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आतंकी कसाब को फांसी से बचाने के लिए केस लड़ने वाले वकीलों को नहीं मिली फूटी कौड़ी, बोले- लेंगे लीगल एक्शन

बंबई उच्च न्यायालय के निर्देश पर वर्ष 2008 के मुंबई हमले में आतंकी अजमल कसाब का बचाव करने वाले दो वकीलों को महाराष्ट्र सरकार से अब तक फूटी कौड़ी नहीं मिली है.

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आतंकी कसाब को फांसी से बचाने के लिए केस लड़ने वाले वकीलों को नहीं मिली फूटी कौड़ी, बोले- लेंगे लीगल एक्शन

मुंबई में वर्ष 2008 में हमले को अंजाम देने वाले आतंकी कसाब की फाइल फोटो.

खास बातें

  1. आतंकी कसाब के लिए बंबई हाई कोर्ट के आदेश पर नियुक्त हुए थे वकील
  2. आतंकी कसाब की फांसी की सजा के 7 साल बाद भी नहीं मिली फीस
  3. वकील बोले- अब राज्य सरकार के खिलाफ वह लीगल एक्शन की तैयारी कर रहे
नई दिल्ली:

बंबई उच्च न्यायालय के निर्देश पर वर्ष 2008 के मुंबई हमले में आतंकी अजमल कसाब का बचाव करने वाले दो वकीलों को महाराष्ट्र सरकार से अब तक फूटी कौड़ी नहीं मिली है.हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि उन्होंने कोई बिल जमा नहीं किए हैं. वकीलों का कहना है कि राज्य अभियोजकों को ऐसा करना ही नहीं था.बम्बई उच्च न्यायालय के तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जे एन पटेल के आदेश पर दो वकीलों अमीन सोलकर और फरहाना शाह को आतंकी कसाब का बचाव करने के लिए महाराष्ट्र राज्य कानूनी सेवा विभाग ने नियुक्त किया था. मुम्बई में हुए आतंकवादी हमले में 166 लोग मारे गये थे और इस हमले के लिए दोषी ठहराये गये कसाब को 21 नवम्बर,2012 को फांसी पर लटका दिया गया था.   आठ जून,2010 को वकीलों की नियुक्ति संबंधी एक अधिसूचना जारी की गई थी.अधिसूचना के अनुसार, सोलकर को लोक अभियोजक के लिए स्वीकृत पारिश्रमिक मिलना था और शाह को सहायक अभियोजक के बराबर फीस मिलनी थी.सोलकर और शाह ने बम्बई उच्च न्यायालय में मौत की सजा के खिलाफ लगभग नौ महीने तक कसाब के लिए दिन प्रतिदिन के आधार पर बहस की थी.इसके एक साल बाद उच्चतम न्यायालय में उसकी सजा को बरकरार रखा गया था और 2012 में उसे पुणे की यरवदा जेल में फांसी पर लटका दिया गया था.    

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सोलकर और शाह ने बताया कि उन्हें अभी अपनी फीस प्राप्त नहीं हुई है.    दोनों वकीलों ने कहा कि उन्होंने मामले को प्राथमिकता दी थी क्योंकि उच्च न्यायालय इसकी दिन-प्रतिदिन के आधार पर सुबह 11 से शाम पांच बजे तक सुनवाई कर रहा था।.सोलकर ने ‘पीटीआई्-भाषा' से कहा,‘‘मैं नहीं जानता हूं कि राज्य सरकार ने हमारी फीस का भुगतान करने के लिए कोई प्रयास क्यों नहीं किये. उच्च न्यायायल द्वारा फैसला दिए सात वर्ष हो गये है. उच्चतम न्यायालय ने मौत की सजा की पुष्टि की थी और कसाब भी मर चुका है। लेकिन हम अभी भी (अपनी फीस के लिए) इंतजार कर रहे है.''    

उन्होंने कहा कि वह राज्य सरकार से अपनी फीस प्राप्त करने के लिए कानूनी कार्रवाई किये जाने पर विचार कर रहे है.वहीं दूसरी ओर शाह ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मामले में पेश होने के लिए उन्हें उनका पारिश्रमिक मिलेगा.इस बीच राज्य सरकार के विधि और न्यायपालिका विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार दो वकीलों द्वारा अपने बिल जमा कराने के बाद ही उनकी फीस का भुगतान करेगी.निचली अदालत में कसाब का बचाव करने वाले एक वकील अब्बास काजमी ने दावा किया कि सरकार ने उनकी सेवाओं के लिए उनकी फीस का भुगतान कर दिया है.गौरतलब है कि 26 नवम्बर,2008 की रात को मुम्बई के कई महत्वपूर्ण स्थानों पर हुए 10 पाकिस्तानी आतंकवादियों ने हमले किये थे. हमले में 166 लोग मारे गये थे और 600 से अधिक घायल हुए थे.ये हमले तीन दिन तक चले थे. नौ आतंकवादी मारे गये थे जबकि मुम्बई पुलिस ने कसाब को जिंदा पकड़ लिया था.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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