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एम्स ऋषिकेश ने जीडी अग्रवाल का पार्थिव शरीर देने से किया मना, तो मातृसदन ने ऐसे दी श्रद्धांजलि

गंगा नदी के संरक्षण को लेकर पिछले 111 दिनों से अनशन कर रहे जाने-माने पर्यावरणविद प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (GD Agrawal) के अंतिम संस्कार पर खींचतान शुरू हो गया है.

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एम्स ऋषिकेश ने जीडी अग्रवाल का पार्थिव शरीर देने से किया मना, तो मातृसदन ने ऐसे दी श्रद्धांजलि

Environmentalist GD Agrawal Funeral: जीडी अग्रवाल को मातृसदन में श्रद्धांजलि

नई दिल्ली: गंगा नदी के संरक्षण को लेकर पिछले 111 दिनों से अनशन कर रहे जाने-माने पर्यावरणविद प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (GD Agrawal) का गुरुवार दोपहर दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. मगर अब उनके अंतिम संस्कार को लेकर खींचतान शुरू हो गया है. 86 साल की उम्र में अंतिम सांस लेने वाले जीडी अग्रवाल के अंतिम संस्कार को लेकर एम्स ऋषिकेश और मातृसदन के बीच खींचतान शुरू हो गया है. एक ओर जहां एम्स ऋषिकेश का कहना है कि मृत्यु से पहले प्रो जीडी अग्रवाल अपना शरीर एम्स को दान कर चुके थे, इसलिए उनका शरीर एम्स में ही रहेगा, वहीं मातृसदन उनके शव को आश्रम में रखने की मांग कर रहा था.

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प्रो जीडी अग्रवाल के शव के अंतिम दर्शनों की भी एम्स प्रशासन ने अनुमति नहीं दी है. एम्स ने प्रो जीडी अग्रवाल के क़रीबी लोगों को ही उनके मृत शरीर को देखने दिया. माना जा रहा है कि देह दान के बाद पार्थिव शरीर पर एम्स प्रशासन का अधिकार है. यही वजह है कि जीडी अग्रवाल का शव एम्स में ही रहेगा. एम्स ऋषिकेश ने मातृ सदन को स्वामी सानन्द जी का पार्थिव शरीर सौंपने से इनकार कर दिया. इसलिए जीडी अग्रवाल जिस कुर्सी का प्रयोग वे करते थे, उसी पर उनकी तस्वीर को रख कर उन्हें पुष्प श्रद्धांजलि अर्पित की गई. 
 
rcse31sgमातृसदन में जीडी अग्रवाल को श्रद्धांजलि

मातृसदन की मांग थी कि तीन दिन के लिए जीडी अग्रवाल (Environmentalist GD Agrawal) के पार्थिव शरीर को आश्रम में रखा जाए, ताकि लोग उनका अंतिम दर्शन कर सकें. वहीं, प्रो अग्रवाल के गुरु आदि मुक्तेश्वरानंद का कहना है कि जीडी अग्रवाल के शरीर को बनारस लाया जाए. बता दें कि वह 86 वर्ष के थे. ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ रविकांत ने बताया कि स्वामी सानंद ने गुरुवार को दोपहर यहां संस्थान में अंतिम सांस ली.  इस बीच, केंद्र सरकार ने कहा था कि सानंद की लगभग सारी मांगें मान ली गई थीं.

बुधवार को जल संसाधन एवं गंगा नदी पुनर्जीवन मंत्री नितिन गडकरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक सवाल के जवाब में कहा था, ‘‘हमने (गंगा की सफाई पर) उनकी लगभग सारी मांगें मान लीं. एक मांग पर्यावरणीय प्रवाह को सुनिश्चित करने की थी और हम अधिसूचना लेकर आए हैं।’’ सरकार ने मंगलवार को ई-प्रवाह संबंधी अधिसूचना जारी की थी.इसमें कहा गया है कि गंगा नदी में विभिन्न स्थानों पर न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह बनाकर रखा जाएगा.

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गडकरी ने कहा कि दूसरी मांग गंगा के संरक्षण के लिए कानून बनाने की थी. उन्होंने कहा कि विधेयक को मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद उसे संसद में पेश किया जाएगा. केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘उनकी कुछ मांगें (गंगा नदी पर बनने जा रही) पनबिजली परियोजनाओं से जुड़ी थीं. हम सभी पक्षों को साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं और मामले को जल्द से जल्द सुलझाने की कोशिश में हैं. मैंने उन्हें एक पत्र लिखकर कहा था कि हमने करीब 70-80 फीसदी मांगें मान ली हैं और हमें उनकी जरूरत है और उन्हें अपना अनशन खत्म करना चाहिए.’    

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सानंद के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा को लेकर उनके जुनून को हमेशा याद रखा जाएगा. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘श्री जीडी अग्रवाल जी के निधन से दुखी हूं. ज्ञान, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, खासकर गंगा की सफाई के प्रति उनके जुनून को हमेशा याद रखा जाएगा. मेरी संवेदनाएं.’ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सानंद की मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने गंगा नदी के लिए अपना जीवन त्याग दिया. राहुल ने यह भी कहा कि वह अग्रवाल की लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे. राहुल गांधी ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा, ‘‘गंगा को बचाने के लिए उन्होंने अपना जीवन त्याग दिया. नदी को बचाना देश को बचाने के समान है. हम उन्हें कभी नहीं भूलेंगे और उनकी लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे.’

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