन्होंने फेसबुक पोस्ट के जरिये अपनी इस्तीफे की बात कुबूल की थी. रायपुर के पूर्व कलेक्टर ओमप्रकाश चौधरी ने मंगलवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह की मौजूदगी में 'कमल' थाम लिया. अब उम्मीद है कि वह छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में खरसिया से चुनाव लड़ सकते हैं. 

अपर पुलिस महानिदेशक (होमगार्डस) सूर्य कुमार शुक्ला: उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक (होमगार्डस) सूर्य कुमार शुक्ला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर अपनी शीघ्र होने वाली सेवानिवृत्ति के बाद भाजपा के लिये आगामी लोकसभा चुनाव में प्रचार-प्रसार करने की ख्वाहिश जाहिर की है और ‘सक्रिय सहयोग‘ में मदद के वास्ते राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष अथवा तीन अन्य संस्थाओं में से किसी एक का अध्यक्ष बनाने की गुजारिश की है. इससे यह स्पष्ट संदेश जा रहा है कि वह भी आने वाले दिनों में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं. सूर्य कुमार शुक्ला 31 अगस्त को सेवानिवृत होने वाले हैं. अब देखना होगा कि उसके बाद वह क्या कदम उठाते हैं. हालांकि, उनकी सोच बीजेपी से मिलती रही है, क्योंकि इससे पहले भी उन्होंने राम मंदिर बनावाने की शपथ ली थी, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया था. 

किरण बेदी: किरण बेदी भारतीय जनता पार्टी की नेता और पुडुचेरी की उपराज्यपाल हैं. किरण बेदी बीजेपी में शामिल होने से पहले भारतीय पुलिस सेवा की सेवानिवृत्त अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, भूतपूर्व टेनिस खिलाड़ी रह चुकी हैं. सन 1972 में भारतीय पुलिस सेवा में सम्मिलित होने वाली किरण बेदी को प्रथम महिला अधिकारी रहने की उपलब्धि हासिल है.  35 वर्ष तक सेवा में रहने के बाद सन 2007 में उन्होने स्वैच्छिक सेवानिवृति ले ली थी. उसके बाद वह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ 2010-11 में मिलकर इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी. 2011 में अन्ना आंदोलन में भी उनकी भूमिका काफी सक्रिय थी. 2015 में दिल्ली विधानसभा में बीजेपी ने किरण बेदी को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाया, मगर बीजेपी दिल्ली की सत्ता में नहीं आ सकी. 

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हरदीप सिंह पुरी: मोदी सरकार में अभी हरदीप सिंह पुरी केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के राज्यमंत्री हैं. हरदीप सिंह पुरी भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं, जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति का माहिर माना जाता है और तकरीबन 40 साल के अपने राजनयिक जीवन के दौरान वह कई देशों में भारत के राजदूत के तौर पर अपनी सेवाएं देने के अलावा संयुक्त राष्ट्र में अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. 15 फरवरी 1952 को दिल्ली में जन्मे हरदीप भारतीय विदेश सेवा के 1974 बैच के अधिकारी हैं और 2014 में राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति भारतीय जनता पार्टी के रूख से प्रभावित होकर उन्होंने भगवा पार्टी में शामिल होने का फैसला किया. वह उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं. यूनाइटेड नेशंस सिक्युरिटी काउंसिल की काउंटर टेररिज्म कमेटी के चेयरमैन भी रह चुके हैं. 2009 से 2013 के बीच यूएन में इंडिया के पर्मानेंट रिप्रेजेंटेटिव भी रहे हैं. 

आरके सिंह : आरा से लोकसभा सांसद और मोदी सरकार में मंत्री राज कुमार सिंह भी आईएएस रह चुके हैं. वह देश के गृह सचिव भी रह चुके हैं. 20 दिसंबर 1952 को पैदा हुए राजकुमार सिंह 1975 बैच के बिहार कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी हैं. वह 2014 में बीजेपी के टिकट पर आरा संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित हुए और 16वीं लोकसभा के सदस्य बने. इसके बाद वह विशेषाधिकार समिति, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, कार्मिक, पेंशन और लोक शिकायत, कानून आदि की स्थायी संसदीय समितियों के सदस्य रहे. कहा जाता है कि इन्होंने ही 1990 में समस्तीपुर (बिहार) में लाल कृष्ण आडवाणी को लालू यादव के आदेश पर अरेस्ट किया था. आरके सिंह दिसंबर 2013 में बीजेपी में शामिल हुए थे और आज मोदी सरकार में राज्यमंत्री हैं. 

केजे अल्फोंन्स : केजे अल्फोंस केरल में भारतीय जनता पार्टी का अहम चेहरा माने जाते हैं. वह, 1979 बैच के यूपीएससी टॉपरों में रहे अल्फोंस 1990 के दशक में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की जमीन पर अतिक्रमण हटाने के लिए किए गए कार्यों के लिए जाने जाते हैं. वर्ष 2011 में उन्होंने आईएएस पद छोड़ कर बीजेपी में शामिल हो गए थे. फिलहाल, वह केंद्र में इलेक्ट्रोनिक एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के राज्य मंत्री हैं. अल्फोंस दिल्ली में 'डेमोलिशन मैन' के तौर पर मशहूर रहे हैं. 2011 में बीजेपी में शामिल होकर उन्होंने भी सबको चौंका दिया था. 

सत्यपाल सिंह: मुंबई के पुलिस कमिश्नर रह चुके सत्यपाल सिंह बीजेपी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अहम चेहरों में से एक माने जाते हैं. 1980 बैच के आईपीएस ऑफिसर सत्यपाल सिंह ने बागपत से लोकसभा चुनाव लड़ अजीत सिंह के किले को भेदा था. सत्यपाल सिंह जाट कम्युनिटी से आते हैं. संजीव बालियान के बाद वेस्ट यूपी में बीजेपी का प्रमुख चेहरा हैं. महाराष्ट्र कैडर में 1980 बैच के आईपीएस अफसर रहे. राजनीति में आने से पहले मुंबई पुलिस कमिश्नर थे. इस दौरान 1990 के दशक में मुंबई अंडरवर्ल्ड की कमर तोड़ने में अहम भूमिका निभाई थी. 2014 लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हुए थे. फिलहाल वह मोदी सरकार में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री हैं. 

टिप्पणियां
इस तरह से देखा जाए तो कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की पहली पसंद भारतीय जनता पार्टी रही है. जिस तरह से ओपी चौधरी ने बीजेपी का दामन थामा है और सूर्य कुमार शुक्ला जिस तरह से अप्रोच कर रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि बीजेपी को एक और अधिकारी मिलने वाला है. अगर इन अधिकारियों की बीजेपी में दिलचस्पी को संकेत के तौर पर देखें, तो यह समझने में आसानी होगी कि कहीं न कहीं, आगामी चुनावों में बीजेपी का पलड़ा भारी रहने वाला है. 

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