मानसून सत्र में हिस्सा लेंगे फारूक अब्दुल्ला, अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार होंगे शामिल

लोकसभा सांसद और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) आज (सोमवार) से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session of Parliament) में शामिल होंगे.

मानसून सत्र में हिस्सा लेंगे फारूक अब्दुल्ला, अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार होंगे शामिल

फारूक अब्दुल्ला रविवार को दिल्ली पहुंचे. (फाइल फोटो)

खास बातें

  • दिल्ली पहुंचे फारूक अब्दुल्ला
  • मानसून सत्र में लेंगे हिस्सा
  • दो सत्रों के दौरान हिरासत में थे
नई दिल्ली:

लोकसभा सांसद और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) आज (सोमवार) से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session of Parliament) में शामिल होने के लिए रविवार को यहां पहुंचे. जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाए जाने के बाद उनकी राष्ट्रीय राजधानी की यह पहली यात्रा है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष पिछले दो सत्रों के दौरान हिरासत में थे.

पिछले साल पांच अगस्त को जम्मू और कश्मीर (Jammu kashmir) पुनर्गठन विधेयक को संसद में रखा गया था और 82 वर्षीय नेता को एहतियातन हिरासत में ले लिया गया था. पार्टी नेताओं ने बताया कि कश्मीर घाटी के नेता अब्दुल्ला इस सत्र के दौरान जम्मू और कश्मीर मुद्दे को उठाने के इच्छुक हैं. सोमवार से शुरू होने वाला मानसून सत्र 18 दिन यानि एक अक्टूबर तक चलेगा.

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सत्र से पहले सभी सांसदों व उनके परिजनों का कोरोना टेस्ट करवाया गया है. सभी सांसदों को सैनेटाइजर, मास्क, ग्लव्स सहित अन्य स्वास्थ्य सुरक्षा संबंधी सामग्री की किट भेजी गई है. संसद के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों का भी टेस्ट करवाया गया है. मानसून सत्र के दौरान परिसर में कोविड टेस्ट की सुविधा उपलब्ध रहेगी. अगर किसी सदस्य को स्वास्थ्य संबंधी शिकायत होती है तो उनके उचित उपचार की पूरी व्यवस्था की गई है.

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मानसून सत्र में भारत-चीन सीमा पर गतिरोध, कोरोनावायरस महामारी से निपटने और आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दे छाए रहने की संभावना है. विपक्षी पार्टियां इन सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कराना चाहती हैं, वहीं सरकार की नजर करीब दो दर्जन विधेयकों को पारित कराने पर है. दरअसल सरकार की नजर 23 विधेयकों पर चर्चा और इसे पारित कराने पर है. इसमें 11 ऐसे विधेयक भी हैं, जो अध्यादेशों का स्थान लेंगे. इनमें से चार विधेयकों का विपक्षी दल विरोध कर सकते हैं. ये चारों विधेयक कृषि क्षेत्र और बैंकिंग नियमन से जुड़े अध्यादेश का स्थान लेंगे.

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