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19 केस और दर्जन भर से ज्यादा ट्रांसफर झेलने वाले मैग्सेसे विजेता IFS संजीव चतुर्वेदी को हटाने के लिए PM मोदी ने किया था फोन?

RTI के तहत मिले दस्तावेज के मुताबिक तत्कालिन स्वास्थ्य सचिव लव वर्मा का D.O NO File No:V-16020/36/2009-ME-I नंबर का एक पत्र प्रधानमंत्री के उस वक्त के प्रिंसिपल सचिव पीके मिश्रा को 23 अगस्त 2014 को लिखा गया.

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19 केस और दर्जन भर से ज्यादा ट्रांसफर झेलने वाले मैग्सेसे विजेता IFS संजीव चतुर्वेदी को हटाने के लिए PM मोदी ने किया था फोन?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फाइल तस्वीर)

खास बातें

  1. RTI में हुआ खुलासा
  2. AIIMS के CVO पद पर रहे थे संजीव चतुर्वेदी
  3. AIIMS में 200 से ज्यादा भ्रष्टाचार के मामलों का किया था खुलासा
नई दिल्ली:

19 मुकदमें और दर्जन भर से ज्यादा ट्रांसफर झेल चुके मैग्सेसे अवार्ड विजेता नौकरशाह संजीव चतुर्वेदी को हटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन से टेलीफोन पर बात की थी. ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि हालिया सूचना के अधिकार के तहत मिले दस्तावेज इस ओर इशारा कर रहे हैं. इंडियन फोरेस्ट सर्विसेज यानि IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी 2012 से लेकर 2014 तक अखिल भारतीय आयुर्विद संस्थान (AIIMS) के मुख्य सतर्कता अधिकारी के तौर पर कार्यरत रहे. इन दो साल के कार्यकाल के दौरान AIIMS में 200 से ज्यादा भ्रष्टाचार के मामलों को उन्होंने उजागर किया. जिसमें IAS अधिकारी विनीत चौधरी से लेकर IPS अधिकारी शैलेश यादव तक पर इसकी आंच आई थी. इसके चलते वो सरकार से लेकर नौकरशाहों तक की आंखों की किरकिरी बन गए थे.

RTI के तहत मिले दस्तावेज के मुताबिक तत्कालिन स्वास्थ्य सचिव लव वर्मा का D.O NO File No:V-16020/36/2009-ME-I नंबर का एक पत्र प्रधानमंत्री के उस वक्त के प्रिंसीपल सचिव पीके मिश्रा को 23 अगस्त 2014 को लिखा गया, जिसमें कहा गया कि डिप्टी सचिव और CVO संजीव चतुर्वेदी को कार्यमुक्त करने के बाबत प्रधानमंत्री की स्वास्थ्य मंत्री से फोन पर बातचीत हुई. इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री ने AIIMS के उस वक्त के CVO संजीव चतुर्वेदी को जबरन छुट्टी पर भेज दिया.

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यूपी के इस IAS अधिकारी के खिलाफ जांच के आदेश, जानें- क्या है पूरा मामला

साल 2012 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद के कार्यकाल में हरियाणा कॉडर के IFS  अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को AIIMS का CVO नियुक्त किया गया. CVO नियुक्त होने से पहले हरियाणा के DFO रहते हुए संजीव चतुर्वेदी ने हरियाणा में भी भ्रष्टाचार के कई मामलों को उजागर किया. जिससे तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ उनकी नहीं बनती थी. AIIMS के CVO रहते हुए संदीव चतुर्वेदी ने AIIMS के डिप्टी डायरेक्टर विनीत चौधरी के खिलाफ जांच के आदेश दिए. विनीत चौधरी पर आरोप लगे थे कि 2010 से लेकर 2012 तक AIIMS के डवलपमेंट वर्क और झज्जर में बन रहे कैंसर अस्पताल में मानकों को ताक पर रखकर काम करवाए गए. कथित तौर पर विनीत चौधरी ने उस वक्त AIIMS के सुपरिडेंटेड इंजीनियर और इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के मुखिया बीएस आनंद का कार्यकाल बढ़वाया और कैंसर अस्पताल बनाने में फंड का दुरुपयोग किया गया. इस जांच के आधार पर बीएस आनंद को बर्खास्त कर दिया गया. जांच आगे बढ़ी तो कई अधिकारी घेरे में आने लगे, इसी बीच केंद्र में बीजेपी आई और स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन को बनाया गया. लेकिन इस बीच AIIMS के CVO की शिकायत पर विनीत चौधरी के खिलाफ CBI ने केस दर्ज कर लिया. 

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मई 2014 में डॉ हर्षवर्धन के स्वास्थ्य मंत्री बनने के एक महीना बाद जेपी नड्डा ने 24 जून 2014 को पत्र (संख्या 11/06/MPHFW/14) लिखा जिसमें कहा गया कि संजीव चतुर्वेदी को AIIMS का CVO बनाने में नियमों का उल्लंघन किया गया और इनको तुरंत अपने कॉडर में वापस भेजा जाए और CVO रहने के दौरान कराई जा रही जांच को रोका जाए. संजीव चतुर्वेदी के स्थान पर जब कोई नया चीफ विजीलेंस ऑफिसर आएगा तब उसके विवेक पर है कि वो जांच कराए या न कराए. जेपी नड्डा के इस पत्र के बाद प्रधानमंत्री खुद स्वास्थ्य मंत्री को फोन करके संजीव चतुर्वेदी को रिलीव करने को कहते हैं. उसके बाद संजीव चतुर्वेदी को जबरन छुट्टी पर भेजा जाता है और दो महीने बाद डॉ. हर्षवर्धन की छुट्टी करके जेपी नड्डा को स्वास्थ्य मंत्री बना दिया जाता है.

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जेपी नड्डा क्यों विनीत चौधरी को बचाना चाहते थे?

दरअसल, विनीत चौधरी हिमाचल कॉडर के IAS अधिकारी रहे हैं. हिमाचल सरकार में जब जेपी नड्डा स्वास्थ्य मंत्री थे, तब उस वक्त विनीत चौधरी स्वास्थ्य सचिव हुआ करते थे. उसके बाद विनीत चौधरी तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद के नजदीकी रहे और AIIMS के डिप्टी डायरेक्टर बन गए. जेपी नड्डा के स्वास्थ्य मंत्री बनते ही विनीत चौधरी के खिलाफ चल रही जांच सुस्त पड़ गई. CBI ने अपने नोट में लिखा कि विनीत चौधरी के खिलाफ जांच में सबूत नहीं मिल सके क्योंकि विभागों ने जांच के दौरान संबंधित दस्तावेज नहीं उपलब्ध कराए. दो साल बाद दिल्ली हाईकोर्ट में स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ विनीत चौधरी को क्लीन चिट का हलफनामा फाइल कर दिया. सभी जांच खत्म हो गई और विनीत चौधरी हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव पद से पिछले साल रिटायर हो गए.



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