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नागरिकता कानून (CAA) पर कपिल सिब्बल और सलमान खुर्शीद के बयानों के बीच फंसी कांग्रेस?

एक ओर चर्चा है कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें वहां नागरिकता कानून के खिलाफ प्रस्ताव पास किया जाएगा. लेकिन इसी बीच पार्टी के दो वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल और सलमान खान खुर्शीद के बयानों से कनफ्यूजन की स्थिति बन गई है.

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नागरिकता कानून (CAA) पर कपिल सिब्बल और सलमान खुर्शीद के बयानों के बीच फंसी कांग्रेस?

CAA कानून को लागू करने से मना नहीं कर सकते हैं राज्य : कपिल सिब्बल

खास बातें

  1. नागरिकता कानून केंद्र से जुड़ा मसला
  2. राज्य सरकारें लागू करने से नहीं कर सकते हैं मना
  3. कपिल सिब्बल और सलमान खुर्शीद ने भी कही यह बात
नई दिल्ली:

ऐसा लग रहा है कि नागरिकता कानून (CAA) को लेकर क़ानूनी और राजनीतिक नज़रिए के बीच कांग्रेस फंसती नजर आ रही है. एक ओर चर्चा है कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें वहां नागरिकता कानून के खिलाफ प्रस्ताव पास किया जाएगा. लेकिन इसी बीच पार्टी के दो वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल और सलमान खान खुर्शीद के बयानों से कनफ्यूजन की स्थिति बन गई है. दरअसल कपिल सिब्बल ने कहा है कि संवैधानिक रूप से कोई भी राज्य सरकार इस कानून को लागू करने से मना नहीं कर सकती है क्योंकि यह संसद से पास हो चुका है. उनकी इस बात का सलमान खुर्शीद ने भी दोहराया है लेकिन उन्होंने यह भी कानून का परीक्षण अदालत में हो सकता है और मामला सुप्रीम कोर्ट में है और जब तक इस पर फैसला नहीं हो जाता है यह अस्थाई है. वहीं केरल सरकार के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के मुद्दे पर राज्य सरकार और राज्यपाल के मध्य तकरार के बीच कांग्रेस ने कहा कि राज्यों को केंद्र से असहमत होने का अधिकार है और जब तक मुद्दे का अदालत में फैसला नहीं हो जाता, उन्हें ‘‘असंवैधानिक कानून'' लागू करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है.

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कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि सीएए भारत के संविधान पर हमला है और इसके खिलाफ लोगों का आंदोलन 'बहादुरी और निर्भीकता' के साथ चलता रहेगा. कांग्रेस का बयान पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के बयान के एक दिन बाद आया जिसमें उन्होंने कहा कि राज्य सीएए को लागू करने से तब मना नहीं कर सकते क्योंकि संसद से पहले ही यह पारित हो चुका है. हालांकि, सिब्बल ने यह भी कहा कि राज्य विधानसभाओं को प्रस्ताव पारित करने और सीएए को वापस लेने या बदलाव करने का अनुरोध करने का संवैधानिक अधिकार है परंतु सुप्रीम कोर्ट द्वारा कानून को संवैधानिक करार दिए जाने पर विरोध करना मुश्किल होगा. 

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इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने अहमदाबाद में कहा कि पार्टी द्वारा शासित राज्यों की विधानसभाओं में सीएए को लागू करने के खिलाफ प्रस्ताव लाने पर विचार किया जाएगा. उन्होंने कहा कि राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ भी पंजाब का अनुकरण कर सकते हैं जिसने अपनी विधानसभा में सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है. 

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वहीं सुरजेवाला ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह संप्रदायवाद, कट्टरता और धर्मांधता के जीवंत प्रतीक हैं जिसका इस्तेमाल वे भारत के मूल्यों और संविधान पर हमला करने के लिए करते हैं.' उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी और शाह सीएए का प्रयोग भ्रम की स्थिति पैदा करने और विभाजन कर राज करने के लिए कर रहे हैं. सुरजेवाला ने कहा, 'राज्यों पर सीएए को लागू करने के लिए दबाव डालने के लिए गृहमंत्री अमित शाह और राज्यपालों द्वारा लगातार दिए जा रहे बयान असंगत हैं संवैधानिक संघवाद के सिद्धांत के खिलाफ है.' 

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कांग्रेस प्रवक्ता की टिप्पणी ऐसे समय आई जब केरल में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद और राज्य सरकार के बीच पिछले महीने विधानसभा में सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पारित होने के बाद से ही गतिरोध बना हुआ है. सुरजेवाला ने कहा, 'बीजेपी सरकार और उसके राज्यपालों को यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत राज्यों का संघ है. स्थापित संसदीय परिपाटी के मुताबिक राज्य केंद्र से असहमत हो सकते हैं और वे अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल कर संविधान के अनुच्छेद-131 के तहत चुनौती दे सकते हैं.' उन्होंने कहा कि पहले भी कर्नाटक, बिहार, राजस्थान जैसे कई राज्यों ने भारत सरकार के साथ विभिन्न मुद्दों पर विवाद होने पर समाधान के लिए अनुच्छेद-131 के तहत उच्चतम न्यायालय का रुख किया था. सुरजेवाला ने कहा, 'जब तक अनुच्छेद-131 के तहत दायर याचिका का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक राज्य सीएए जैसे अंसवैधानिक कानून को लागू करने के लिए बाध्य नहीं है. दरअसल नागरिकता कानून  के मुद्दे पर कांग्रेस यह दिखाना चाहती है कि कानून की बाध्यताएं अपनी जगह पर होंगी लेकिन इस मुद्दे पर उसकी जो नीति है वह उस पर कायम रहते हुए विरोध जारी रखेगी. (इनपुट भाषा से भी)

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