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राजस्थान में BSP के विधायकों का कांग्रेस में शामिल होना प्रियंका गांधी की इस रणनीति का हिस्सा?

उत्तर प्रदेश में बीएसपी के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दिकी को कांग्रेस पहले ही तोड़ चुकी है ऐसे में बीएसपी के लिए यह खतरा बन सकता है क्योंकि उसके पास 10 सांसद और 19 विधायक हैं. प्रियंका (Priyanka Gandhi Vadra) जिस तरह से उत्तर प्रदेश में सक्रिय हैं यह पार्टी की दलित राजनीति को नुकसान पहुंचा सकता है.

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राजस्थान में BSP के विधायकों का कांग्रेस में शामिल होना प्रियंका गांधी की इस रणनीति का हिस्सा?

लोकसभा चुनाव से पहले Priyanka Gandhi Vadra ने भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर से मिली थीं

खास बातें

  1. दलितों को वापस लाने की कोशिश में कांग्रेस
  2. कभी कांग्रेस का कोर वोट थे दलित
  3. बीएसपी ने बिगाड़ दिया था समीकरण
नई दिल्ली:

ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस ने अब पूरी तरह से महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) के प्लान पर काम करना शुरू कर दिया है. लोकसभा चुनाव में भले ही पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा हो लेकिन प्रियंका गांधी के पूर्वांचल का मोर्चा संभालते ही उनकी टीम ने दलित राजनीति पर फोकस करना शुरू कर दिया था. दलित और सवर्णों में कभी ब्राह्मण पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय कांग्रेस का कोर वोट बैंक हुआ करते थे. लेकिन बाद में राम मंदिर आंदोलन के उभार और बीएसपी जैसी क्षेत्रीय पार्टियों के आने के बाद से कांग्रेस दोनों ही वोट बैंक को संभाल कर नहीं रख पाई और नतीजा यह रह है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में कांग्रेस का पूरी तरह सफाया हो गया.  मध्य प्रदेश और राजस्थान और छत्तीसगढ़ में क्षेत्रीय पार्टियां न बन पाने की वजह से कांग्रेस ने अपना वजूद बनाए रखा. अब उत्तर प्रदेश में साल 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस पूरी कोशिश कर रही है कि किसी तरह दलितों को फिर से अपने पाले में लाया जाए. इसी प्लान के तहत प्रियंका गांधी ने दलितों के नए नेता बनने की कोशिश कर रहे भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर से मुलाकात की थी जब उनको आचार संहिता के उल्लंघन में गिरफ्तार किया गया था और वह अस्पताल में भर्ती थे. प्रियंका गांधी के चंद्रशेखर से मिलने की खबरों से नाराज मायावती (Mayawati) ने एक दिन पहले ही कांग्रेस को सपा-बसपा गठबंधन में शामिल न करने का ऐलान किया था जबकि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव इसके पक्ष में थे. 
 
क्या था लोकसभा चुनाव के समय का प्लान
लोकसभा चुनाव के समय कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रवक्ता एसपी सिंह कहा कि  हमने करीब 40 ऐसी सीटों को चिन्हित किया है जहां दलित मतदाताओं की संख्या 20 फीसदी से ज्यादा है. इनमें 17 आरक्षित सीटें भी शामिल हैं.' यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस की इस पहल से सपा-बसपा गठबंधन को सीधा नुकसान नहीं होगा तो सिंह ने कहा, ''यह गलत धारणा है सभी दलित वोट बसपा को मिलते हैं. उनके साथ आधे दलित वोटर जाते हैं, लेकिन शेष दूसरे दलों के साथ चले जाते हैं.  इसलिए इस पहल को गठबंधन को नुकसान पहुंचाने के प्रयास की दृष्टि से देखना पूरी तरह गलत है.'' उन्होंने कहा, ''हम उन वोटरों को अपने साथ लाने की कोशिश करेंगे जो पिछले चुनावों में किसी वजह से भाजपा की तरफ चले गए थे. हम दलित समाज को यह बताएंगे कि भाजपा आरक्षण खत्म करना चाहती है और संविधान बदलना चाहती है.'' इसके बाद प्रचार अभियान के दौरान ही प्रियंका गांधी ने एक कार्यकर्ता से बातचीत में पूछा कि विधानसभा चुनाव की तैयारी कैसी चल रही है.

