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'आधार' की अनिवार्यता से भूखे मर रहे जरूरतमंद, झारखंड में आंखें खोलने वाले मामले सामने आए

सामाजिक कार्यकर्ता और अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने कहा कि आधार को अनिवार्य करना पागलपन भरा फैसला, लोगों को अधिकारों से किया जा रहा वंचित

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'आधार' की अनिवार्यता से भूखे मर रहे जरूरतमंद, झारखंड में आंखें खोलने वाले मामले सामने आए

सामाजिक कार्यकर्ता और अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने झारखंड में आधार कार्ड की अनिवार्यता को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं.

खास बातें

  1. आधार कार्ड के जंजाल में फंसकर कई जरूरतमंद भूख से मरे
  2. झारखंड में रद्द किए गए राशन कार्डों में से मात्र 12% ही गलत थे
  3. आधार के बिना राशन और पेंशन बंद, सरकार बचा रही राशि!
रांची:

झारखंड में भोजन का अधिकार अभियान ने सरकार की आधार कार्ड की अनिवार्यता पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. सामाजिक कार्यकर्ता और अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने कहा है कि आधार को अनिवार्य करना पागलपन भरा फैसला है.

राज्य में जिन लोगों का आधार से पेंशन, राशन कार्ड, जॉब कार्ड लिंक नहीं हुआ है वैसे लाभार्थियों को लाभ से वंचित किया जा रहा है. झारखंड में जॉब कार्ड, राशन कार्ड या पेंशनर को फर्जी बताया गया है और इस मद में बची हुई राशि को सरकार आधार इनेबल सेविंग कहकर खुद की वाहवाही लूट रही है. झारखंड में आधार कार्ड से लिंक नहीं होने के कारण हजारो जॉब कार्ड भी कैंसिल कर दिए गए हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ज्यां द्रेज ने यह बातें कहीं.

ज्यां द्रेज ने कहा कि 2017 में केंद्र सरकार ने कहा कि आधार की वजह से 100 करोड़ रुपये बचाए. सरकार जिस तरीके से फर्जी राशन कार्ड बताकर राशन कार्ड को कैंसिल कर रही है वह गलत है. आरटीआई से प्राप्त सूचना से पता चला है कि राज्य में रद्द किए गए राशन कार्डों में से मात्र 12% ही गलत थे. इसके कारण जरूरतमंदों को उनके राशन के अधिकार से वंचित हो जाना पड़ा.


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उन्होंने कहा कि राज्य में आधार की वजह से दो लाख पेंशनरों की पेंशन रद्द कर दी गई, जबकि इस मुद्दे पर खूंटी जिला में आकलन करने पर पता चला कि ऐसे लोगों की ही पेंशन रद्द की गई जिन्होंने किसी वजह से आधार से बैंक खाता लिंक नहीं कराया था. राज्य सरकार की इस तरह की कार्रवाई से जरूरतमंद भूखे मरने को मजबूर हो रहे हैं.

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ज्यां द्रेज ने कहा कि राज्य में आधार अनिवार्यता के कारण लाभार्थियों को अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है. ऐसे कई मामले सामने आए हैं.

