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SC में दावा : गांधी जी की हत्या से जुड़े दस्तावेजों को अमेरिका से लाने पर भारत सरकार ने लगा रखी है रोक

 सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में याचिकाकर्ता कोर्ट में अर्जी दाखिल करे फिर इस पर विचार किया जाएगा.  याचिकाकर्ता ने कहा कि अमेरिका के अटॉर्नी का पत्र उन्हें मिला है जिसमें कहा गया है कि पुराने फोटो की फोरंसिक जांच की तकनीक उपलब्ध है. लेकिन कोर्ट ने कहा कि पहले ये विचार होगा कि इतने साल बाद हत्या की साजिश की जांच की जरूरत है या नहीं ?

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SC में दावा : गांधी जी की हत्या से जुड़े दस्तावेजों को अमेरिका से लाने पर भारत सरकार ने लगा रखी है रोक

फाइल फोटो

खास बातें

  1. याचिकाकर्ता ने दी हैं कई दलीलें
  2. पुरानी फोटो को बनाया है आधार
  3. गांधी जी की हत्या की फिर से जांच कराने की मांग
नई दिल्ली: महात्मा गांधी की हत्या   की जांच फिर से कराने की याचिका देने वाले  पंकज फडनिस ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया है कि महात्मा गांधी की हत्या से संबंधित कुछ कागजात उन्हें अमेरिका से मिले हैं जो इशारा करते हैं कि हत्या के पीछे कोई साजिश थी. लेकिन भारत सरकार ने इन कागजात के आयात पर रोक लगा रखी है इसलिए वो इन दस्तावेज को खोलकर नहीं देख सकते.  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में याचिकाकर्ता कोर्ट में अर्जी दाखिल करे फिर इस पर विचार किया जाएगा.  याचिकाकर्ता ने कहा कि अमेरिका के अटॉर्नी का पत्र उन्हें मिला है जिसमें कहा गया है कि पुराने फोटो की फोरंसिक जांच की तकनीक उपलब्ध है. लेकिन कोर्ट ने कहा कि पहले ये विचार होगा कि इतने साल बाद हत्या की साजिश की जांच की जरूरत है या नहीं ? मामले अगली सुनवाई छह मार्च को होगी.

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गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि व्यक्ति की महानता और केस को जोड़ा नहीं किया जा सकता. कोर्ट को इस मामले में कानून के मुताबिक चलना होता है. इतने सालों बाद इस केस में कोई सबूत नहीं आ सकता न ही कोई गवाह जिंदा बचा है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कहा कि तीन बातों पर अपना पक्ष रखे. पहला याचिका को लेकर देरी दूसरा आपका इस मामले में लोकस क्या है, और तीसरा अब इस मामले में कोई सबूत नहीं है और न ही कोई गवाह जीवित है तो मामले की सुनवाई आगे कैसे बढ़ेगी.

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सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि एक फोटोग्राफ के आधार पर सुनवाई कैसे कर सकते हैं, जबकि कानून के मुताबिक फोटो लेने वाले को ये बतान होगा कि किन परिस्थितियों में फ़ोटो ली गई है. इससे पहले महात्मा गांधी की हत्या की दोबारा जांच कराने के मामले में एक नया मोड़ आ गया था. महात्मा गांधी की हत्या की दोबारा जांच की जरूरत ना बताते हुए एमिक्स क्यूरी वरिष्ठ वकील अमरेंद्र शरण ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे ये साबित हो कि महात्मा गांधी की हत्या नाथूराम गोडसे की जगह किसी और ने की हो. अमरेंद्र शरण ने अपने जवाब में कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जो याचिकाकर्ता पंकज फडणवीस के उस दावे को साबित करे जिसमें उन्होंने महात्मा गांधी को चार गोलियां लगी थी ये दावा किया था. अमरेंद्र शरण ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जो ये साबित करे कि महात्मा गांधी की हत्या के पीछे किसी और का हाथ था. 

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याचिका में किए गए ये दावे
  1. इस मामले में फांसी पर लटकने वाले नारायण दत्तारेय आप्टे की पहचान पर संदेह है. गांधी की हत्या में विदेशी हाथ होने की आशंका.
  2. अभिनव भारत के ट्रस्टी पंकज फडनीस की इस याचिका में कहा गया है कि 1966 में गांधी की हत्या के पीछे साजिश का पता लगाने के लिए गठित जस्टिस जेएल कपूर जांच आयोग ने कहा था कि आप्टे भारतीय वायु सेना में था.
  3. लेकिन पिछले साल सात जनवरी को तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पारिकर ने जानकारी दी थी कि आप्टे के भारतीय वायु सेना में होने की कोई जानकारी नहीं है. 
  4. पूर्व रक्षा मंत्री से मिली जानकारी के आधार पर याचिकाकर्ता ने कहा कि यह साबित करता है कि 30 जनवरी 1948 को हुई महात्मा गांधी की हत्या में विदेशी हाथ था.
  5. पत्र में पर्रिकर ने कहा है, 'मैंने इस मामले की तहकीकात कराई थी. भारतीय वायुसेना की विभिन्न एजेंसी, रक्षा मंत्रालय के इतिहास प्रभाव और यूनाइटेड किंग्डम की एजेंसी से आप्टे केबारे में जानकारी मांगी गई थी.
  6. सभी एजेंसियों ने कहा कि उनकेपास आप्टे को लेकर कोई रिकॉर्ड नहीं है. पत्र में यह भी कहा गया था कि साल 1949-46 के भारतीय राजपत्र(वायुसेना संभाग) की भी जांच की गई लेकिन आप्टे केभारतीय वायु सेना में अधिकारी होने की कोई जानकारी नहीं है. 
  7. पर्रिकर के इस पत्र केआधार पर याचिकाकर्ता फडणीस का कहना है कि आप्टे के ब्रिटिश फोर्स में होने की प्रबल आशंका है और इसका पता पुन:जांच से ही चल सकता है.
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तुषार गांधी ने किया है फिर से जांच का विरोध
पिछली सुनवाई में 1948 में महात्मा गांधी की हत्या की फिर से जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के दौरान गांधी जी के पोते तुषार गांधी ने इस मामले में पक्षकार बनने की मांग की थी और दोबारा जांच की मांग वाली याचिका का विरोध किया था. वहीं पूर्व इस मामले में अमीकस क्यूरी अमरेंद्र शरण ने कहा कि उन्हें 4 हफ़्ते का समय दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने तुषार गांधी के वक़ील इंद्रा जय सिंह से पूछा कि इस मामले में उनका पक्षकार बनने का आधार क्या है. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सेंटिमेंट के अलावा आपका क्या आधार है कि आपको पक्ष बनाया जाए.


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