BSP के 6 विधायकों को शामिल होना रणनीति का हिस्सा
राजस्थान में 6 विधायकों का कांग्रेस में शामिल होना इसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है. हालांकि राजस्थान में अभी कोई चुनाव नहीं है लेकिन राजस्थान का यह संदेश उत्तर प्रदेश के दलितों तक पहुंचाने की कोशिश होगी कि अब बीएसपी के लोग कांग्रेस की ओर लौट रहे हैं. विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि 'बसपा विधायकों ने उनसे मुलाकात की और विलय के बारे में एक पत्र उन्हें सौंपा.' बसपा के छह विधायकों में राजेंद्र सिंह गुढ़ा, जोगेंद्र सिंह अवाना, वाजिब अली, लखन सिंह मीणा, संदीप यादव और दीपचंद शामिल हैं.


मध्य प्रदेश में भी झटका
मध्य प्रदेश में भी लोकसभा चुनाव के समय बीएसपी के गुना-शिवपुरी संसदीय सीट से प्रत्याशी लोकेंद्र सिंह राजपूत पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे. खास बात यह है कि मायावती उस समय काफी नाराज हो गई थीं और बीएसपी ने मध्य प्रदेश सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी भी थी. लेकिन बाद में कमलनाथ ने बीएसपी सुप्रीमो को मना लिया था. खास बात यह है कि मध्य प्रदेश की तरह राजस्थान में भी कांग्रेस सरकार को बीएसपी का समर्थन मिला हुआ था.

इस बार क्या बोलीं मायावती
राजस्थान में बीएसपी के 6 विधायकों को टूटने के बाद बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुये कांग्रेस को गैर भरोसेमंद और धोखेबाज करार दिया है था. मायावती ने मंगलवार सुबह एक के बाद एक तीन ट्वीट किये. उन्होंने पहला ट्वीट किया, ‘‘राजस्थान में कांग्रेस पार्टी की सरकार ने एक बार फिर बसपा के विधायकों को तोड़कर गैर-भरोसेमन्द एवं धोखेबाज पार्टी होने का प्रमाण दिया है. यह बसपा मूवमेन्ट के साथ विश्वासघात है जो दोबारा तब किया गया है जब बसपा वहां कांग्रेस सरकार को बाहर से बिना शर्त समर्थन दे रही थी.' मायावती ने इसके बाद एक अन्य ट्वीट किया, ‘‘कांग्रेस हमेशा ही बाबा साहेब डॉ. भीमराव आम्बेडकर एवं उनकी मानवतावादी विचारधारा की विरोधी रही. इसी कारण डॉ. आम्बेडकर को देश के पहले कानून मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. कांग्रेस ने उन्हें न तो कभी लोकसभा में चुनकर जाने दिया और न ही भारतरत्न से सम्मानित किया. अति-दुःखद एवं शर्मनाक.'

क्या बीएसपी को तोड़ना अब प्रियंका की रणनीति का हिस्सा
उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी कांग्रेस के किसी भी नेता से बहुत ज्यादा सक्रिय हैं और वह योगी सरकार पर लगातार हमले भी कर रही हैं. साथ ही वह दलित, पिछड़े और आदिवासियों के मुद्दे पर भी फोकस कर रही हैं. उत्तर प्रदेश में बीएसपी के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दिकी को कांग्रेस पहले ही तोड़ चुकी है ऐसे में बीएसपी के लिए यह माहौल और खतरा बन सकता है कि क्योंकि उसके पास 10 सांसद और 19 विधायक हैं. प्रियंका जिस तरह से उत्तर प्रदेश में सक्रिय हैं यह पार्टी की दलित राजनीति को नुकसान पहुंचा सकता है. 
 

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