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कांग्रेस ने फिर किया लोकपाल बैठक का बहिष्कार, विपक्ष की आवाज को दबाने का आरोप

लोकपाल चयन समिति की बैठक का कांग्रेस ने आज एक बार फिर बहिष्कार किया. लोकसभा में पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार ने उन्हें ‘‘विशेष आमंत्रित’’ के तौर पर बुलाया था.

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कांग्रेस ने फिर किया लोकपाल बैठक का बहिष्कार, विपक्ष की आवाज को दबाने का आरोप

फाइल फोटो

खास बातें

  1. कांग्रेस ने फिर किया लोकपाल बैठक का बहिष्कार
  2. खड़गे ने कहा कि सरकार ने उन्हें विशेष आमंत्रित के तौर पर बुलाया था
  3. उन्होंने विपक्ष के विचारों को दूर रखने का आरोप लगाया
नई दिल्ली: लोकपाल चयन समिति की बैठक का कांग्रेस ने आज एक बार फिर बहिष्कार किया. लोकसभा में पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार ने उन्हें ‘‘विशेष आमंत्रित’’ के तौर पर बुलाया था.खड़गे ने आरोप लगाया कि इसका एकमात्र मकसद लोकपाल के चयन की प्रक्रिया में विपक्ष की राय को अलग रखना था. कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर बैठक में शामिल होने से मना कर दिया और आरोप लगाया कि उनकी सरकार ने इस मुद्दे को प्राथमिकता नहीं दी और उसके "दोहरे मानदंडों" का खुलासा हो गया है. उन्होंने कहा, ‘‘अगर विपक्ष की आवाज को शामिल नहीं किया जाता है तो इन परिस्थितियों में लोकपाल की नियुक्ति की प्रक्रिया प्रभावित होगी.’’ खड़गे ने अपने पत्र में लिखा है, ‘‘सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता को विशेष आमंत्रित’ के तौर पर बुलाने की एकमात्र मंशा लोकपाल के चयन की प्रक्रिया से विपक्ष के विचारों को दूर रखना है.’’

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खड़गे ने इससे पहले भी इस बैठक का बहिष्कार करते हुए एक मार्च को इसी तरह का एक पत्र प्रधानमंत्री को लिखा था. पहले की बैठक में भी खड़गे को ‘विशेष आमंत्रित’ के तौर पर बुलाया गया था. उन्होंने कहा कि विशेष आमंत्रित का न्योता लोकपाल के चयन में विपक्ष की आवाज को बाहर रखने का ‘‘पुख्ता प्रयास’’ है. अपने पत्र में कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘यह बहुत निराशाजनक है कि न केवल पहले पत्र पर ध्यान नहीं दिया गया बल्कि उसमें उठाए गए गंभीर चिंताओं को भी सुलझाया नहीं गया है जैसा कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से जारी नवीनतम कार्यालय ज्ञापन में देखा गया है.’’ कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार इस बात से अवगत है कि लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम में भागीदारी के अधिकारों, राय दर्ज कराने और मतदान के बगैर 'विशेष आमंत्रित' के लिए कोई प्रावधान नहीं है.

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उन्होंने आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया में विपक्ष की राय और इसकी भागीदारी सुनिश्चित करने की बजाए ऐसा, राष्ट्र और अवाम को ‘‘भ्रमित’’ करने के लिए किया गया है. खड़गे ने कहा कि देश के लोगों को यह जानना चाहिए कि सरकार ने लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल को इस अधिनियम के तहत चयन समिति के सदस्य के रूप में शामिल करने के लिए लोकपाल कानून में संशोधन नहीं किए और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष में चार बहुमूल्य साल खराब कर दिये. कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘अगर सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए गंभीर है कि लोकपाल की नियुक्ति शुचिता के साथ हो, तो मैं एक बार फिर सलाह दूंगा कि सरकार अध्यादेश लाकर इसमें (लोकपाल कानून में) आवश्यक संशोधन करे ताकि चयन प्रक्रिया में विपक्ष की आवाज को शामिल किया जा सके.’’ खड़गे ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा, ‘‘इन परिस्थितियों में, मैं आदरपूर्वक एक बार फिर ‘‘विशेष आमंत्रित’’ के तौर पर इसमें हिस्सा लेने से इंकार करता हूं.’’

VIDEO: लोकपाल समिति की बैठक में नहीं गए कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे
लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013 के तहत लोकसभा में विपक्ष का नेता ही चयन प्रक्रिया का सदस्य हो सकता है और चूंकि खड़गे को यह दर्जा हासिल नहीं है इसलिए वह इस पैनल में शामिल नहीं हैं. विपक्ष के नेता का दर्जा हासिल करने के लिए कम से कम 55 सीट अथवा लोकसभा की कुल सदस्य संख्या का दस फीसदी सीट होना अनिवार्य है.कांग्रेस के नियमित संवाददाता सम्मेलन में पूछे जाने पर पार्टी नेता पवन खेडा ने कहा, ‘‘लोकपाल संस्थान को तोड़ने की सरकार के प्रयास का एक स्पष्ट उदाहरण है.’’


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