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सिर्फ इंटर तक पढ़े और दुनिया भर में बना दिए सौ से अधिक मंदिर, अब अयोध्या में दिखाएंगे अपना हुनर

सिर्फ इंटर तक पढ़े वास्तुविद चंद्रकांत भाई सोमपुरा को मंदिरों के वास्तु कला विरासत में मिली, पद्मश्री से सम्मानित उनके दादा ने बनाई थी सोमनाथ मंदिर की डिजाइन

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सिर्फ इंटर तक पढ़े और दुनिया भर में बना दिए सौ से अधिक मंदिर, अब अयोध्या में दिखाएंगे अपना हुनर

अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर का मॉडल.

खास बातें

  1. मंदिर की लंबाई 270 मीटर और चौड़ाई 140 मीटर होगी
  2. मंदिर 125 मीटर ऊंचा होगा और इसमें कहीं लोहा नहीं लगेगा
  3. ढाई से तीन साल में बनकर तैयार हो जाएगा राम मंदिर
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के राम मंदिर-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद के मामले में अपना फैसला सुना दिया. इस फैसले से विवदित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है. अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार केंद्र सरकार तीन महीने में मंदिर के लिए योजना तैयार करेगी. इसके लिए बोर्ड ऑफ ट्रस्टी का गठन किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लोगों में जिज्ञासा है कि आखिर अयोध्या में भव्य राम मंदिर कैसा बनेगा? इसका जवाब जाने माने आर्किटेक्ट चंद्रकांत भाई सोमपुरा (Chandrakant Bhai Sompura) के पास है जिन्होंने अयोध्या के राम मंदिर की डिजाइन तैयार की है.

चंद्रकांत भाई सोमपुरा वही आर्किटेक्ट हैं जिन्होंने 30 साल पहले राम मंदिर की रेप्लिका बनाई थी. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक चंद्रकांत भाई सोमपुरा ने अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर की डिजाइन का खुलासा कर दिया है. यह मंदिर नागर शैली में बना अष्ट कोणीय होगा. मंदिर में भगवान राम की मूर्ति और राम दरबार होगा. इस मुख्य मंदिर के आगे-पीछे सीता, लक्ष्मण, भरत और भगवान गणेश के मंदिर होंगे. यह मंदिर अक्षरधाम मंदिर की शैली में बनेगा. मंदिर परिसर में संत निवास, शोध केंद्र, कर्मचारियों के आवास, भोजनालय वगैरह भी होंगे.


चंद्रकांत भाई सोमपुरा ने अयोध्या के राम मंदिर का जो नक्शा बनाया है उसके अनुसार यह मंदिर दो मंजिला का होगा. इस मंदिर की लंबाई 270 मीटर और चौड़ाई 140 मीटर होगी. मंदिर 125 मीटर ऊंचा होगा. मंदिर में जाने के लिए पांच दरवाजे होंगे. मंदिर में सिंह द्वार, नृत्य मंडप, रंग मंडप, कोली, गर्भ गृह और परिक्रमा मार्ग होगा. इस मंदिर के निर्माण में लोहे का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. इसके पीछे कारण यह है कि लोहा जंग लगने के कारण पत्थरों को कमजोर कर देता है. दो मंजिल के मंदिर में भगवान राम की प्रतिमा नीचे की मंजिल में होगी. ऊपरी मंजिल में राम दरबार होगा. मंदिर के फर्श में संगमरमर लगाया जाएगा. यह मंदिर 221 पिलर पर खड़ा होगा. मंदिर में आवागमन के लिए 24 द्वार बनाए जाएंगे. मंदिर के प्रत्येक खंभे पर 12 मूर्तियां उकेरी गई हैं. यह मूर्तियां देवी-देविताओं की हैं.

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बताया जाता है कि मंदिर के निर्माण में ढाई से तीन साल का समय लगेगा. मंदिर के लिए भरतपुर से पत्थर लाए जाएंगे. विश्व हिन्दू परिषद ने मंदिरों के भारतीय शिल्प शास्त्र के हिसाब से इस मंदिर का निर्माण कराने का फैसला लिया है. आम तौर पर मंदिर चौकोर होते हैं लेकिन अयोध्या के राम मंदिर का गर्भगृह अष्टकोणीय होगा, जो कि इसे अन्य मंदिरों से अलग पहचान देगा. इसकी परिक्रमा गोलाई में होगी. इसका शिखर भी अष्टकोणीय होगा.

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चंद्रकांत भाई के बनाए गए मंदिर के मॉडल को अयोध्या के कारसेवक पुरम में रखा गया है. यह स्थान विश्व हिंदू परिषद (विहिप) का मुख्यालय है. बताया जाता है कि मंदिर बनाने के लिए पत्थरों की तराशने का काम करीब 50 प्रतिशत पूरा हो चुका है. मंदिर के निर्माण के साथ-साथ शेष पत्थरों को तराशा जाता रहेगा. मंदिर की प्लिंथ में ग्रेनाइट पत्थर लगेगा. इस मंदिर के निर्माण पर 40 से 50 करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है. सरयू नदी से सटकर बनने वाले इस मंदिर की बुनियाद तैयार करने में करीब आठ माह लगेंगे.  इसके बाद पत्थरों को लगाने का काम शुरू किया जाएगा. पूरा मंदिर बनने में ढाई से तीन साल लग का समय लगेगा.

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चंद्रकांत भाई सोमपुरा को मंदिरों के डिजाइन बनाने और निर्माण में महारत हासिल है. सिर्फ इंटर तक पढ़े इस वास्तुविद को यह कला विरासत में अपने दादा से मिली. चंद्रकांत भाई सोमपुरा ने अब तक सौ से ज्यादा मंदिर बनाए हैं. उनका पूरा परिवार मंदिरों के निर्माण से जुड़ा रहा है. गांधीनगर, सिंगापुर, पीटसबर्ग और अमेरिका में मंदिरों के निर्माण में सोमपुरा के परिवार के सदस्य शामिल रहे हैं. चंद्रकांत भाई सोमपुरा ने लंदन के अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण मंदिर का नक्शा भी बनाया था. यह मंदिर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है. चंद्रकांत भाई के दादा प्रभाशंकर ने गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर की डिजाइन तैयार की थी. उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. गुजरात के पालिताणा शहर के निवासी चंद्रकांत भाई सोमपुरा के पिता ने उत्तराखंड के बद्रीनाथ मंदिर की मरम्मत का कार्य किया था.

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अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर की डिजाइन और निर्माण की जिम्मेदारी संभाल रहे आर्किटेक्ट चंद्रकांत भाई सोमपुरा.

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चंद्रकांत भाई ने युवावस्था में कदम रखते ही मंदिरों के निर्माण के लिए काम करना शुरू कर दिया था. वे जब 17 साल के थे तभी अपने पिता के साथ मंदिरों की मरम्मत का काम करने लगे थे. उनके पिता की दुर्घटना में मौत होने पर उन्होंने अपने दादा प्रभाशंकर सोमपुरा से मंदिरों के वास्तु का ज्ञान हासिल किया. चंद्रकांत भाई के समर्पण और मंदिरों की वास्तु कला में उनके ज्ञान को 1997 में सम्मान मिला और उन्हें सर्वश्रेष्ठ आर्किटेक्ट घोषित किया गया.

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