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जस्टिस दीपक मिश्रा द्वारा दिए गए 5 वे आदेश जिन्होंने उन्हें चर्चा में ला दिया...

आइए जानें, मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मिश्रा द्वारा दिए गए 5 वे आदेश जिन्होंने उन्हें चर्चा में ला दिया

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जस्टिस दीपक मिश्रा द्वारा दिए गए 5 वे आदेश जिन्होंने उन्हें चर्चा में ला दिया...

जस्टिस दीपक मिश्रा (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: जस्टिस दीपक मिश्रा ने आज देश के नए मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को उन्हें देश के 45वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ दिलाई. जस्टिस दीपक मिश्रा तीन अक्टूबर 2018 को रिटायर होंगे. दीपक मिश्रा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बनने वाले ओडिशा की तीसरे न्यायाधीश होंगे.  जस्टिस मिश्रा अपने कई फैसलों के चलते चर्चा में रहे लेकिन सबसे अधिक चर्चा उनकी उस फैसले से हुई जिसमें उन्होंने सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान अनिवार्य कर दिया था.

आइए जानें, जस्टिस मिश्रा द्वारा दिए गए 5 वे आदेश जिन्होंने उन्हें चर्चा में ला दिया

थियेटर में राष्ट्रगान अनिवार्य किया...
पिछले साल 30 नवंबर को जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आदेश दिया था कि पूरे देश में सिनेमा घरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान चलाया जाए. इस आदेश के बाद हालांकि इस पर कई लोगों के विचार उनके फैसले से अलग थे लेकिन अंतत: इसे लोगों ने दोनों बाहें खोलकर स्वीकार किया. आज की तारीख में थियेटर में जब नेशनल एंथम बजता है तब सिनेमा हॉल में मौजूद तमाम लोग खड़े होते हैं.

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पुलिस FIR की कॉपी 24 घंटों के भीतर वेबसाइट पर डाले...
पिछले ही साल 7 सितंबर को जस्टिस मिश्रा और जस्टिस सी नगाप्पन की बेंच ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया था FIR की कॉपी 24 घंटों के अंदर अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दें. बात दें कि जस्टिस मिश्रा जब दिल्ली के चीफ़ जस्टिस थे तब 6 दिसंबर, 2010 को उन्होंने दिल्ली पुलिस को भी ऐसे ही आदेश दिए थे.


पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक मिश्रा, जिन्‍होंने दो दिनों में सुनाई पांच सजा-ए-मौत...

आपराधिक मानहानि की संवैधानिकता बरकरार...
पिछले साल मई में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आपराधिक मानहानि के प्रावधानों की संवैधानिकता को बरकरार रखने का आदेश सुनाया था. इस बेंच में जस्टिस मिश्र भी थे. यह निर्णय सुब्रमण्यन स्वामी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और अन्य बनाम यूनियन के केस में सुनाया गया था. बेंच का कहना था कि अभिव्यक्ति का अधिकार असीमित नहीं है

याकूब मेमन की फांसी...
याकूब मेमन ने फांसी से ठीक पहले अपनी सज़ा पर रोक लगाने की याचिका डाली थी. साल 1993 के मुंबई धमाकों में याकूब मेमन को दोषी ठहराया गया था. जुलाई 2013 की उस रात को अदालत खुली थी. सुबह 5 बजे जस्टिस मिश्र ने फैसला सुनाया, 'फांसी के आदेश पर रोक लगाना न्याय की खिल्ली उड़ाना होगा. याचिका रद्द की जाती है.'

वीडियो- जरूरतमंदों को मिलेगी कानून मदद, दिल्ली में शुरू हुआ न्याय संयोग


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मायावती सरकार की प्रमोशन में आरक्षण की नीति पर रोक..
उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार द्वारा लागू की गई प्रमोशन में आरक्षण की नीति पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रोक लगा दी थी. इसे लेकर मामला जब सुप्रीम कोर्ट आया तो सुप्रीम कोर्ट ने इसे रोक को कायम रखा. अप्रैल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया था. दो जजों की इस बेंच में दीपक मिश्रा भी शामिल थे.

इनपुट : एजेंसियां


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