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NCP के अजीत पवार बनेंगे महाराष्ट्र के डिप्टी CM, 30 दिसंबर को होगा कैबिनेट विस्तार- सूत्र

एनसीपी के अजीत पवार महाराष्ट्र में शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी सरकार में डिप्टी सीएम बनाया जाएगा. सूत्रों के हवाले से खबरें आ रही हैं कि 30 दिसंबर को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे अपने कैबिनेट में विस्तार करेंगे.

NCP के अजीत पवार बनेंगे महाराष्ट्र के डिप्टी CM, 30 दिसंबर को होगा कैबिनेट विस्तार- सूत्र

उद्धव ठाकरे की सरकार में अजित पवार बनेंगे उप मुख्यमंत्री- (फाइल फोटो)

नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता अजित पवार एक बार फिर उप मुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण करने जा रहे हैं. हालांकि इस बार वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की सरकार के अंतर्गत शपथ ग्रहण करेंगे. एनसीपी के मुखिया शरद पवार के भतीजे अजित पवार इसी महीने 30 दिसंबर को उप मुख्यमंत्री पद के लिए शपथ लेंगे. इससे पहले उन्होंने बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के साथ डिप्टी सीएम पद के लिए शपथ ग्रहण किया था. हालांकि बीजेपी सरकार 80 घंटे से ज्यादा तक नहीं टिक सकी और सरकार गिर गई. उस वक्त अजित पवार बहुमत हासिल करने के लिए बीजेपी के लिए विधायक लाने में असफल रहे थे. फिलहाल अजित पवार को कोई नुकसान नहीं हुआ और वह महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम की कुर्सी पर बैठने जा रहे हैं.

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फडणवीस और अजित पवार के बीच क्या हुई थी बातचीत?

देवेंद्र फडणवीस ने अजित पवार पर आखिर क्यों भरोसा कर अपनी छीछालेदर करवाई की, ये सवाल अब भी बना हुआ है. हालांकि देवेंद्र फडणवीस ये साफ कर चुके हैं कि अजित पवार अपने साथ 54 विधायकों के हस्ताक्षर वाली सूची लाये थे और दावा किया था कि ज्यादातर विधायक शिवसेना की बजाय बीजेपी के साथ सरकार बनाने के पक्ष में हैं. अगर ऐसा था तो एक भी एनसीपी का विधायक अजित पवार के साथ आखिरी वक्त तक क्यों नहीं टिका रहा? एनसीपी सूत्रों की मानें तो 24 अक्टूबर को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम में बीजेपी की सीटें कम होते ही एनसीपी और शिवसेना के खेमे में इसका फ़ायदा उठाने की कुलबुलाहट शुरू हो गई थी. एनसीपी मुखिया शरद पवार की दूर दृष्टि ने राज्य में एक नए राजनीतिक समीकरण की तस्वीर देख ली थी. लेकिन खुद उनकी पार्टी में अजित पवार सहित एक बड़ा धड़ा शिवेसना के साथ जाने के पक्ष में नही था. वो चाहता था कि बीजेपी के साथ मिलकर केंद्र और राज्य दोनों जगह सत्ता में सहभागी हो.

लेकिन अजित पवार के साथ पार्टी के ज्यादातर विधायक और नेता बीजेपी के साथ जाने के पक्ष में थे. एनसीपी के एक नेता के मुताबिक इसके लिये 20 के करीब चुनिंदा नेताओं की एक मीटिंग बुलाई गई और चूंकि शरद पवार खुद भी शिवसेना और कांग्रेस के साथ मिलकर आघाडी बनाने के पक्ष में थे इसलिए ज्यादातर को उनकी ईच्छा बता दी गई थी. आखिर वही हुआ जो शरद पवार चाहते थे. ज्यादातर ने शिवसेना के पक्ष में अपनी राय रखी.

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शरद पवार अपनी पार्टी का मन बनाने में तो कामयाब हो गए लेकिन अभी कांग्रेस को मनाना बाकी था. प्रदेश कांग्रेस के नेता तो लगभग तैयार हो चुके थे. दिल्ली से विशेष तौर पर मुम्बई आये अहमद पटेल, के सी वेणुगोपाल और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ शिवसेना के पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे की मुलाकात भी हो चुकी थी. लेकिन कांग्रेस की तरफ से हरी झंडी नहीं मिल पाई थी. जरूरी था कि कांग्रेस सरकार के अंदर आये पर बात बन नहीं रही थी. दिल्ली में शरद पवार और सोनिया गांधी की मुलाकात भी सफल नहीं रही थी.

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