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EXCLUSIVE: जब इस्राइली 'जुगाड़' से फ्रांस-निर्मित विमान पर IAF ने तैनात कर दी रूसी मिसाइल

भारतीय वायुसेना (IAF) अपने मिराज-2000 लड़ाकू विमानों को उड़ाते हुए पिछले लगभग 10 साल से इसी 'जुगाड़' का इस्तेमाल कर रही है.

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EXCLUSIVE: जब इस्राइली 'जुगाड़' से फ्रांस-निर्मित विमान पर IAF ने तैनात कर दी रूसी मिसाइल

भारतीय वायुसेना (IAF) का फ्रांस-निर्मित मिराज 2000 विमान, जिसके दाएं विंग के नीचे रूस-निर्मित R-73 मिसाइल देखी जा सकती है...

वायुसेना से जुड़े लोग इसे अल्टीमेट 'जुगाड़' कहते हैं - हवा से हवा में मार करने वाली रूस-निर्मित मिसाइल को इस्राइल-निर्मित हेल्मेट-माउंटेड डिस्प्ले के साथ चलाना, जिसे भारतीय वायुसेना के पायलट फ्रांस-निर्मित मिराज-2000 लड़ाकू विमान उड़ाते हुए पहनते हैं.

और यही नहीं, भारतीय वायुसेना (IAF) अपने मिराज-2000 लड़ाकू विमानों को उड़ाते हुए पिछले लगभग 10 साल से इसी 'जुगाड़' का इस्तेमाल कर रही है.

वर्ष 1985 में भारतीय वायुसेना में शामिल किए गए मिराज विमानों में फिट की जाने वाली हवा से हवा में मार करने वाली फ्रांस-निर्मित R-530D और मैजिक II मिसाइलें वर्ष 2008 तक अप्रचलित हो चुकी थीं, और इनके बिना IAF के मिराज विमानों में कोई मिसाइल होती ही नहीं.

बेहद कम विकल्पों की मौजूदगी में और मिसाइलों को हासिल करने की लम्बी प्रक्रिया के बारे में सोचते हुए IAF ने मौजूदा रूसी R-73 मिसाइलों को ही मिराज पर इन्टीग्रेट करने का फैसला किया. R-73 मिसाइलें भारतीय वायुसेना के सुखोई 30, मिग-29 और मिग-21 'बाइसन' विमानों पर पहले से तैनात थीं, लेकिन उन्हें किसी पश्चिमी देश से आए प्लेटफॉर्म पर इन्टीग्रेट करने की कोशिश कभी नहीं की गई थी. इतना ही नहीं, फ्रांस सरकार ने भी इस कदम का विरोध किया, क्योंकि वे फ्रांसीसी प्लेटफॉर्म पर किसी रूसी मिसाइल को इन्टीग्रेट किए जाने में मदद नहीं करना चाहते थे, खासतौर से तब, जब उनके पास नए डिज़ाइन से तैयार फ्रांसीसी मिसाइलें भारत को निर्यात किए जाने के लिए उपलब्ध थीं.


खैर, इन्टीग्रेशन हुआ, और उसमें इस्राइली कंपनी एलबिट (Elbit) के इंजीनियरों से काफी मदद मिली, जिनके साथ उस समय तक IAF अत्याधुनिक DASH हेल्मेट-माउंटेड डिस्प्ले की आपूर्ति के लिए कॉन्ट्रैक्ट कर चुकी थी. हेल्मेट-माउंटेड डिस्प्ले ऐसा उपकरण है, जिसके ज़रिये मिशन की महत्वपूर्ण जानकारी पायलट की आंखों के सामने मौजूद स्क्रीन पर दिखती रहती है.

R-73 मिसाइलों को DASH हेल्मेट से जोड़ने के बारे में सोचना जितना आसान था, असलियत में ऐसा कर पाना कहीं ज़्यादा मुश्किल था. इन्टीग्रेशन से जुड़ी दिक्कतों के बारे में जानकार एक वायुसेनाधिकारी ने कहा, "कई अहम चुनौतियां थीं..." उन्होंने बताया, "यह एक नया हेल्मेट था, और हम सोर्स कोड के बिना काम कर रहे थे..." दूसरे शब्दों में कहें, तो ऐसे एल्गोरिदम बनाए जाने थे, ताकि मिराज के रडार और इस्राइली हेल्मेट-माउंटेड साइट अपने आप ही रूसी मिसाइल की 'हरकतों को समझ' सकें.

