अकाली दल के NDA छोड़ने पर बोले कैप्टन अमरिंदर सिंह, 'यह सिर्फ उनकी राजनीतिक मजबूरी थी'

हाल के वर्षों में शिवसेना और तेलुगु देशम पार्टी के बाद समूह से बाहर होने के लिए अकाली दल एनडीए का तीसरा प्रमुख सहयोगी बन गया है.

अकाली दल के NDA छोड़ने पर बोले कैप्टन अमरिंदर सिंह, 'यह सिर्फ उनकी राजनीतिक मजबूरी थी'

"इस फैसले में कोई नैतिक आधार शामिल नहीं था."

चंडीगढ़:

Punjab Chief Minister Captain Amarinder Singh : पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शिरोमणि अकाली दल के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) छोड़ने के कदम को बादल परिवार की "राजनीतिक मजबूरी से भरा हताशा के मामला" करार दिया है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि बादल परिवार के पास " कृषि बिल को लेकर बीजेपी की सार्वजनिक आलोचना के बाद अकाली दल के पास प्रभावी रूप से कोई अन्य विकल्प नहीं बचा था "

शनिवार रात की बैठक में अकाली दल की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था ने सर्वसम्मति से भाजपा नीत एनडीए से बाहर होने का फैसला किया. क्योंकि केंद्र के "न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों की फसलों के सुनिश्चित विपणन की रक्षा के लिए वैधानिक विधायी गारंटी देने से इनकार कर दिया." बैठक की अध्यक्षता अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने की और एनडीए छोड़ने का निर्णय बैठक के अंत में आया जो तीन घंटे से अधिक समय तक चली.

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अमरिंदर सिंह ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के "इस फैसले में कोई नैतिक आधार शामिल नहीं था." मुख्यमंत्री ने कहा, "अकालियों के पास उनके सामने कोई विकल्प नहीं था, क्योंकि भाजपा ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह कृषि बिलों की अच्छाई के बारे में किसानों को समझाने में विफल रहने के लिए एसएडी को जिम्मेदार ठहराती है. एनडीए छोड़ने का एसएडी का निर्णय सिर्फ झूठ और धोखे की उनकी गाथा की परिणति था, जिसके कारण अंततः उन्हें बिल के मुद्दे पर रोक लगानी पड़ी. "

अमरिंदर सिंह ने कहा, "सुखबीर सिंह बादल कृषि से जुड़े अध्यादेश पर अपने प्रारंभिक अप्रत्याशित रुख के बाद 'डेविल और गहरे समुद्र' के बीच फंस गए थे, इसके बाद किसान विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने अचानक यू-टर्न ले लिया," अमरिंदर सिंह ने कहा, "अकालियों ने अब खुद को एक बड़े राजनीतिक संकट में पाया है, पंजाब या केंद्र में कोई जगह नहीं बची है "

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हाल के वर्षों में शिवसेना और तेलुगु देशम पार्टी के बाद समूह से बाहर होने के लिए अकाली दल एनडीए का तीसरा प्रमुख सहयोगी बन गया है. सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि अकाली दल भाजपा का सबसे पुराना सहयोगी था, लेकिन केंद्र ने किसानों की भावनाओं का सम्मान करने में उसकी बात नहीं सुनी.

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