  • 4 जनवरी 2017 को ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा अधिसूचना जारी की गई कि मनरेगा में आधार अनिवार्य है. अर्थात जिन व्यक्तियों का नाम जॉब कार्ड में है उन सभी को आधार से जोड़ा जाए.
  • 8 फरवरी 2017 को खाद्य आपूर्ति मंत्रालय द्वारा अधिसूचना जारी की गई कि जन वितरण प्रणाली से आधार को जोड़ना अनिवार्य है. यानी जिन व्यक्तियों का नाम राशन कार्ड में है उन सभी को आधार से जोड़ा जाए.
  • 27 मार्च 2017 को झारखंड सरकार के मुख्य सचिव द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला आपूर्ति अधिकारियों को आदेश दिया गया कि 5 अप्रैल 2017 के बाद ऐसे सभी राशन कार्ड जो आधार से नहीं जुड़े हैं, रद्द कर दिए जाएं.
  • 9 अप्रैल 2017 को केंद्रीय ग्रामीण मंत्रालय द्वारा बताया गया कि आधार की वजह से 93 लाख फर्जी जॉब कार्ड रद्द हुए हैं. झारखंड में एक लाख आठ हजार जॉब कार्ड रद्द हुए हैं एवं तीन लाख 30 हजार लाभार्थियों के नाम जॉब कार्ड से हटा दिए गए हैं.
  • 5 मई 2017 को सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार रद्द हुए सभी जॉब कार्डों में से केवल 12.6% ही फर्जी या डुप्लीकेट थे. लगभग 60% को ''अन्य कारणों'' से रद्द कर दिया गया था. यह बहुत संभव है कि ये वैसे लोग हैं जिन्होंने आधार नंबर जमा नहीं किया था.
  • 22 जुलाई 2017 को सिमडेगा की संतोषी कुमारी के परिवार का राशन कार्ड आधार से नहीं जुड़े होने के कारण रद्द कर दिया गया.
  • अगस्त 2017 में पूर्वी सिंहभूम के बोराम प्रखंड के बीडीओ को लिखा गया, जिसमें इस बात का प्रमाण है कि  आइसीआइसीआई बैंक ने 6000 मनरेगा मजदूरों के खाते बिना उनकी जानकारी के खोले. चूंकि बैंक 30 किलोमीटर दूर है इसलिए निकासी बैंकिंग करसपॉन्डेंट के माध्यम से आधार आधारित माइक्रो एटीएम द्वारा ही की जा सकती है.
  • 17 अगस्त 2017 को यूआईडीएआई के सीईओ को भोजन का अधिकार अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं द्वारा पत्र लिखा गया, जिसमें आधार से होने वाली बचत के दावों को चुनौती दी गई एवं झारखंड में आधार आधारित बायोमैट्रिक सत्यापन की वजह से जन वितरण प्रणाली की बुरी स्थति का ब्यौरा प्रस्तुत किया गया.
  • 7 सितम्बर 2017 को खाद्य आपूर्ति विभाग झारखंड के सचिव द्वारा यह घोषणा की गई कि 100% आधार सीडिंग का लक्ष्य हासिल कर 11.64 लाख राशन कार्ड रद्द कर दिए गए हैं, जिससे 225 करोड़ रुपये की बचत हुई है.
  • 7 सितम्बर 2017 को झारखंड सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा यह घोषणा की गई कि तीन लाख फर्जी पेंशन खातों को सूची से हटा दिया गया है, जिससे 180 करोड़ रुपये की ''बचत'' हुई है.
  • 28 सितम्बर 2017 को सिमडेगा के जलडेगा प्रखंड की 11 वर्षीय संतोषी कुमारी की भूख से मौत हो गई, क्योंकि पांच महीनों से उसके परिवार को राशन नहीं मिला था, जो उनका कानूनी अधिकार है.
  • 23 अक्टूबर 2017 को देवघर के रूपलाल मरांडी की भूख से मौत हो गई. परिवार को दो महीनों का राशन नहीं मिला था, क्योंकि ई-पॉस मशीन में अंगूठा काम नहीं किया.
  • 26 अक्टूबर 2017 को किए गई सर्वेक्षण के माध्यम से किए गए सत्यापन में पता चला कि लातेहार ज़िले के मनिका प्रखंड के बिशुनबांध पंचायत में ऐसे ''फर्जी'' परिवार मिले जो ज़िंदा हैं और राशन पाने के हकदार हैं, लेकिन उनके राशन कार्ड रद्द कर दिए गए हैं.
  • 19 नवम्बर 2017 को खूंटी ज़िले से इस बात के प्रमाण मिला कि मनरेगा मज़दूरों की मजदूरी को बिना मज़दूरों की जानकारी के उनके एयरटेल खाते में आधार का इस्तेमाल करते हुए जमा किया जा रहा है.
  • 1 दिसम्बर 2017 को गढ़वा ज़िले में प्रेमनी कुंवर की भूख से मौत हो गई, क्योंकि आधार संबंधित समस्याओं के चलते उनको राशन एवं पेंशन नहीं मिल रही थी.
  • 1 दिसम्बर 2017 मनरेगा मज़दूरी पर एक शोध से पता चला कि कुछ भुगतान के नमूने में कई भुगतान ''रद्द'' हो गए हैं. नमूने में रद्द हुए भुगतानों की कुल राशि 83 लाख रुपये है. लातेहार ज़िले के मणिका प्रखंड में सर्वेक्षण द्वारा पता चला कि उस एक प्रखंड में ही रद्द हुए भुगतान की राशि छह लाख रुपये है.
  • 12 दिसम्बर 2017 को खूंटी ज़िला प्रशासन द्वारा जन वितरण प्रणाली के लाभार्थियों को नोटिस भेजा गया कि ऐसे सभी लोगों के नाम उनके राशन कार्ड से हटा दिए जाएंगे जो अगले 10 दिनों में अपनी आधार संख्या जमा नहीं करते.
  • 25 दिसम्बर 2017 को गढ़वा के मझिआंव प्रखंड में इतवारिया देवी की भूख से मौत हो गई क्योंकि आधार सम्बंधित समस्याओं के चलते उनको तीन महीनों का राशन एवं दो महीनों की पेंशन नहीं मिली थी.


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