कपिल सिब्बल ने PM मोदी से कहा- तस्वीरें कम खिंचवाइए, अभिजीत बनर्जी को सुनिए और काम पर लग जाइए

अभिजीत बनर्जी ने सोमवार को कहा था कि सरकार द्वारा तेजी से समस्या की पहचान करने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था “बहुत बुरा (प्रदर्शन) कर” रही है.

कपिल सिब्बल ने PM मोदी से कहा- तस्वीरें कम खिंचवाइए, अभिजीत बनर्जी को सुनिए और काम पर लग जाइए

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल.

खास बातें

  • कपिल सिब्बल ने कसा तंज
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर किया कटाक्ष
  • कहा कि अब मोदी को काम पर लग जाना चाहिए
नई दिल्ली:

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने नोबेल पुरस्कार के लिए चयनित अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी (Abhijit Banerjee) के कुछ कथनों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर मंगलवार को कटाक्ष करते हुए कहा कि अब मोदी को काम पर लग जाना चाहिए और तस्वीरें कम खिंचवानी चाहिए.' सिब्बल ने ट्वीट किया, 'क्या मोदी जी सुन रहे हैं? अभिजीत बनर्जी ने कहा है: भारतीय अर्थव्यवस्था डगमगाती स्थिति में है, आंकड़ों में राजनीतिक हस्तक्षेप होता है, औसत शहरी एवं ग्रामीण उपभोग घट गया है जो सत्तर के दशक के बाद कभी नहीं हुआ और हम सब संकट में हैं.' उन्होंने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा, ‘काम पर लग जाइए, तस्वीरें कम खिंचवाइए.' 

गौरतलब है कि भारतीय-अमेरिकी अभिजीत बनर्जी को वर्ष 2019 के लिए अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है. उन्हें यह पुरस्कार फ्रांस की एस्थर डुफ्लो और अमेरिका के माइकल क्रेमर के साथ संयुक्त रूप से दिया जाएगा. उन्हें यह पुरस्कार वैश्विक स्तर पर गरीबी उन्मूलन के लिए किये गये कार्यों के लिये मिलेगा. 

बता दें, अभिजीत बनर्जी ने सोमवार को कहा था कि सरकार द्वारा तेजी से समस्या की पहचान करने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था “बहुत बुरा (प्रदर्शन) कर” रही है. नोबेल पुरस्कार के लिए नाम की घोषणा के बाद बनर्जी ने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, “मेरे विचार से अर्थव्यवस्था बहुत खराब कर रही है.” जब उनसे भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति और उसके भविष्य के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “यह बयान भविष्य में क्या होगा, उस बारे में नहीं है, बल्कि जो हो रहा है उसके बारे में है. मैं इसके बारे में एक राय रखने का हकदार हूं.”

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भारत के शहरी और ग्रामीण इलाकों में औसत खपत के अनुमान बताने वाले राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “हम जो तथ्य देख रहे हैं, उसके मुताबिक 2014-15 और 2017-18 के बीच आंकड़े थोड़े कम हुए हैं.” उन्होंने कहा, “ऐसा कई, कई, कई, कई, कई सालों में पहली बार हुआ है, तो यह एक बहुत ही बड़ी चेतावनी का संकेत है.” उन्होंने कहा कि भारत में एक बहस चल रही है कि कौन सा आंकड़ा सही है और सरकार का खासतौर से यह मानना है कि वो सभी आंकड़े गलत हैं, जो असुविधाजनक हैं.

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साथ ही उन्होंने कहा, “लेकिन मुझे लगता है कि सरकार भी अब यह मानने लगी है कि कुछ समस्या है. अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से धीमी हो रही है. कितनी तेजी से, यह हमें नहीं पता है, आंकड़ों को लेकर विवाद हैं, लेकिन मुझे लगता है कि यह तेज है.” उन्होंने कहा कि उन्हें ठीक-ठीक नहीं पता है कि क्या करना चाहिए. उन्होंने कहा कि उनके विचार में जब अर्थव्यवस्था “अनियंत्रित गिरावट” की ओर जा रही है, तो ऐसे में आप मौद्रिक स्थिरता के बारे में इतनी चिंता नहीं करते हैं और इसकी जगह मांग के बारे में थोड़ा अधिक चिंता करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि अब अर्थव्यवस्था में मांग एक बड़ी समस्या है.

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(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)