NDTV Khabar

महाराष्ट्र में दोहराया जा रहा 41 साल पुराना इतिहास, अब चाचा की जगह भतीजा हुआ बागी

अजित पवार की बगावत और शरद पवार की दो दलों को साथ लेकर सरकार बनाने की जुगत ने 41 साल पहले की कहानी याद दिला दी

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
महाराष्ट्र में दोहराया जा रहा 41 साल पुराना इतिहास, अब चाचा की जगह भतीजा हुआ बागी

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने 41 साल पहले दो दलों की गठबंधन सरकार गिरा दी थी.

खास बातें

  1. शरद पवार ने कांग्रेस के दो धड़ों द्वारा बनाई गई सरकार गिरा दी थी
  2. एनसीपी नेता अजित पवार ने बगावत करके बीजेपी से हाथ मिला लिया
  3. शरद पवार मुख्यमंत्री बन गए थे, अजित पवार उप मुख्यमंत्री बने
नई दिल्ली:

महाराष्ट्र (Maharashtra) में राजनीतिक भूचाल लाने वाला आज का घटनाक्रम 41 साल पुरानी घटना की याद दिला रहा है. बस फर्क सिर्फ इतना है कि 41 वर्ष पहले जिस स्थान पर चाचा थे आज उस स्थान पर भतीजा है. चाचा ने तब मुख्यमंत्री पद हासिल किया था, भतीजे को उप मुख्यमंत्री पद मिला है. महाराष्ट्र में जैसे इतिहास दोहराया जा रहा है. चार दशक पहले जिस रास्ते पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) ने चले थे आज वही रस्ता उनके भतीजे अजित पवार (Ajit Pawar) ने अपनाया.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता अजित पवार (Ajit Pawar) ने बगावत करके बीजेपी से हाथ मिला लिया है. उनका यह फैसला उनके चाचा शरद पवार (Sharad Pawar) की 41 साल पहले की कहानी याद दिलाता है. तब शरद पवार ने कांग्रेस के दो धड़ों द्वारा बनाई गई सरकार को गिरा दी थी और महराष्ट्र के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने थे.

शरद पवार (Sharad Pawar) ने सन 1978 में जनता पार्टी और पीजेन्ट्स वर्कर्स पार्टी की गठबंधन सरकार का नेतृत्व किया था. यह सरकार दो वर्ष से भी कम समय तक चली थी. संयोग से इस बार भी वे राज्य में कांग्रेस और शिवसेना से हाथ मिलाकर इसी तरह का गठबंधन तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं. अजित पवार ने शनिवार की सुबह उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जिस पर पवार ने कहा कि बीजेपी को समर्थन देने के निर्णय का उन्होंने समर्थन नहीं किया है और यह उनके भतीजे का व्यक्तिगत फैसला है.


शरद पवार का फूटा गुस्सा, विधायक दल के नेता पद से अजित पवार को हटाया, जयंत पाटिल बने नए नेता

वास्तव में वर्ष 1978 में अपनी पार्टी बनाकर उसे एक दशक तक चलाने के शरद पवार (Sharad Pawar) के निर्णय के कारण राजनीतिक हलकों में उन्हें प्रभावशाली नेता कहा जाने लगा. शरद पवार ने अपनी किताब ‘ऑन माई टर्म्स' में लिखा है कि 1977 में आपातकाल के बाद के चुनावों में राज्य और देश में इंदिरा विरोधी लहर से कई लोग स्तब्ध थे. पवार के गृह क्षेत्र बारामती से चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी वीएन गाडगिल हार गए. इंदिरा गांधी ने जनवरी 1978 में कांग्रेस का विघटन कर दिया और कांग्रेस (एस - सरदार स्वर्ण सिंह की अध्यक्षता वाली) से अलग होकर कांग्रेस (इंदिरा) का गठन किया. पवार कांग्रेस (एस) के साथ बने रहे और उनके राजनीतिक मार्गदर्शक यशवंतराव चव्हाण भी इसी पार्टी में थे.

