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भूपेन हजारिका को भारत रत्न देने की टाइमिंग पर बेटे ने उठाए सवाल, बोले- नागरिकता संशोधन बिल पिता की भावना के खिलाफ

दिग्गज संगीतकार भूपेन हजारिका के बेटे ने सोमवार को नागरिक संशोधन बिल 2016 को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है और अपने पिता को भारत रत्न सम्मान दिए जाने की टाइमिंग पर भी सवाल उठाया है.

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भूपेन हजारिका को भारत रत्न देने की टाइमिंग पर बेटे ने उठाए सवाल, बोले- नागरिकता संशोधन बिल पिता की भावना के खिलाफ

भूपेन हजारिका (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

मशहूर गायक और संगीतकार भूपेन हजारिका  (Bhupen Hazarika) को भारत रत्न दिए जाने पर अब विवाद खड़ा होता दिख रहा है. दिग्गज संगीतकार भूपेन हजारिका के बेटे ने सोमवार को नागरिक संशोधन बिल 2016 को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है और अपने पिता को भारत रत्न सम्मान दिए जाने की टाइमिंग पर भी सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह फैसला बस लोकप्रियता का फायदा उठाने का सस्ता तरीका है. दरअसल, भूपेन हज़ारिका के बेटे तेज़ हज़ारिका भी नागरिक संशोधन बिल से बेहद नाराज़ हैं. उन्होंने कहा कि ये बिल उनके पिता भूपेन हज़ारिका की भावना और विचारधारा के ख़िलाफ़ है. 

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अमेरिका में रह हे तेज हजारिका ने एक बयान में कहा कि वह दुखी हैं कि केंद्र ने ऐसे "दर्दनाक रूप से अलोकप्रिय" विधेयक पारित करने की योजना बनाई जो उनके पिता की मान्यताओं और भावनाओं के खिलाफ हैं. बता दें कि भूपेन हजारिका को इस साल पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और नानाजी देशमुख के साथ भारत रत्न से सम्मानित करने की घोषणा की गई. भारत रत्न देश का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित नागरिक अवार्ड है. साल 2017  में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  भारत के सबसे लंबे ब्रिज का नाम भी भूपेन हजारिका के नाम पर रखा, जो असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर 9.15 किलोमीटर लंबा है. 


बेटे तेज हजारिका ने अपने बयान में कहा कि पहली बात कि मुझे अभी तक भारत रत्न सम्मान को लेकर कोई निमंत्रण नहीं मिला है, तो इसमें अभी अस्वीकार करने जैसा कुछ है ही नहीं. दूसरी बात, केंद्र सरकार ने इस सम्मान को देने में जिस तरह की जल्दबाजी दिखाई है और जो समय चुना है वह और कुछ नहीं बस लोकप्रियता का फायदा उठाने का सस्ता तरीका है.'

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दरअसल, नागरिकता संशोधन बिल 2016 आज यानी मंगलवार को राज्यसभा में पेश किया जाएगा. गृहमंत्री राजनाथ सिंह बिल पेश करेंगे. ये बिल पहले ही लोकसभा में पास हो चुका है. राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं होने की वजह से बिल पास कराना आसान नहीं होगा. नॉर्थ ईस्ट में इस बिल का ज़ोरदार विरोध हो रहा है. 

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क्या है नागरिकता संशोधन बिल 2016: नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 को ‘नागरिकता अधिनियम' 1955 में बदलाव के लिए लाया गया है. मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन बिल को लोक सभा में पास करा लिया है. इसके प्रावधान के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में सताए गए वैसे हिन्दू, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई को भारत में छह साल रहने के बाद नागरिकता दी जा सकती है जो 31 दिसंबर 2014 के पहले भारत आ गए थे. यानी इसके लिए उनके निवास काल को 11 वर्ष से घटाकर छह वर्ष कर दिया गया है.  इसका मतलब है कि अब ये शरणार्थी 6 साल बाद ही भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं. बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर बीजेपी की जो भी समझ रही हो मगर असम के लोग सभी अवैध बांग्लादेशी के ख़िलाफ़ हैं. हिन्दू और मुस्लिम दोनों के. मगर यह बिल अगर कानून बना तो हिन्दू बांग्लादेशी को नागरिकता मिल जाएगी. इस कारण नागरिकता संशोधन बिल को लेकर असम मणिपुर, सिक्किम, त्रिपुरा जैसे कई राज्यों में अलग-अलग समाजों के संगठन आशंकित हो गए हैं और विरोध करने के लिए एकजुट हो रहे हैं.

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