लोकसभा में 'डिफेंसिव मोड' में सरकार, कृषि मंत्री बोले- कांग्रेस के दांत खाने के और, दिखाने के और

मोदी सरकार की ओर से लाए गए तीन किसान विधेयकों ने संसद में घमासान मचा रखा है. इनमें से दो बिल संसद के दोनों सदनों में पास किए जा चुके हैं.

लोकसभा में 'डिफेंसिव मोड' में सरकार, कृषि मंत्री बोले- कांग्रेस के दांत खाने के और, दिखाने के और

MSP और किसान विधेयकों को लेकर कृषि मंत्री ने दिया बयान. (फाइल फोटो)

खास बातें

  • लोकसभा में MSP और कृषि विधेयक का मुद्दा
  • कृषि मंत्री का कांग्रेस पर हमला
  • बोले- कांग्रेस स्वामीनाथन रिपोर्ट दबाकर बैठी थी
नई दिल्ली:

मोदी सरकार की ओर से लाए गए तीन किसान विधेयकों (Farm Bills) ने संसद में घमासान मचा रखा है. इनमें से दो बिल संसद के दोनों सदनों में पास किए जा चुके हैं. पहले दो बिलों पर कई विपक्षी पार्टियों का जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन झेल रही सरकार लोकसभा में विपक्ष के हो-हल्ले के बीच कांग्रेस पर हमला करते और अपना बचाव करते नजर आई.

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एमएसपी (Minimum Support Price) बढ़ाने के सरकार के फैसले पर कहा कि 'हमने कल बुआई से पहले ही रबी की एमएसपी घोषित कर दी. कांग्रेस के दांत खाने के और दिखाने के और हैं. कांग्रेस 10 साल शासन में रही. स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया. मोदी सरकार ने इसे लागू किया. तब से लगातार एमएसपी बढ़ती जा रही है. सात लाख करोड़ रुपए हमने छह सालों में दिया है.'

हालांकि, विपक्ष इस मुद्दे पर बिल्कुल उखड़ा हुआ है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कृषि मंत्री पर हमला करते हुए कहा कि 'उन्होंने सफेद झूठ का सहारा लेकर लोगों को गुमराह किया है. हम राज्यसभा के सांसदों के साथ खड़े हैं. मैं सारे विपक्षी दलों के साथ सदन का बहिष्कार करता हूं.' उन्होंने एमएसपी पर कृषि मंत्री के बयान पर कहा कि 'रबी फ़सलों पर एमएसपी में बढ़ोत्तरी हाथी के पेट में इलायची का दाना है. आपने एमएसपी को कानून में क्यों नहीं रखा?'

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बता दें कि सोमवार को केंद्र सरकार ने रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित कर दिया है. सरकार की तरफ से समय से पहले ही इसकी घोषणा की गयी है कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने लोकसभा में कहा कि 'न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), कृषि उत्पाद बाजार समिति (एपीएमसी) की व्यवस्था बनी रहेगी, सरकारी खरीद होती रहेगी और इसके साथ किसान जहां चाहें अपने उत्पाद बेच सकेंगे.'

अधीर रंजन ने राज्यसभा में आठ सांसदों के निलंबन का मुद्दा लोकसभा में भी उठाया था, जिसके बाद बीजेपी सांसद प्रह्लाद जोशी के आपत्ति जताने पर स्पीकर ने कहा कि दूसरे सदन की चर्चा दूसरे में नहीं होगी. बिल के विरोध में कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने वॉकआउट किया. इस बार लोकसभा में वॉकआउट करने वाली पार्टियों में बहुजन समाज पार्टी और तेलंगाना राष्ट्र समिति भी शामिल थीं.

बता दें कि कृषि संबंधी दो विधेयकों को रविवार को राज्यसभा में मंजूरी मिल चुकी है. इस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हस्ताक्षर होने के साथ ही यह कानून का रूप ले लेगा. जिन विधेयकों को मंजूरी मिली है उसमें कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 शामिल हैं.

Video: देश-प्रदेश: कृषि बिल के विरोध में संसद के घेराव का ऐलान


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