महाराष्ट्र : शालिनी पाटिल ने शरद पवार को याद दिलाया 'विश्वासघात', कहा- अब मिला सबक

शालिनी पाटिल ने कहा- समय का पहिया घूमा है और 41 साल पहले शरद पवार ने जो किया था अजित पवार का कदम उसका सबक है

महाराष्ट्र : शालिनी पाटिल ने शरद पवार को याद दिलाया 'विश्वासघात', कहा- अब मिला सबक

शालिनी पाटिल ने कहा है कि अजित पवार का बीजेपी से हाथ मिलाना शरद पवार के लिए सबक है.

खास बातें

  • वसंतदादा पाटिल की पत्नी शालिनी पाटिल ने शरद पवार को निशाना बनाया
  • 1978 में शरद पवार द्वारा उठाए गए कदम को पीठ में छुरा घोंपने जैसा कहा
  • जैसा व्यवहार वंसतराव के साथ किया था वैसा ही अनुभव परिवार से मिला
पुणे:

महाराष्ट्र (Maharashtra) में रविवार को शरद पवार (Sharad Pawar) का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री वसंतदादा पाटिल की पत्नी शालिनी पाटिल ने 41 साल पहले की घटना को याद किया. अजित पवार (Ajit Pawar) के बीजेपी (BJP) से हाथ मिलाने के कदम को उन्होंने शरद पवार के लिए सबक कहा. उन्होंने सन 1978 में शरद पवार द्वारा उठाए गए कदम को विश्वासघात और पीठ में छुरा घोंपने जैसा कहा. उन्होंने कहा कि समय का पहिया घूमा है और 41 साल पहले शरद पवार ने जो किया था अजित पवार का कदम उसका सबक है.

उल्लेखनीय है कि शनिवार को शरद पवार के भतीजे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता अजित पवार पार्टी के कुछ विधायकों के साथ राजभवन गए और नाटकीय तरीके से उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. इन हालात में शरद पवार को अपना कुनबा बचाने के लिए विधायकों को एक होटल में रखना पड़ा.

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री वसंतदादा पाटिल की पत्नी शालिनी पाटिल ने कहा, ‘‘शरद पवार ने जिस तरह का व्यवहार वंसतराव के साथ किया था. उसी तरह का अनुभव उन्हें परिवार से तब मिला जब अजित पवार ने भाजपा से गठबंधन कर लिया.'' उन्होंने पवार द्वारा सत्ता पर कब्जा करने के लिए 1978 में उठाए गए कदम को ‘‘विश्वासघात और पीठ में छुरा घोंपने'' जैसा करार दिया.

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शालिनी पाटिल ने कहा कि पवार को वसंतदादा से सीधे बात करनी चाहिए थी बजाय गुपचुप तरीके से विधायकों को तोड़ने के. साल 2006 में शालिनी को सामाजिक न्याय के मुद्दे पर पार्टी विरोधी रुख अपनाने के आरोप में एनसीपी से निष्कासित कर दिया गया था.

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उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में फरवरी 1978 में कांग्रेस (एस) को 69 सीटें और कांग्रेस (आई) को 65 सीटों पर जीत मिली थी. जनता पार्टी के खाते में 99 सीटें आई थीं और किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला था. उस समय कांग्रेस के दोनों धड़े सरकार बनाने के लिए एकजुट हुए और कांग्रेस (एस) के वसंतदादा पाटिल मुख्यमंत्री और कांग्रेस (आई) के नाशिकराव तिरपुड़े उप मुख्यमंत्री बने. नई सरकार में रोज-रोज के कलह के बीच पवार नई सरकार बनाने के लिए 38 विधायकों के साथ अलग हो गए और ‘समानांतर कांग्रेस' बनाई. वे तब 38 साल के थे. शरद पवार महाराष्ट्र के सबसे युवा मुख्यमंत्री बन गए थे. उनकी सरकार दो साल तक रही.

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