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जिन पर 'थ्री इडियट' फिल्म बनी वे अब जलवायु परिवर्तन के खिलाफ ग्लोबल मुहिम शुरू करेंगे

सोनम वांगचुक का दावा- वायु प्रदूषण से दुनिया में हर साल 7 से 10 मिलियन लोग मारे जा रहे, जबकि दोनों विश्व युद्धों के दौरान हर साल औसतन 10 मिलियन लोग मारे गए थे

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जिन पर 'थ्री इडियट' फिल्म बनी वे अब जलवायु परिवर्तन के खिलाफ ग्लोबल मुहिम शुरू करेंगे

सोनम वांगचुक गांधी जयंती पर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ ग्लोबल मुहिम शुरू करेंगे.

खास बातें

  1. आम लोगों को लाइफस्टाइल बदलने के लिए प्रेरित करेगा अभियान
  2. सोनम वांगचुक ने कहा- सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध बेहद जरूरी
  3. अब वायु प्रदूषण के साथ-साथ हर तरह के प्रदूषण से जंग छेड़ी जाए
नई दिल्ली:

दो अक्टूबर को देश में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के खिलाफ मुहिम की शुरुआत हो रही है. उसी दिन रेमन मैगसेसे अवार्ड विजेता सोनम वांगचुक जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक नई ग्लोबल मुहिम "#Ilivesimply movement" की शुरुआत कर रहै हैं. वांगचुक का दावा है कि वायु प्रदूषण से दुनिया में हर साल 7 से 10 मिलियन लोग मारे जा रहे हैं. दोनों विश्व युद्धों के दौरान भी हर साल औसतन 10 मिलियन लोग मारे गए थे. गौरतलब है कि लोकप्रियता के कीर्तिमान बनाने वाली फिल्म 'थ्री इडियट' सोनम वांगचुक पर ही बनाई गई है. 

गांधी जी की 150वीं जयंती पर सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ देश व्यापी अभियान शुरू हो रहा है. इसी दिन रेमन मैगसेसे अवार्ड विजेता सोनम वांगचुक जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक ग्लोबल कैंपेन की शुरुआत कर रहे हैं जो आम लोगों को लाइफस्टाइल बदलने के लिए प्रेरित करेगा. यह सिंगल यूज़ प्लास्टिक के खिलाफ मुहिम का हिस्सा है.

मैगसेसे अवार्ड विजेता सोनम वांगचुक का कहना है कि 'सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध बेहद जरूरी है. लद्दाख में 50 साल पहले एक परंपरा थी कि लोक पॉकेट में अपना कप लेकर चलते थे.  आज लोग उसे लेकर चलना भूल गए हैं. मैं एक स्टील फ्लास्क लेकर चलता हूं. जहां जरूरत होती है तो काफी पी लेता हूं. खाना बच जाता है तो उसमें स्टोर कर लेता हूं और बाद में गर्म करके खा लेता हूं. मैं एक कॉटन बैग भी लेकर चलता हूं. जो फोल्डर जैसा है. इनके इस्तेमाल से प्लास्टिक का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.'


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वांगचुक एक आइस स्तूप तकनीक विकसित करके आर्टिफीशियल ग्लेशियर तैयार कर चुके हैं, जिनका इस्तेमाल लद्दाख में पानी संकट दूर करने के लिए किया गया है. वांगचुक पंजाब से पराली ले जाकर लद्दाख में उसे चिकनी मिट्टी में मिलाकर भवन निर्माण की सामग्री के तौर पर इस्तेमाल कर चुके हैं जिससे घर को सूरज की गर्मी से गर्म रखा जा सकता है.

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सोनम वांगचुक कहते हैं कि 'अगर राइस स्टॉ को चिकनी मिट्टी से मिलाएं तो एक इंसूलेटिंग भवन निर्माण की सामग्री बन जाती है. इससे घर बनाएं तो वह सूरज की गर्मी से ही गर्म हो सकता है. हमने लद्दाख में पंजाब से राइस स्टॉ ले जाकर ऐसा घर बनाया है.'

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वांगचुक कहते हैं कि दोनों विश्व युद्ध के दौरान औसतन साल में जितने लोग गए, तकरीबन उतने ही लोग आज दुनिया में हर साल वायु प्रदूषण की वजह से मारे जा रहे हैं. अब समय आ गया है कि वायु प्रदूषण के साथ-साथ हर तरह के प्रदूषण से जंग छेड़ी जाए.

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