महाराष्ट्र सरकार का गठन : शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

एक महीने बाद राज्य विधानसभा चुनावों में कांग्रेस (एस) ने 69 सीटों और कांग्रेस (आई) ने 65 सीटों पर जीत दर्ज की. जनता पार्टी ने 99 सीटें जीतीं. इस तरह किसी भी एक दल को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हुआ. कांग्रेस के दोनों धड़ों ने मिलकर कांग्रेस (एस) के वसंतदादा पाटिल के नेतृत्व में सरकार का गठन किया, जिसमें कांग्रेस (आई) के नासिकराव तिरपुदे उप मुख्यमंत्री बने.

महाराष्ट्र में हुआ 'तख्तापलट' एनसीपी के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बना, 5 विधायक गायब

सरकार तो बन गई लेकिन कांग्रेस के दोनों धड़ों के बीच टकराव जारी रहा जिससे सरकार चलाना कठिन हो गया था. शरद पवार (Sharad Pawar) ने सरकार छोड़ने का निर्णय लिया. जनता पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर के साथ उनके संबंधों के कारण उन्हें काफी सहयोग मिला. चंद्रशेखर ने पवार से कहा, ‘‘इसमें आपको महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी.'' इसके मुताबिक पवार ने विधायकों का समर्थन जुटाना शुरू कर दिया. बाद में सुशील कुमार शिंदे, दत्ता मेघे और सुंदरराव सोलंकी ने मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया.

महाराष्ट्र में कैसे पलट गई बाजी, कैसे फिर से सीएम की कुर्सी पर पहुंचे फडणवीस? यह है पर्दे के पीछे का खेल

उल्लेखनीय है कि शिंदे आगे चलकर राज्य के मुख्यमंत्री और फिर केंद्रीय गृह मंत्री बने. शरद पवार ने कांग्रेस के 38 विधायकों के साथ मिलकर नई सरकार बनाई जिसे समानांतर सरकार कहा जाता है. शरद पवार (Sharad Pawar) तब 38 वर्ष की उम्र में राज्य के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने थे. वरिष्ठ पत्रकार अनंत बगैतकार के मुताबिक नई सरकार जनता पार्टी, पीजेंट वर्कर्स पार्टी और अन्य छोटे दलों की गठबंधन सरकार थी. शरद पवार लिखते हैं, ‘‘सदन में जब पूरक मांगों पर चर्चा चल रही थी, सरकार अल्पमत में आ गई थी जिसके बाद मुख्यमंत्री वसंतदादा पाटिल ने अपना इस्तीफा सौंप दिया.'' बहरहाल, 1980 में इंदिरा गांधी के सत्ता में लौटते ही (पवार नीत) सरकार को बर्खास्त कर दिया गया.

महाराष्ट्र में इस तरह सरकार बनाना अलोकतांत्रिक, बीजेपी ने किया जनादेश का अपमान: AAP

राजनीतिक विश्लेषक सुहास पालसीकर ने एक मराठी पत्रिका में शरद पवार (Sharad Pawar) पर लिखे परिचय ‘पवार के नाम पर एक अध्याय' में लिखा कि पवार ने एक दशक से अधिक समय तक पार्टी का नेतृत्व किया और राजीव गांधी के नेतृत्व के तहत अपनी मूल पार्टी में लौट आए. पालसीकर ने लिखा, ‘‘चूंकि उन्होंने अपनी पार्टी गठित करने का निर्णय किया और इसे एक दशक तक चलाया जिससे उन्हें प्रभावशाली नेता की छवि हासिल करने में मदद मिली.''


महाराष्ट्र में सरकार के गठन के बाद दिग्विजय सिंह ने शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी को दे डाली यह सलाह

VIDEO : अजित पवार के फैसले से खुश नहीं एनसीपी

टिप्पणियां

(इनपुट भाषा से)



Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें.


 Share
(यह भी पढ़ें)... Republic Day 2020 Hindi Shayari: एक-दूसरे को इन शायरी से दें गणतंत्र दिवस की बधाई

Advertisement