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लद्दाख से दूरी, जम्मू-कश्मीर अफसरों की पहली पसंद; दोनों प्रदेशों के कैडर के लिए समिति गठित

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दोनों नए केंद्र शासित प्रदेशों के बीच मानव संसाधन के बंटवारे के लिए एक समिति का गठन कर दिया

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लद्दाख से दूरी, जम्मू-कश्मीर अफसरों की पहली पसंद; दोनों प्रदेशों के कैडर के लिए समिति गठित

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  1. दोनों प्रदेशों में वर्तमान में कुल करीब 277 आईएएस और आईपीएस
  2. दोनों स्थानों पर कुल आईएएस अधिकारियों की संख्या 137
  3. विकल्प चुनने के लिए कहा, अंतिम फैसला सरकार लेगी
नई दिल्ली:

जम्मू-कश्मीर राज्य के दो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के रूप में अस्तित्व में आने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इन प्रदेशों के बीच मानव संसाधन के बंटवारे के लिए एक समिति का गठन कर दिया है. यह समिति दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के बीच मानव संसाधनों को विभाजित करने के सभी पहलुओं पर गौर करेगी. इन दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के बीच कैडर का आवंटन आसान नहीं है क्योंकि अधिकांश अधिकारी केवल जम्मू-कश्मीर कैडर चाहते हैं. बहुत कम लोग लद्दाख कैडर का चुनाव करना चाहते हैं. इसके पीछे विभिन्न कारण हैं.
 
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में वर्तमान में कुल करीब 277 आईएएस और आईपीएस अधिकारी हैं. इनमें से आईएएस अधिकारियों की संख्या 137 है. अधिकारियों को दोनों प्रदेशों में से किसी एक विकल्प का चयन करना होगा. हालांकि अंतिम फैसला सरकार ही लेगी.

जम्मू-कश्मीर कैडर के मौजूदा आईएएस, आईपीएस और जेके कैडर के अन्य केंद्रीय सेवा अधिकारी ही दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में सेवा देते रहेंगे. जब इन प्रदेशों की सेवाओं के लिए एजीएमयूटी कैडर आवंटित किया जाएगा तो इसके लिए नई नियुक्तियां होंगी.


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एनडीटीवी से बातचीत में अधिकांश आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने बताया कि वे जम्मू-कश्मीर कैडर का विकल्प चुनना चाहते हैं. वे लेह-लद्दाख के कठिन जीवन के कारण वहां जाना नहीं चाहते.  सेवा नियमों के अनुसार 40 वर्ष से कम आयु के अधिकारी यदि लद्दाख में पदस्थ होते हैं तो केवल दो वर्किंग सीजन के लिए उनकी तैनाती होती है.

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जम्मू-कश्मीर पुलिस के लिए कुल 84 हजार पुलिस कर्मियों के पद स्वीकृत हैं. इसके अलावा करीब 40 हजार एसपीओ भी भर्ती किए गए हैं.

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