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जज लोया की मौत मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ और दुष्यन्त दवे के बीच तीखी बहस

दुष्यन्त दावे ने कहा कि 'साल्वे अमित शाह के लिए बहस कर चुके हैं, अब महाराष्ट्र सरकार की तरफ से कर रहे हैं. मुझे लगता है कि इस मामले में इंसाफ नहीं हो पायेगा.

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जज लोया की मौत मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ और दुष्यन्त दवे के बीच तीखी बहस

भारतीय सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को जज लोया मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ और दुष्यन्त दवे के बीच तीखी बहस हुई. सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने दुष्यन्त दवे के तेज आवाज में बोलने पर नाराजगी जाहिर की और कहा कि जब जज बोल रहे हों तो आप बीच में न बोलें. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आप अपनी बारी का इंतजार करिए, जब आपको बहस का मौका मिले तो आप अपनी बात रखियेगा. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आप कोर्ट में होने वाली बहस को मछली बाजार के स्तर से भी नीचे नहीं ले जा सकते. वहीं दुष्यन्त दावे ने कहा कि 'साल्वे अमित शाह के लिए बहस कर चुके हैं, अब महाराष्ट्र सरकार की तरफ से कर रहे हैं. मुझे लगता है कि इस मामले में इंसाफ नहीं हो पायेगा.'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों तरफ की तीखी बहस का हम पर कोई असर नहीं होगा. मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कई दस्तावेज मराठी भाषा में हैं. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को कहा कि 'नकबयां' का अर्थ क्या है. ये मराठी शब्द है. वहीं महराष्ट्र सरकार की तरफ से पेश वकील हरीश साल्वे ने कहा कि याचिकाकर्ता मामले को समझ नहीं पा रहे हैं.

वहीं याचिकाकर्ता तहसीन पूनावाला के वकील ने कहा कि जज लोया की बॉडी को मुंबई की बजाय दूसरी जगह क्यों ले जाया गया जबकि पूरा परिवार मुंबई में था. ECG इसलिए नहीं हो पाई कि मशीन खराब थी, ऐसे में बयान अपने आप में विरोधाभासी हैं. किसी भी डॉक्टर या सबूतों को वेरिफाई किया गया? कई महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब हैं? इस मामले में स्वतंत्र जांच होनी चाहिए ताकि लोगों को पता चले कि वाकई में क्या हुआ था.

याचिकाकर्ता तहसीन पूनावाला के वकील ने कहा कि 'जज लोया का पोस्टमार्टम नागपुर के कुंडा में किया गया, उसका कोई दस्तावेज नहीं है. ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है जो ये बताए कि उनको कहां ले जाया गया. कोई बयान दर्ज नहीं किए गए. सीतापुरी पुलिस का उसमें कोई अधिकार क्षेत्र नहीं बनता.' उन्‍होंने कहा, '7 फरवरी 2016 को मौत की रिपोर्ट को दर्ज किया गया. सवाल उठता है कि इसे कैसे किया गया, जबकि दस्तावेज कुछ और कह रहे हैं. ये कमीशन के लिए संभव क्यों नहीं है कि बयानों को दर्ज किया जाए अगर वो उपलब्ध हैं तो. किसी भी डॉक्टर का बयान दर्ज नहीं किया गया जबकि वो मौके पर मौजूद थे. किसी भी डॉक्टर का बयान सही तरीके से नहीं लिया गया.'

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महाराष्ट्र सरकार की तरफ से पेश वकील हरीश साल्वे ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि पहले दस्तावेजों को देख लें. हरीश साल्वे ने कहा कि सबके बयानों को दर्ज किया गया. याचिकाकर्ता के वकील दुष्यन्त दवे की तरफ से कहा गया कि वो एक अर्जी दाखिल करेगे जिसमें वो गवाहों से जिरह करने की मांग करेंगे. वहीं तहसीन पूनावाला के वकील ने कहा कि 'जज लोया का सही तरीके से ECG नहीं किया गया. क्या दांडे हॉस्पिटल में ECG किया गया ये भी एक सवाल है. पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में कहीं भी दिमाग पर चोट के बारे में नहीं गया. ऐसे में न्यूरोसर्जन की राय क्यों नही ली गई.'

मामले की सुनवाई अब 9 फरवरी को होगी.


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