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असम के लोगों को NRC को लेकर घबराने की कतई ज़रूरत नहीं: मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल

सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि 31 अगस्त को प्रकाशित होने जा रही अंतिम NRC में जिनके नाम नहीं हैं, उन्हें घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है.

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असम के लोगों को NRC को लेकर घबराने की कतई ज़रूरत नहीं: मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल

सर्बानंद सोनोवाल (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. NRC को लेकर घबराने की कतई ज़रूरत नहीं: सोनोवाल
  2. 'हम सुप्रीम कोर्ट का पूरा आदर करते हुए समूची प्रक्रिया में सहयोग कर रहे'
  3. NRC में लगभग 41 लाख लोगों के नाम दर्ज नहीं
असम:

NRC में कथित रूप से गलत नाम जोड़े और हटाए जाने को लेकर BJP द्वारा की गई समीक्षा की मांग के बीच सरकार ने हाल ही में संकेत दिए थे कि वह इस पर कानून बनाने का रास्ता अख्तियार कर सकती है, लेकिन अब मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने साफ कहा कि राज्य के लोगों को NRC मुद्दे पर घबराने की कतई ज़रूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि 31 अगस्त को प्रकाशित होने जा रही अंतिम NRC में जिनके नाम नहीं हैं, उन्हें घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है. ड्राफ्ट NRC में लगभग 41 लाख लोगों के नाम दर्ज नहीं हैं.

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गुवाहाटी में गुरुवार रात एक कार्यक्रम में शिरकत के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, "राज्य तथा केंद्र सरकार हर मुमकिन कोशिश कर रही है, ताकि गलतियों के बिना NRC का प्रकाशन सुनिश्चित हो सके... हम सुप्रीम कोर्ट का पूरा आदर करते हुए समूची प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं... सुप्रीम कोर्ट स्वयं वर्ष 2013 से NRC अपडेशन के काम की निगरानी कर रहा है... मुझे भरोसा है कि राज्य के लोग अंतिम NRC के प्रकाशन के बाद भी उसी तरह सहयोग देते रहेंगे, जिस तरह उन्होंने ड्राफ्ट NRC के प्रकाशन के बाद दिया था... अंतिम NRC के प्रकाशन के बाद भी सभी समुदायों के बीच एकता, भाईचारा और शांति इसी तरह बनी रहेगी..."


इससे पहले इसी सप्ताह सर्बानंद सोनोवाल केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से NRC के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए दिल्ली आए थे, और संकेत दिया था कि केंद्र और राज्य की BJP-नीत सरकारें अंतिम NRC के री-वेरिफिकेशन के विकल्पों पर विचार कर रही हैं, क्योंकि पहले सरकार ने दावा किया था कि इसमें गलत नाम जोड़े और हटाए गए हैं. अब मुख्यमंत्री के इस बयान को अहम माना जा रहा है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने री-वेरिफिकेशन योजना के आग्रह को खारिज करते हुए अंतिम NRC का प्रकाशन 31 अगस्त तक करने का निर्देश दिया था.

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एक अहम घटनाक्रम में गृह मंत्रालय ने भी NRC से हटा दिए गए लोगों को इसके खिलाफ अपील करने देने की डेडलाइन को बढ़ाने का फैसला किया. मौजूदा समय में यह डेडलाइन 60 दिन की है, जिसे 120 दिन तक बढ़ा दिया गया है.

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, "अगर किसी का नाम हट गया है, तो घबराने की ज़रूरत नहीं है... उनकी शिकायतों को सुनने के लिए पंचाट के ज़रिये व्यवस्था मौजूद है, और गृह मंत्रालय ने भी अपील के लिए 120 दिन की मोहलत दे दी है... गृह मंत्रालय ने पहले ही उन कदमों और प्रक्रियाओं को स्पष्ट कर चुकी है, जो अंतिम NRC से नाम हटा दिए जाने की सूरत में उठाए जाने हैं..."
 



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