अयोध्या विवाद को बातचीत से सुलझाने के लिए मध्यस्थता की कोशिश फिर शुरू, मीटिंग हुई

सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और निर्वाणी अखाड़े ने मध्यस्थता करने वाली पुरानी कमेटी से इसे दुबारा शुरू करने का अनुरोध किया

अयोध्या विवाद को बातचीत से सुलझाने के लिए मध्यस्थता की कोशिश फिर शुरू, मीटिंग हुई

अयोध्या विवाद के समाधान के लिए मध्यस्थता की कोशिशें शुक्रवार को एक मीटिंग के साथ शुरू हों गईं.

खास बातें

  • सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई 18 अक्टूबर को खत्म हो जाएगी
  • मध्यस्थता सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले तक चल सकती है
  • मुसलमानों के बीच जनमत तैयार करने के लिए कोशिशें शुरू
लखनऊ:

अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को बातचीत से हल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मध्यस्थता के लिए पहली मीटिंग आज शुरू हो गई. सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और निर्वाणी अखाड़े ने मध्यस्थता करने वाली पुरानी कमेटी से इसे दुबारा शुरू करने का अनुरोध किया था. यही नहीं देश के तमाम मुस्लिम समाजसेवी और बुद्धिजीवी ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को एक ज्ञापन देने की तैयारी कर रहे हैं. उसमें उनसे मांग की जाएगी कि वे इस पर लचीला रुख अपनाकर मसले को सुलह से निपटाने में मदद करें.

इस मसले पर मुसलमानों के बीच जनमत तैयार करने के लिए कई मुस्लिम समाजसेवी और बुद्धिजीवी कोशिशें कर रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई 18 अक्टूबर को खत्म हो जाएगी, लेकिन मध्यस्थता उसके बाद और सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले तक चल सकती है. 12 अक्टूबर को लखनऊ में अयोध्या मसले पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की एक्जीक्युटिव कमेटी की मीटिंग है. मुस्लिम बुद्धिजीवी इसके पहले 10 अक्टूबर को अयोध्या मसले पर सुलह के लिए लखनऊ में ही एक सम्मेलन करेंगे.

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सम्मेलन के बाद मुस्लिम बुद्धिजीवियों का एक डेलिगेशन पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष से मिलकर उन्हें एक ज्ञापन देगा. इसमें यह मांग की जाएगी की बोर्ड लचीला रुख अपनाए और सुलह  के जरिए विवादित ज़मीन पर दावा छोड़ दे ताकि यह मसला शांति से हाल हो जाए.

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इस कोशिश में लगे समाजसेवी अतर हुसैन कहते हैं कि अदालत से हार हो या जीत दोनों ही सूरतों में हिंसा के अंदेशे हैं. इसलिए इसका सबसे बेहतर हल सुलह से ही निकल सकता है.

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