सही एल्गोरिदम और मॉडिफाइड सॉफ्टवेयर की गैरमौजूदगी में रूसी मिसाइल का इन्टीग्रेशन नामुमकिन होता. वायुसेनाधिकारी ने बताया, "न रूस से मदद ली गई, न फ्रांस से... ज़ाहिर है, वे नाराज़ थे..." लेकिन वह 'जुगाड़' काम कर गया. अधिकारी के मुताबिक, "R-73 मिसाइल उस मैजिक II मिसाइल से कहीं ज़्यादा क्षमतावान थी, जिसके बदले उसे लाया गया था..."

एक दशक से भी ज़्यादा वक्त तक वायुसेना ने कभी इस बात का ज़िक्र नहीं किया था कि उसने मिराज 2000 विमानों के साथ R-73 मिसाइलों को किस तरह इन्टीग्रेट किया था, लेकिन कारगिल युद्ध के दौरान टाइगर हिल पर किए गए वायुसेना के हमले की वर्षगांठ पर 24 जून को उन्होंने R-73 मिसाइल के साथ एक मिराज 2000 विमान को शोकेस किया. यह पहला मौका नहीं है, जब इस्राइली इंजीनियरों ने IAF को मिराज 2000 विमानों को लेकर मदद की हो. कारगिल युद्ध के दौरान भी इस्राइली इंजीनियरों ने लाइटेनिंग लेसर डेज़िगनेटर पॉड को मिराज विमानों में सिर्फ 12 दिन के भीतर फिट कर दिया था, जिसकी मदद से लेसर-गाइडेड बमों को सेना के युद्ध इतिहास में पहली बार इस्तेमाल किया जा सका.

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बहरहाल, भारतीय वायुसेना में अब रूस-निर्मित R-73 मिसाइलों को बदलकर धीरे-धीरे उनके स्थान पर दूसरी मिसाइलों को तैनात किया जा रहा है. वर्ष 2015 से भारतीय वायुसेना के पास बहुत मॉडिफाइड मिराज 2000 विमान आ रहे हैं, जिनमें हवा से हवा में मार करने वाली फ्रांसीसी MICA मिसाइलें फिट हैं. इस तरह का एक स्क्वाड्रन, या 18 विमान IAF में पहले ही शामिल किए जा चुके हैं. इस अपग्रेड प्रक्रिया के जानकार एक वायुसेना पायलट ने बताया, "नज़दीकी लड़ाई में R-73 के मुकाबले MICA मिसाइल लगभग चार गुणा ज़्यादा सक्षम है, और यह (इस्राइली) DASH हेल्मेट-माउंटेड साइट के साथ इन्टीग्रेटेड भी है..."

रूस-निर्मित R-73 वही मिसाइल है, जिसका इस्तेमाल विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान ने 27 फरवरी को नियंत्रण रेखा पर मिग-21 'बाइसन' लड़ाकू विमान उड़ाते हुए पाकिस्तानी एफ-16 लड़ाकू विमान को मार गिराने के लिए किया था. इससे एक दिन पहले ही भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान की सीमा के काफी भीतर घुसकर बालाकोट में आतंकवादी गुट जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण केंद्र को ध्वस्त किया था. बालाकोट मिशन में निशाने पर ग्लाइड बम गिराने वाले सभी विमान मिराज 2000 थे, और सभी में R-73 मिसाइलें ही तैनात थीं, ताकि पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों से आमना-सामना हो जाने पर काम आएं. उन्हें एस्कॉर्ट करने के लिए कुछ अपग्रेड किए गए मिराज विमान भी उनके साथ थे, जिनमें से प्रत्येक में छह-छह MICA मिसाइलें तैनात थीं.



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