देश में पहली बार मंदी की मार, मोदी ने देश की ताकत को कमजोरी में बदल दिया :राहुल गांधी

RBI के अनुमानों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में आर्थिक विकास दर (GDP Growth) नकारात्मक रही है. जीडीपी दर दूसरी तिमाही में -8.6% सिकुड़ गई है

देश में पहली बार मंदी की मार, मोदी ने देश की ताकत को कमजोरी में बदल दिया :राहुल गांधी

राहुल गांधी नोटबंदी औऱ लॉकडाउन को लेकर पहले ही सरकार को घेर चुके हैं.

नई दिल्ली:

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है. राहुल ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा कि भारत इतिहास में पहली बार आर्थिक मंदी (Recession) की चपेट में आ गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime minister Narendra Modi) ने देश की ताकत को कमजोरी में बदल दिया है.

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रिजर्व बैंक (RBI) के अनुमानों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में आर्थिक विकास दर नकारात्मक रही है. जीडीपी दर दूसरी तिमाही में -8.6% सिकुड़ गई है. राहुल गांधी नोटबंदी, लॉकडाउन और सरकार के अन्य आर्थिक फैसलों को लेकर लगातार सरकार पर हमला बोलते रहे हैं.

उन्होंने नोटबंदी के चार साल पूरे होने के मौके पर मोदी सरकार के इस फैसले को गरीबों पर चोट करने वाला और पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने वाला बताया था. उन्होंने कहा कि लॉकडाउन का निर्णय भी सही वक्त पर नहीं लिया गया. इस कारण बड़े पैमाने पर प्रवासियों का पलायन हुआ. साथ ही अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंची.

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गौरतलब है कि कोरोना काल में लॉकडाउन (Lock down)और आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ने का असर अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है. वर्ष 2020-21 के दौरान सुस्त चल रही देश की आर्थिक विकास दर (GDP Growth rate)  2020-21 के वित्तीय वर्ष में तगड़ा नुकसान झेला है. आशंका है कि विकास दर में सुस्ती का यह दौर लंबा चल सकता है. लगातार दूसरी तिमाही में वृद्धि दर नकारात्मक रहने के आसार हैं.

आरबीआई ने मौद्रिक समीक्षा में आधिकारिक आंकड़े जारी करने के पहले अपने बुलेटिन के जरिये यह अनुमान पेश किया है. अप्रैल-जून की पहली तिमाही में जीडीपी (GDP) में पिछले साल इसी अवधि की तुलना में -23.9 फीसदी की गिरावट आई थी. रिजर्व बैंक का अनुमान है कि पूरे वित्तीय वर्ष 2020-21 में विकास दर -9.5 फीसदी नीचे रह सकती है. केंद्रीय बैंक का अनुमान है कि अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे एक-दो साल में पटरी पर आएगी.

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