सरकार ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में 52 गलतियां सुधारीं

विपक्ष ने पिछले महीने आरोप लगाया था कि कानून ‘‘जल्दबाजी’’ में लाया गया है

सरकार ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में 52 गलतियां सुधारीं

केंद्र सरकार ने कानून में 50 से अधिक सुधार किए हैं

खास बातें

  • सरकार ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में 52 गलतियां सुधारीं
  • कानून में ‘‘एडमिनिस्ट्रेटर’’ में ‘एन’ के बाद ‘आई’ शब्द छूट गया था
  • ‘‘आर्टिकल’’ में ‘टी’ के बाद ‘आई’ छूट गया था
नई दिल्ली:

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के विभाजन के लिए लाए गए कानून में 50 से अधिक सुधार किए हैं जिनमें वर्ष 1909 को 1951 किया गया है, एक शब्द में छूट गए ‘आई' को जोड़ा गया है और एक शब्द में लगे अतिरिक्त ‘टी' को हटा दिया गया है. विपक्ष ने पिछले महीने आरोप लगाया था कि कानून ‘‘जल्दबाजी'' में लाया गया है. करीब एक महीने बाद सरकार ने बृहस्पतिवार को त्रुटियों में सुधार किया और इसके लिए तीन पन्ने का शुद्धि पत्र लाते हुए जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून में सुधार करने की घोषणा की. संसद ने सात अगस्त को कानून पास किया था और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा इसे मंजूरी देने के बाद इसकी गजट अधिसूचना नौ अगस्त को जारी की गई.

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कानून में ‘‘एडमिनिस्ट्रेटर'' में ‘एन' के बाद ‘आई' शब्द छूट गया था, ‘‘आर्टिकल'' में ‘टी' के बाद ‘आई' छूट गया था, ‘‘टेरीटरीज'' में दो ‘टी' लग गए थे. सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम को अधिसूचित करने के दौरान जो 52 गलतियां हुई थीं, उनमें से ये कुछ उदाहरण हैं. कानून में इस बात का भी जिक्र था कि जम्मू-कश्मीर के संसदीय क्षेत्रों का परिसीमन किया जाएगा. शुद्धि पत्र में अब इस वाक्य को हटा दिया गया है.
 



(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)